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स्पुतनिक: रूसी वैक्सीन 92 प्रतिशत तक प्रभावी, 59 देश दे चुके हैं मंजूरी जानिए इसके बारे में सब कुछ

Mon, 12 Apr 2021 06:48 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 12 Apr 2021 06:48 PM IST
सार

  • 92% तक प्रभावी
  • दो डोज़ लगेंगे - 21 दिन के अंतराल पर दूसरा डोज़ 
  • अभी अनुमानित कीमत 10$ यानी 750 रु (भारत सरकार सस्ती दे सकती है)
  • दो से आठ डिग्री तापमान में रखी जा सकती है (पाउडर)
  • भारत में तीसरे चरण का परीक्षण जारी

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Sputnik-V: Russian vaccine based on adenovirus will strengthen immune system in this way, know all about vaccine
Sputnik v - फोटो : social media

विस्तार

आखिरकार भारत में कोरोना के खिलाफ जंग में एक और शस्त्र मिल ही गया। भारत की विशेषज्ञ समिति ने रूस की स्पुतनिक-वी (Sputnik-V) वैक्सीन के आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। स्पुतनिक-वी वैक्सीन कोरोना वायरस के खिलाफ 91.6 फीसदी असरकारी साबित हुई है। इस वैक्सीन की क्या है खासियत और कैसे यह कोरोना का बचाव करती है,आइये जानते हैं इसके बारे में सब कुछ : 

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रूस का यह कोरोना रोधी टीका श्वसन रोग पैदा करने वाले एडेनोवायरस-26 (Ad26) और एडेनोवायरस-5 (Ad5) पर आधारित है। इसका इस्तेमाल कोरोना वायरस (सार्स कोव-2) स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ मजबूत प्रतिरक्षा तंत्र तैयार करने में किया जाता है। इसकी दो अलग-अलग खुराक 21-21 दिन के अंतराल में दी जाती है। आमतौर पर सभी कोरोना वैक्सीन की दोनों खुराक में एक ही दवा दी जाती है, लेकिन स्पूतनिक-वी की दोनों खुराक में अलग-अलग दवा दी जाती है। 
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91.6 फीसदी असरकारी
स्पुतनिक-वी ट्रायल में 91.6 फीसदी असरकारी पाई गई है। इस वैक्सीन का काम शरीर में पहले से मौजूद एडेनोवायरस को नष्ट करना है, ताकि संक्रमित व्यक्ति गंभीर श्वसन रोग का शिकार न हो। रूस के गमलेया रिसर्च सेंटर द्वारा विकसित वैक्सीन 'स्पूतनिक-वी' का ट्रायल भारत में हैराबाद की जानी-मानी कंपनी डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज ने किया। यह तीसरी वैक्सीन है, जो भारत में कोरोना के खिलाफ जंग में मददगार बनेगी। 
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कोविशील्ड व कोवैक्सीन के बाद अब स्पुतनिक
देश में फिलहाल एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड व भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन से टीकाकरण किया जा रहा है। कोविशील्ड 80 फीसदी असरकारी है, जबकि कोवैक्सीन 81। रूसी वैक्सीन स्पुतनिक इन दोनों के मुकाबले ज्यादा असरकारी बताई जा रही है। इसकी कीमत भी 700 रुपये से कुछ अधिक रहेगी। हालांकि भारत में सरकार इन टीकों का मूल्य तय कर रही है, इसलिए हो सकता है यह इससे भी कम कीमत पर मुहैया कराई जाए। 

59 देश दे चुके हैं मंजूरी
स्पुतनिक-वी को अब तक 59 देश मंजूरी दे चुके हैं। इनमें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बेलारूस, सर्बिया, बोलिविया, अर्जेंटीना, वेनेजुएला, फिलिस्तीन, अल्जीरिया, तुर्कमेनिस्तान और पैराग्वे शामिल हैं। 

रूस की पहली सैटेलाइट से मिला वैक्सीन को नाम
इस वैक्सीन का नाम रूस की पहली सैटेलाइट स्पूतनिक से मिला है। जिसे रूस ने 1957 में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ने लॉन्च किया था। उस समय भी रूस और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष होड़ चरम पर थी। कोरोना वायरस वैक्सीन के विकास को लेकर भी अमेरिका और रूस के बीच प्रतिद्वंदिता चल रही थी। 

रूस के वेल्थ फंड के मुखिया किरिल दिमित्रीव ने वैक्सीन के विकास की प्रक्रिया को 'स्पेस रेस' जैसा बताया था। उन्होंने US TV को बताया, 'जब अमेरिका ने Sputnik (सोवियत यूनियन की बनाई दुनिया की पहली सैटलाइट) की आवाज सुनी तो वे हैरान रह गए, यही बात वैक्सीन के साथ है।


चोरी कर वैक्सीन बनाने का आरोप
दूसरी ओर पश्चिमी देशों का आरोप है कि रूस ने उनकी रिसर्च चोरी कर वैक्सीन बनाई है। अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों ने बकायदा बयान जारी कर इस बात का आरोप लगाया था कि रूस की खुफिया एजेंसियों से जुड़े हैकिंग ग्रुप APT29 (Cozy Bear) ने अभियान छेड़ रखा है। उन्होंने दावा किया कि यह ग्रुप रूस की खुफिया एजेंसियों का हिस्सा है और क्रेमलिन के इशारे पर काम करता है। 

इबोला वैक्सीन भी रूस ने बनाई थी
इससे पहले रूस के इसी गमलेया रिसर्च सेंटर ने इबोला रोधी वैक्सीन भी बनाई थी। मास्को  स्थित इस संस्थान का नाम गमलेया नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर एपिडेमिओलॉजी एंड माइक्रो बॉयोलाजी है। 

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