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Sports Bill: संसद में जल्द आएगा खेल विधेयक, युवा कल्याण मंत्रालय ने कहा- खेलों और खिलाड़ियों को मिलेगा लाभ

Mon, 14 Oct 2024 05:49 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Mon, 14 Oct 2024 05:49 PM IST
सार

खेल विधेयक से खिलाड़ियों को खासा लाभ मिलेगा। 

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Sports Bill will come in Parliament soon, Youth Welfare Ministry said- Sports and players will get benefits
भारतीय संसद (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

खेलों के विकास को लेकर सरकार लगातार पहल कर रही है। युवा कल्याण और खेल मंत्रालय ने कहा कि संसद में जल्द ही खेल विधेयक पेश किया जाएगा। युवा मामले और खेल मंत्रालय ने बताया कि लोगों से सुझावों को आमंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2024 का मसौदा सार्वजनिक डोमेन में डाल दिया गया है। खेल विधेयक का उद्देश्य खेलों के विकास और संवर्धन, खिलाड़ियों के लिए कल्याणकारी उपायों, सुशासन प्रथाओं के माध्यम से खेलों में नैतिक प्रथाओं का प्रावधान करना,  खेल महासंघों के प्रशासन के लिए संस्थागत क्षमता और विवेकपूर्ण मानकों की स्थापना करना,  खेल संबंधी शिकायतों और खेल विवादों के समाधान के लिए एकीकृत, न्यायसंगत और प्रभावी तरीके से उपाय स्थापित करना है।

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मंत्रालय ने बताया कि विधेयक के तहत भारतीय खेल विनियामक बोर्ड की स्थापना की जाएगी। जो राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSF) को मान्यता प्रदान करने तथा शासन, वित्तीय और नैतिक मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होगा। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय नीतियों के अनुरूप तथा राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए एक शासन संरचना निर्धारित की जाएगी। जो यह तय करेगी कि मान्यता प्राप्त निकायों को ओलंपिक चार्टर, पैरालंपिक चार्टर तथा संबंधित अंतरराष्ट्रीय महासंघों द्वारा स्थापित विनियमों के अनुसार संचालित किया जाएगा।
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इसके साथ ही विधेयक खेल संघों में नैतिक शासन के लिए अनिवार्य प्रावधान प्रस्तुत करेगा। विधेयक खेल संघों के शासन को सुनिश्चित करता है। विधेयक के तहत एथलीट आयोगों का गठन किया जाएगा। ताकि एथलीटों का प्रतिनिधित्व हो और उन्हें अपनी चिंताओं को व्यक्त करने, निर्णय लेने में भाग लेने और नीति निर्माण में योगदान देने के लिए एक मंच मिले।
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वहीं कार्यकारी समितियों में एथलीट प्रतिनिधित्व किया जाएगा। एनओसी, एनपीसी और एनएसएफ की आम सभा में मतदान करने वाले सदस्यों में से 10% उत्कृष्ट योग्यता वाले खिलाड़ी (एसओएम) होंगे। जिन्हें एथलीट आयोग द्वारा चुना जाता है। विधेयक के तहत सुरक्षित खेल नीति शुरू की गई है। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों, विशेषकर नाबालिगों और महिलाओं को उत्पीड़न और दुर्व्यवहार से बचाना तथा महिलाओं को यौन उत्पीड़न से सुरक्षा देने संबंधी अधिनियम (POSH) 2013 का सख्ती से पालन करना है। 

मंत्रालय ने बताया कि विधेयक खेल प्रशासन, एथलीट समर्थन और विकास को बढ़ावा देने वाले एनएसपीओ की मान्यता और विनियमन के लिए दिशा-निर्देश स्थापित करता है। यह संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करता है और गैर सरकारी संगठनों और निजी संगठनों के लिए विस्तारित भूमिका प्रदान करता है। इसके अलावा यह अपीलीय खेल न्यायाधिकरण भारत में खेल से संबंधित सभी विवादों को संभालेगा। जिससे दीवानी अदालतों पर निर्भरता कम होगी और शिकायतों का तेजी से समाधान होगा। 

इसके अलावा खेल महासंघों द्वारा अनुपालन न करने या निलंबन की स्थिति में, विधेयक खेल विनियामक बोर्ड को तदर्थ सामान्यीकरण समितियों का गठन किया जाएगा। जो अंतरराष्ट्रीय महासंघों के परामर्श से इन निकायों को अस्थायी रूप से प्रशासित करेंगी, जिससे खेल प्रशासन में निरंतरता सुनिश्चित होगी।

मंत्रालय के मुताबिक विधेयक खेलों में नैतिक व्यवहार के महत्व को रेखांकित करता है। जिसमें डोपिंग रोधी उपाय, अंतर्राष्ट्रीय नियमों का सख्त अनुपालन और उल्लंघन के लिए सख्त दंड शामिल हैं। जिससे भारत ओलंपिक के लिए एक स्वच्छ और निष्पक्ष मेजबान के रूप में स्थापित होगा। विधेयक में एनओसी, एनपीसी और एनएसएफ को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम (प्रदर्शन और चिकित्सा डेटा के लिए विशिष्ट अपवर्जन के साथ) के अधीन किया गया है।


स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए खेल चुनाव पैनल से चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति करेंगे। पैनल में ऐसे अधिकारी शामिल होंगे जिन्हें देश में चुनाव कराने का व्यापक अनुभव है। विधेयक के तहत केवल मान्यता प्राप्त खेल निकायों को ही भारतीय ध्वज या राष्ट्रीय नाम के उपयोग की अनुमति होगी। उल्लंघन करने पर जुर्माना और सज़ा हो सकती है जो एक वर्ष या 10 लाख रुपये या दोनों हो सकती है। मंत्रालय ने 25 अक्तूबर तक जनता से विधेयक को लेकर सुझाव मांगे हैं। 

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