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Hindi News ›   India News ›   Special Session Of Kerala Legislative Assembly On 23 December To Discuss Agricultural Laws

केरल: विधानसभा का विशेष सत्र 23 दिसंबर से, कृषि कानूनों पर होगी चर्चा

Mon, 21 Dec 2020 07:57 PM IST
योगेश साहू पीटीआई, तिरुवनंतपुरम।
पीटीआई, तिरुवनंतपुरम। Published by: योगेश साहू Updated Mon, 21 Dec 2020 07:57 PM IST
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Special Session Of Kerala Legislative Assembly On 23 December To Discuss Agricultural Laws
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन - फोटो : ANI

केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों पर चर्चा करने और उनके विरूद्ध प्रस्ताव पारित करने के लिए बुधवार को केरल विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया जा रहा है। इन तीनों कानूनों को वापस लिये जाने पर जोर देते हुए दिल्ली की सीमाओं पर देश के विभिन्न राज्यों के किसान करीब एक महीने से डेरा डाल हुए हैं।

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आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सोमवार को मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य की माकपा नीत वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने इन कानूनों पर चर्चा के लिये विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया।
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राज्य के वित्त मंत्री थॉमस आइजक ने ट्वीट किया किया कि केरल किसानों के संघर्ष में उनके साथ है और इस सत्र में इन कानूनों पर चर्चा करके उन्हें खारिज किया जाएगा।
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मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि मंत्रिमंडल ने राज्यपाल को 23 दिसम्बर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की सिफारिश करने का निर्णय लिया है। यह सत्र तीन कृषि कानूनों पर चर्चा के लिए बुलाया जा रहा है, जिनके विरूद्ध किसानों ने देशव्यापी आंदोलन कर रखा है।

विधानसभा सूत्रों ने बताया कि इस संक्षिप्त सत्र में केंद्र द्वारा बनाये गये तीन कृषि कानूनों पर चर्चा की जाएगी और उनके विरूद्ध प्रस्ताव पारित किया जाएगा। इस चर्चा में बस संबंधित दलों के नेता ही हिस्सा लेंगे।

आइजक ने ट्वीट किया कि केरल मंत्रिमंडल ने निर्धारित सत्र से पहले कृषि कानूनों पर चर्चा करने और उसे खारिज करने के लिए 23 दिसम्बर को विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है। किसानों के इस संघर्ष में केरल पूरी तरह उनके साथ है।

दिल्ली से लगी विभिन्न सीमाओं पर हजारों की संख्या में किसान बीते करीब चार हफ्ते से प्रदर्शन कर रहे हैं और नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।


गौरतलब है कि केन्द्र सरकार जहां तीनों कृषि कानूनों को कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश कर रही है, वहीं आंदोलनकारी किसानों ने आशंका जताई है कि नए कानूनों से एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और वे बड़े औद्योगिक घरानों पर निर्भर हो जाएंगे।

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