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गुजराती लेखक और साहित्यकार फादर वाल्स का निधन, प्रधानमंत्री ने शोक जताया

Mon, 09 Nov 2020 07:25 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Mon, 09 Nov 2020 07:25 PM IST
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Spain based Gujarati author priest dies Prime minister Narendra modi express grief
PM Modi - फोटो : twitter

स्पेन में रहने वाले गुजराती लेखक एवं लोकप्रिय साहित्यकार फादर कार्लोस गोंजालेस वाल्स का सोमवार को निधन हो गया। वह 95 साल के थे। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने शोक जताया।

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फादर वाल्स ने गुजराती भाषा में कई किताबें लिखी हैं और गुजरात विश्वविद्यालय में कई दशकों तक गणित पढ़ाया।  
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर फादर वाल्स के निधन पर दुख जताया। मोदी ने लिखा, ''फादर वाल्स ने विशेष रूप से गुजरात में खुद को लोकप्रिय बना लिया। उन्होंने खुद को गणित और गुजराती साहित्य जैसे कई क्षेत्रों में प्रतिष्ठित किया। वह समाजसेवा करने के लिए तत्पर रहते थे। उनके निधन से दुखी हूं। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।''

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी शोक जताते हुए कहा कि फादर वॉल्स मूल रूप से गुजराती नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी लेखनी से गुजराती के तौर पहचान स्थापित की। गुजराती भाषा और साहित्य में अहम योगदान दिया। उनके निधन से गुजराती साहित्य को अपूरणीय क्षति हुई है।

कांग्रेस सासंद अहम पटेल, गुजरात कांग्रेस ईकाई के प्रमुख अमित चावड़ा और गुजरात विधानसभा में विपक्ष के नेता परेश धनानी ने फादर वाल्स के निधन पर शोक जताया। कांग्रेस ने बयान जारी कहा , फादर वाल्स के निधन से गुजरात ही नहीं बल्कि पूरे देश ने साहित्य के एक उत्कृष्ट साहित्यकार, एक संवेदनशील और प्रेमर्पूण व्यक्तित्व को खो दिया। 

15 साल की उम्र में भारत आए थे फादर 
फादर वाल्स का जन्म 4 नवंबर, 1925 को स्पेन के लॉग्रोनोमें हुआ था। वह 15 साल की उम्र एक मिशनरी के रूप में भारत आए थे। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अहमदाबाद में गुजरात विश्वविद्यालय में गणित पढ़ाने लगे थे। 


वर्ष 160 में गुजरात मुंबई से अलग होकर एक अलग राज्य बन गया था, तब उन्होंने अपने बारे में कॉलम लिखा था, "मैंने अहमदाबाद में गणित पढ़ाना शुरू कर दिया। मैं इसके साथ आगे बढ़ता जा रहा हू। मैंने अपने शरीर और अपनी आत्मा को शिक्षण कार्य के लिए समर्पित कर दिया है।''
इसके बाद उन्होंने स्पेनिश भाषा में कई किताबें लिखीं। गुजरात के समाचार पत्रों में नियमित कॉलम लिखे। गुजराती भाषा में कई किताबें लिखीं। कई भाषाओं में किताबों और लेखों को ट्रांसलेट किया। 
 

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