South Africa Coronavirus: चौथी लहर में रिकॉर्ड मामले सामने आने के बावजूद सख्त लॉकडाउन नहीं लगाएगा दक्षिण अफ्रीका
दक्षिण अफ्रीका में सामने आया कोरोना वायरस का नया और अधिक संक्रामक वैरिएंट ओमिक्रॉन पूरी दुनिया के लिए संकट का सबब बन गया है। वहीं, दक्षिण अफ्रीका ने मामले तेजी से बढ़ने के बाद भी सख्त प्रतिबंधों को लागू न लेने का फैसला किया है। उधर एक फार्मा कंपनी ने कोरोना की खाने वाली दवा का ट्रायल दक्षिण अफ्रीका में शुरू किया है।
विस्तार
दक्षिण अफ्रीका की कोविड-19 रोधी प्राधिकरण ने गुरुवार को एलान किया कि कोरोना वायरस महामारी की चौथी लहर के दौरान रिकॉर्ड मामले सामने आने के बाद भी यहां लॉकडाउन के प्रतिबंध पांच स्तरीय रणनीति के सबसे निचले स्तर पर रहेंगे। यहां एक रात में संक्रमण के 26,976 मामले सामने आए हैं। यहां पर संक्रमण में तेजी का मुख्य कारण नया वैरिएंट ओमिक्रॉन बना है जो सबसे पहले इसी देश में सामने आया था।
राष्ट्रीय कोरोना वायरस कमांड काउंसिल (एनसीसीसी) ने इस बात की पुष्टि की है कि देश अब कोरोना महामारी की चौथी लहर में हैं। इसने अपने नागरिकों से अपील की है कि शारीरिक दूरी का पालन करें, मास्क पहनें और साफ-सफाई का ध्यान रखें ताकि संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके। साथ ही भीड़-भाड़ वाले आयोजनों से दूर रहने की अपील की गई है क्योंकि ऐसे आयोजन बीमारी के सुपर स्प्रेडर बन सकते हैं।
भर्ती व मौत के आंकड़े तुलनात्मक रूप से कम
कोरोना वायरस रोधी प्राधिकरण की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि नई लहर मुख्य रूप से वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट की वजह से है जो पिछली लहरों के मुकाबले अधिक तेजी से फैल रही है। हालांकि, अस्पताल में भर्ती होने के मामले और संक्रमण से मौत के आंकड़े तुलनात्मक रूप से कम हैं। इसमें कहा कि मामले बढ़ने के बावजूद देश प्रतिबंधों के लिए अपनी पांच स्तरीय रणनीति के सबसे निचले चरण में रहेगा।
तेजी से बढ़ रहे हैं कोविड-19 संक्रमण के मामले
दक्षिण अफ्रीका में इस समय कोरोना संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 32 लाख 31 हजार 31 हो गई है। इसके अलावा अब तक यहां इस महामारी की वजह से 90,226 लोगों की जान जा चुकी है। कोरोना वायरस का अधिक संक्रामक वैरिएंट इसी देश में सामने आया था। डब्ल्यूएचओ के अनुसार अब यह वैरिएंट दुनिया के लगभग हर देश में पहुंच चुका है, भले की अभी तक वहां इससे संक्रमण के मामलों की पुष्टि न हो पाई हो।
कोरोना की नई खाने वाली दवा के ट्रायल शुरू
अमेरिकी-इस्राइली फार्मास्यूटिकल कंपनी ओरामेड की सहायक कंपनी ओरावैक्स मेडिकल इंक ने कोरोना वायरस की अपनी खाने वाली दवा के पहले चरण का क्लिनिकल परीक्षण दक्षिण अफ्रीका में शुरू कर दिया है। ओरामेड का कहना है कि इस दवाई के पहले चरण के अध्ययन के लिए दक्षिण अफ्रीका अच्छी जगह है। यहां मामलों में तेजी आ रही है और इसे वैक्सीन की उपलब्धता के लिए भी संघर्ष करना पड़ा है।
ओरामेड के सीईओ नदाव किद्रों ने एक बयान में कहा कि हम पहले चरण का ट्रायल जल्द से जल्द पूरा करना चाहते हैं। हमारा मानना है कि वैक्सीन में सिरिंज और टीके के स्थान पर कोरोना वायरस की खाने वाली दवा का वितरण करना और प्रशासन आसान होगा और दक्षिण अफ्रीका और इसके जैसे बाकी देशों में इस जानलेवा महामारी के खिलाफ अधिक प्रभावी तरीके से लोगों को सुरक्षित किया जा सकेगा।