चीन ने फिर की घुसपैठ, उत्तराखंड में भारतीय सीमा में घुसे 200 चीनी सैनिक
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भारत और चीन के बीच सिक्किम सेक्टर के दोकलम में जारी सैन्य तनाव के बीच अब उत्तराखंड में चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की है। यहां चमोली जिले के बाड़ाहोती में चीन के करीब 200 सैनिक भारतीय क्षेत्र में एक किलोमीटर अंदर तक घुस आए और वहां चरवाहों को धमकाने लगे। यह घटना देश की अंतिम चौकी रिमखिम के पास घटी।
नई दिल्ली में अधिकारियों ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि 25 जुलाई की सुबह पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जवानों ने वहां जानवर चरा रहे चरवाहों को धमकाया और चले जाने को कहा। बताया जाता है कि चीनी सैनिक वहां एक घंटे तक रहे।
हालांकि चमोली जिला प्रशासन चीनी सैनिकों की घुसपैठ से इनकार कर रहा है। चमोली के डीएम आशीष जोशी के मुताबिक, 25 जुलाई को बाड़ाहोती में चीनी सैनिकों की घुसपैठ की कोई सूचना नहीं है। उच्च अधिकारियों ने भी इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मांगी है। जोशीमठ प्रशासन से भी मामले की जानकारी ली गई, लेकिन सीमा क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गतिविधि की सूचना नहीं मिली है।
बाड़ाहोती को दोनों देशों ने माना है विवादित क्षेत्र
अधिकारियों के मुताबिक, 80 वर्ग किलोमीटर के ढलान वाला चारागाह बाड़ाहोती उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ‘मिडिल सेक्टर’ में पड़ने वाली उन तीन सीमा चौकियों में से एक है, जहां आईटीबीपी को हथियार ले जाने की इजाजत नहीं है। वर्ष 1958 में दोनों देशों ने बाड़ाहोती को एक विवादित क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया था, जहां कोई भी पक्ष अपने सैनिक नहीं भेजेगा। वर्ष 1962 के युद्ध में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी 545 किलोमीटर के मिडिल सेक्टर में नहीं घुसी। उसने अपना ध्यान पश्चिमी (लद्दाख) और पूर्वी (अरुणाचल प्रदेश) सेक्टरों पर केंद्रित रखा था।
आईटीबीपी को हथियार ले जाने की इजाजत नहीं
1962 की जंग के बाद आईटीबीपी के जवान इस क्षेत्र में नॉन कांबेट तरीके से गश्त लगाते थे। यानी गश्त के समय उनकी बंदूक की नली नीचे की ओर होती है। सीमा विवाद समाधान के लिए वर्ष 2000 जून में हुई वार्ता के दौरान भारत ने एकतरफा यह माना था कि उसके सैनिक तीन पोस्टों पर हथियार साथ नहीं रखेंगे।
ये पोस्टें हैं- उत्तराखंड की बाड़ाहोती और हिमाचल प्रदेश की करौली और शिपकी। यहां आईटीबीपी के जवान सिविल ड्रेस में गश्त लगाते हैं। बाड़ाहोती के चारागाह में सीमावर्ती गांवों से भारतीय चरवाहे अपनी भेड़ों और तिब्बत के लोग अपने याक को चराने आते हैं।
बार-बार घुसपैठ करता रहा है चीन
बाड़ाहोती में चीन की ओर से कई बार घुसपैठ की कोशिश की जा चुकी है। तीन जून को दो चीनी हेलीकॉप्टर बाड़ाहोती क्षेत्र में करीब तीन मिनट तक मंडराते रहे। इससे पहले, वर्ष 2014 में भी एक चीनी हेलीकॉप्टर वहां काफी देर तक मंडराता रहा। वर्ष 2015 में चीनी सैनिकों की ओर से भारतीय चरवाहों के खाद्यान्न को नष्ट कर दिया गया था।
वर्ष 2016 में सीमा क्षेत्र के निरीक्षण पर गई चमोली प्रशासन की टीम का भी चीनी सैनिकों से सामना हुआ था। यहां बता दें कि चमोली जिले के अंतिम नगर क्षेत्र जोशीमठ से आईटीबीपी की अंतिम रिमखिम चौकी करीब 105 किलोमीटर पर स्थित है। यहां से आगे नो मेंस लेंड बाड़ाहोती एरिया है।