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कई सरकारी वेबसाइट हो सकती हैं हैक, साइबर एक्सपर्ट्स ने किया आगाह
अमित कुमार निरंजन /अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 13 Oct 2016 01:05 AM IST
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साइबर क्राइम
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आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण सरकारी वेबसाइटें हैक होने की आशंका जताई गई हैं। क्योंकि कई दर्जन सरकारी वेबसाइटों का सुरक्षा कवच बेहद कमजोर है। ये आशंका साइबर विशेषज्ञों और हैकरों ने जाहिर की है। इनका कहना है कि कुछ दिन पहले पाक हैकर द्वारा एनजीटी की वेबसाइट हैक होने के कुछ माह पहले भारतीय हैकरों ने कमजोर सुरक्षा कवच वाले वेबसाइटों की सूची केंद्र सरकार को सौंपी थी।
साइबर विशेषज्ञों का दावा है कि हैकरों द्वारा ये पता लगाना मुश्किल नहीं है कि किस वेबसाइट का सुरक्षा कवच कितना मजबूत है। गूगल के एक विशेष टूल (सुरक्षा कारणों से नाम नहीं दे रहे) के माध्यम से यह पता लगाया कि दुनिया के किसी भी वेबसाइट के सुरक्षा इंतजामों का पता लगाया जा सकता है। हालांकि वेबसाइटों की सुरक्षा की देखरेख के लिए भारत सरकार ने भारतीय आपात प्रतिक्रिया दल (सर्ट इन) का गठन किया है। वेबसाइटों की सुरक्षा जांच के लिए ऑडिट एजेंसियों को सर्ट इन ही मान्यता देती है। ये ऑडिट एजेंसी किसी वेबसाइट की सुरक्षा इंतजामों में खामी को दूर करने का काम करती है।
इंडियन साइबर आर्मी के निदेशक और साइबर एक्सपर्ट किसलय चौधरी के मुताबिक ऐसी कोई रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे पता लग सके कि किस एजेंसी के ऑडिट करने के बाद कौन सी सरकारी वेबसाइट हैक हुई है और न ही बार-बार हैक होने वाली वेबसाइट को ऑडिट एजेंसी पर कार्रवाई की गई है। उधर, अमर उजाला को आरटीआई से पता लगा था कि 2012-2016 तक 979 सरकारी वेबसाइट हैक की गई।
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साइबर विशेषज्ञों का दावा है कि हैकरों द्वारा ये पता लगाना मुश्किल नहीं है कि किस वेबसाइट का सुरक्षा कवच कितना मजबूत है। गूगल के एक विशेष टूल (सुरक्षा कारणों से नाम नहीं दे रहे) के माध्यम से यह पता लगाया कि दुनिया के किसी भी वेबसाइट के सुरक्षा इंतजामों का पता लगाया जा सकता है। हालांकि वेबसाइटों की सुरक्षा की देखरेख के लिए भारत सरकार ने भारतीय आपात प्रतिक्रिया दल (सर्ट इन) का गठन किया है। वेबसाइटों की सुरक्षा जांच के लिए ऑडिट एजेंसियों को सर्ट इन ही मान्यता देती है। ये ऑडिट एजेंसी किसी वेबसाइट की सुरक्षा इंतजामों में खामी को दूर करने का काम करती है।
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इंडियन साइबर आर्मी के निदेशक और साइबर एक्सपर्ट किसलय चौधरी के मुताबिक ऐसी कोई रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे पता लग सके कि किस एजेंसी के ऑडिट करने के बाद कौन सी सरकारी वेबसाइट हैक हुई है और न ही बार-बार हैक होने वाली वेबसाइट को ऑडिट एजेंसी पर कार्रवाई की गई है। उधर, अमर उजाला को आरटीआई से पता लगा था कि 2012-2016 तक 979 सरकारी वेबसाइट हैक की गई।
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आतंकियों के निशाने पर बेवसाइट
DEMO PIC
- फोटो : demo pic
गौरतलब है कि पीओके में भारतीय सेना द्वारा सर्जिकल अटैक के बाद पाक हैकरों ने एनजीटी की वेबसाइट हैक कर ली थी। इसके काउंटर में एक भारतीय हैकर ने भी पाकिस्तान की सरकारी सर्वर को हैक कर उस पर पूरा नियंत्रण कर लिया। हैकरों का दावा है कि ऐसा पहली बार हुआ था कि भारतीय हैकर ने पूरे सरकारी सर्वर को अपने नियंत्रण किया। साइबर विशेषज्ञ इसे एनक्रप्ट करना कहते हैं।
पॉर्न और आतंकवाद का गठजोड़
वेबसाइट को पूरी तरह से ब्लॉक नहीं किया जा सकता है। उसके किसी छोटे हिस्से के यूआरएल को ही ब्लॉक कर सकते हैं। आरटीआई से पता चलता है कि भारत सरकार ने पांच सालों में 10 हजार 252 आतंकी और पॉर्न यूआरएल ब्लॉक किए हैं। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक भारत समेत कई देशों में पॉर्न वेबसाइट ज्यादा देखे जाने के कारण आतंकी इन्हें अपना निशाना बनाते हैं। हैकर पॉर्न वेबसाइट हैक कर दहशत फैलाने वाले वीडियो या फोटो पॉर्न वेबसाइट पर अपलोड कर देते हैं।
पॉर्न और आतंकवाद का गठजोड़
वेबसाइट को पूरी तरह से ब्लॉक नहीं किया जा सकता है। उसके किसी छोटे हिस्से के यूआरएल को ही ब्लॉक कर सकते हैं। आरटीआई से पता चलता है कि भारत सरकार ने पांच सालों में 10 हजार 252 आतंकी और पॉर्न यूआरएल ब्लॉक किए हैं। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक भारत समेत कई देशों में पॉर्न वेबसाइट ज्यादा देखे जाने के कारण आतंकी इन्हें अपना निशाना बनाते हैं। हैकर पॉर्न वेबसाइट हैक कर दहशत फैलाने वाले वीडियो या फोटो पॉर्न वेबसाइट पर अपलोड कर देते हैं।