उठापटक: तो क्या एकनाथ शिंदे की कुर्सी भी जाने वाली है! क्यों हो रही है चर्चा कि अब महाराष्ट्र का CM भी बदलेगा
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विस्तार
सियासत की नई प्रयोगशाला बन रहे महाराष्ट्र में क्या अब कुछ और नए प्रयोग होने वाले हैं। आखिर महाराष्ट्र में यह क्यों कयास लगाए जा रहे हैं कि अब प्रदेश में मुख्यमंत्री भी बदला जा सकता है। दरअसल राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कुछ समय से महाराष्ट्र के भीतर यह चर्चा हो रही थी कि जैसे ही अजीत पवार महाराष्ट्र सरकार में शामिल होंगे, उसके बाद कुछ और बड़े सियासी उलटफेर हो सकते हैं। मुख्यमंत्री बदलने की आशंका पर भारतीय जनता पार्टी के ही कुछ नेता और मंत्री लगातार यह कहते आए हैं कि राज्य की सबसे बड़ी पार्टी के नेता देवेंद्र फड़णवीस को लोग बतौर मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं। अब जब एनसीपी के अजीत पवार के नौ विधायक मंत्रिमंडल में शामिल हुए हैं तो इस बात के कयास और ज्यादा बढ़ गए हैं कि महाराष्ट्र की सियासत में अगले कुछ दिन सियासी रूप से और महत्वपूर्ण हैं।
कुछ महीनों से लगाए जा रहे हैं कयास
महाराष्ट्र में बीते एक साल से चल रही सियासी उठापटक के बीच रविवार को एक और बड़ा घटनाक्रम हुआ। इस दौरान महाराष्ट्र के बड़े एनसीपी नेता अजित पवार ने बतौर उपमुख्यमंत्री शपथ लेने के बाद अपने कई विधायकों के साथ महाराष्ट्र सरकार में शामिल हो गए। राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु शितोले कहते हैं कि महाराष्ट्र में बीते कुछ समय से मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें तो लगाई जा रही थी। यहां तक कि शिवसेना के नेता उद्धव ठाकरे ने भी मुख्यमंत्री बदले जाने का दावा किया था। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि उद्धव ठाकरे ने अपने मुखपत्र सामना में मुख्यमंत्री बदले जाने और देवेंद्र फड़णवीस और एकनाथ शिंदे गुट के बीच चल रही कुर्सी की जंग के बारे में जिक्र भी किया था।
अजित पवार के आने से एकनाथ शिंदे गुट होगा कमजोर
महाराष्ट्र में एनसीपी के नेता अजित पवार के सरकार में शामिल होने के बाद इस बात के कयास अब और ज्यादा लगाए जाने लगे हैं कि क्या महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री भी बदला जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के साथ अजित पवार के आने से एकनाथ शिंदे गुट की ताकत कुछ कमजोर होगी। ऐसी दशा में भारतीय जनता पार्टी राज्य में सत्ता के पावर बैलेंस करने के लिए सिर्फ एकनाथ शिंदे गुट पर निर्भर नहीं रहेगी। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषण प्रदीप सिंह कहते हैं कि इस बात को लेकर चर्चाएं तो हो रही हैं लेकिन अभी इसमें एक महत्वपूर्ण पेंच यह फंस रहा है कि क्या अजित पवार के साथ एकनाथ शिंदे गुट के बराबर विधायक आए हैं या नहीं।
जादुई अंकों को छूने पर हो सकता है सियासी उलटफेर
प्रदीप कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के पास महाराष्ट्र में एक सौ पांच विधायक हैं। एकनाथ शिंदे के साथ आए चालीस विधायकों का साथ मिलने से यह आंकड़ा एक सौ पैंतालीस सीटों का हो गया। वो कहते हैं कि महाराष्ट्र में एनसीपी के 53 विधायक हैं और कांग्रेस के 45 विधायक हैं जबकि 29 अन्य विधायक भी हैं। ऐसे में जब तक भारतीय जनता पार्टी को एकनाथ शिंदे के साथ आए चालीस विधायकों की संख्या के बराबर की ताकत अजीत पवार से नहीं मिलेगी तब तक महाराष्ट्र की सियासत में कोई बड़े उलटफेर की संभावना नहीं दिख रही है। हालांकि उनका कहना है जिस तरीके से महाराष्ट्र में सियासी उलटफेर हो रहा है उसमें भविष्य की राजनीति किस करवट बैठेगी इसका अंदाजा लगाना अभी मुश्किल है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर अजित पवार के साथ विधायकों की संख्या एकनाथ शिंदे से ज्यादा हो जाती है तो निश्चित तौर पर महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर बदल सकती है।
महाराष्ट्र के मंत्री ने भी की थी मांग की देवेंद्र फड़णवीस हों मुख्यमंत्री
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि महाराष्ट्र में जिस तरीके से सरकार बनाई गई थी उसके बाद चल तो सब कुछ ठीक रहा है लेकिन भारतीय जनता पार्टी के खेमे में इस बात की चर्चा हो रही है कि मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी का ही हो। उसमें पहला नाम देवेंद्र फड़णवीस का चल रहा है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अरुण वाडवलकर का कहना है कि यह बात सच है कि महाराष्ट्र की सियासत में पिछले साल जुलाई में बने समीकरणों की सरकार में एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री तो बना दिया गया लेकिन सबसे ज्यादा सीटों वाली भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री न होना पार्टी के एक बड़े खेमे को रास नहीं आ रहा है। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी के विधायक और सरकार में राजस्व मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान मांग रखी थी कि महाराष्ट्र के लोग देवेंद्र फड़णवीस को बतौर मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं। इसको लेकर महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी के नेता लगातार कुछ मंचो पर अपनी आवाज भी उठाते आए हैं।