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कर्ज माफी से किसानों के छोटे वर्ग को ही होगा फायदा : नीति आयोग 

Sun, 09 Dec 2018 09:21 PM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Sun, 09 Dec 2018 09:21 PM IST
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small group of farmers will be benefitted from debt waiver
NITI Aayog
देश भर में लगातार बढ़ रही कृषि माफी की मांग और राजनीतिक दलों के वादों के बीच नीति आयोग के सदस्य और कृषि नीति विशेषज्ञ रमेश चंद का कहना है कि इससे किसानों के बहुत छोटे वर्ग को ही फायदा पहुंचेगा। वह कृषि कर्ज माफी के पक्ष में नहीं हैं। 
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किसानों ने कर्ज माफी से लेकर चीनी मिलों से बकाया भुगतान दिलाने और कृषि उत्पादों की ज्यादा कीमत को लेकर देश भर में जगह-जगह प्रदर्शन किए। कृषि नीतियां बनाने में 15 साल से शामिल रहे रमेश चंद ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा, कर्ज माफी की सबसे बड़ी समस्या यही है कि इससे सभी किसानों को फायदा नहीं मिलेगा। उनके मुताबिक, पिछड़े राज्यों में संस्थागत कर्ज लेने वाले महज 10-15 फीसदी किसानों को ही इससे फायदा मिलेगा।
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चंद ने कहा कि एनडीए सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की ज्यादातर सिफारिशों को लागू किया है। किसी फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) एक सीमा से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। एमएसपी में ज्यादा वृद्धि से समाज के बड़े वर्ग के लिए खाद्यान्न खरीद मुश्किल हो जाएगी।
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समिति ने एमएसपी को सी2 (उत्पादन लागत में जमीन का लगान व स्थायी पूंजी पर ब्याज को मिलाकर)+50 प्रतिशत के हिसाब से तय करने का सुझाव दिया है। सरकार ने इसके लिए ए2+एफएल (वास्तविक लागत व परिवार का श्रम) और ए2+एफएल के ऊपर 50 प्रतिशत को अपनाया है। एमएसपी बढ़ाते समय मांग आपूर्ति का ध्यान रखा जाना चाहिए।

चालू वित्त वर्ष में 4 फीसदी बढ़ेगा उत्पादन 

चंद ने उम्मीद जताई कि देश का कृषि उत्पादन चालू वित्त वर्ष में करीब 4 फीसदी बढ़ जाएगा। कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 2016-17 में 6.3 फीसदी और 2017-18 में 3.4 फीसदी रही है। यह 2018-19 की दूसरी तिमाही में 3.8 फीसदी रही, जो कृषि क्षेत्र के लिए खराब आंकड़ा नहीं है। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर बढ़कर 4 फीसदी पर पहुंच जाएगी।


उत्पादन बढ़ा, लेकिन बाजार तैयार नहीं

प्याज कीमतों में गिरावट और किसानों को उपज का अच्छा मूल्य नहीं मिलने पर चंद ने कहा कि अगर आपके पास प्याज के लिए अच्छी भंडारण क्षमता नहीं है तो ऐसा ही होगा। पिछले 10-15 साल के दौरान उत्पादन बढ़ा है, लेकिन बाजार इसके लिए तैयार नहीं है। बाजार को खुद को इसके लिए तैयार करना होगा।
 
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