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Congress: पीएम मोदी के रेवड़ी वाले बयान पर कांग्रेस का पलटवार, कहा- हम 'झूठ की गठरी' कल्चर के खिलाफ
Fri, 12 Aug 2022 07:33 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 12 Aug 2022 07:33 PM IST
सार
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि रेवड़ी गुड़ की चाशनी, तिल और घी के मिश्रण से बनती है और एक गजक से सैकड़ों रेवड़ियां बन जाती हैं। उन्होंने पूछा कि मुफ्त की रेवड़िया खराब हैं तो मुफ्त की गजक कैसे अच्छी हो गई?
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पीएम नरेंद्र मोदी और कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कांग्रेस ने शुक्रवार को 'रेवड़ी कल्चर' को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि टैक्स में छूट, ऋणमाफी और करोड़ों की छूट के जरिए 'सरकार के अमीर दोस्त' गजक प्राप्त कर रहे हैं, जबकि गरीबों को 'रेवड़ी' के रूप में छोटी सहायता मिल रही है।
पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के दौरान लोगों को 'रेवड़ी संस्कृति' को लेकर आगाह किया था और कहा था कि यह देश के विकास के लिए बहुत खतरनाक है।
'रेवड़ी' त्योहारों के दौरान अक्सर बांटी जाने वाली लोकप्रिय उत्तर भारतीय मिठाई है। प्रधानमंत्री ने फ्री स्कीम की पेशकश करने वाले दलों पर निशाना साधने के लिए संकेत के रूप में इस शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा था कि लोगों, खासकर युवाओं को रेवड़ी कल्चर से बचना चाहिए।
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प्रधानमंत्री पर पलटवार करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने पूछा कि पिछले पांच वर्षों में 5.8 लाख करोड़ रुपये का बैंक ऋण क्यों बट्टे खाते में डाला या और 1.45 लाख करोड़ रुपये के कॉर्पोरेट टैक्स को कम क्यों किया गया।
अमीरों को मुफ्त की सहायता गजक की तरह : गौरव वल्लभ
उन्होंने कहा कि जहां गरीब और उत्पीड़ित वर्गों को कठिन समय में मदद के लिए दी जाने वाली छोटी सहायता 'रेवड़ी' थीं, वहीं अमीरों को दी जाने वाली मुफ्त सहायता 'गजक' की तरह है।
कांग्रेस ने पूछा- मुफ्त की गजक कैसे अच्छी हो गई?
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि रेवड़ी गुड़ की चाशनी, तिल और घी के मिश्रण से बनती है और एक गजक से सैकड़ों रेवड़ियां बन जाती हैं। उन्होंने पूछा कि मुफ्त की रेवड़िया खराब हैं तो मुफ्त की गजक कैसे अच्छी हो गई? उन्होंने कहा, "हम 'झूठ की गठरी' संस्कृति के खिलाफ हैं। हम बुरे समय में नागरिकों का हाथ थामने के खिलाफ नहीं है।"
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पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के दौरान लोगों को 'रेवड़ी संस्कृति' को लेकर आगाह किया था और कहा था कि यह देश के विकास के लिए बहुत खतरनाक है।
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'रेवड़ी' त्योहारों के दौरान अक्सर बांटी जाने वाली लोकप्रिय उत्तर भारतीय मिठाई है। प्रधानमंत्री ने फ्री स्कीम की पेशकश करने वाले दलों पर निशाना साधने के लिए संकेत के रूप में इस शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा था कि लोगों, खासकर युवाओं को रेवड़ी कल्चर से बचना चाहिए।
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प्रधानमंत्री पर पलटवार करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने पूछा कि पिछले पांच वर्षों में 5.8 लाख करोड़ रुपये का बैंक ऋण क्यों बट्टे खाते में डाला या और 1.45 लाख करोड़ रुपये के कॉर्पोरेट टैक्स को कम क्यों किया गया।
अमीरों को मुफ्त की सहायता गजक की तरह : गौरव वल्लभ
उन्होंने कहा कि जहां गरीब और उत्पीड़ित वर्गों को कठिन समय में मदद के लिए दी जाने वाली छोटी सहायता 'रेवड़ी' थीं, वहीं अमीरों को दी जाने वाली मुफ्त सहायता 'गजक' की तरह है।
कांग्रेस ने पूछा- मुफ्त की गजक कैसे अच्छी हो गई?
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि रेवड़ी गुड़ की चाशनी, तिल और घी के मिश्रण से बनती है और एक गजक से सैकड़ों रेवड़ियां बन जाती हैं। उन्होंने पूछा कि मुफ्त की रेवड़िया खराब हैं तो मुफ्त की गजक कैसे अच्छी हो गई? उन्होंने कहा, "हम 'झूठ की गठरी' संस्कृति के खिलाफ हैं। हम बुरे समय में नागरिकों का हाथ थामने के खिलाफ नहीं है।"