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Bombay High Court: 'फिर हर समुदाय से उठेंगी ऐसी मांगें', जैन पर्व के दौरान पशु बलि रोकने की मांग पर हाईकोर्ट

Mon, 07 Jul 2025 04:00 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 07 Jul 2025 04:00 PM IST
सार

Bombay High Court: 'जैन समुदाय के पर्युषण पर्व के दौरान नौ दिनों तक पशु बलि पर रोक लगाने की मांग पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या ऐसा आदेश देने से अन्य समुदाय भी अपने त्योहारों पर यही मांग नहीं करेंगे। हाईकोर्ट ने नगर निगमों को 18 अगस्त तक इस पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

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Slaughter ban for 9-days during Jain festival may lead to similar demands from other communities: HC
बंबई उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को आश्चर्य जताते हुए कहा कि क्या वह जैन समुदाय के 'पर्युषण पर्व' के दौरान पशु बलि पर नौ दिनों के लिए प्रतिबंध लगा सकता है और क्या ऐसा आदेश देने से अन्य समुदायों को भी गणेश चतुर्थी और नवरात्रि जैसे त्योहारों के दौरान समान प्रतिबंधों की मांग करने का रास्ता खुल जाएगा।
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चीफ जस्टिस आलोक अरादे और जस्टिस संदीप मार्ने की बेंच जैन समुदाय के एक ट्रस्ट की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 2024 में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी), नासिक और पुणे के नगर निगमों की ओर से दिए गए आदेशों को चुनौती दी गई थी। इन आदेशों में पर्युषण के दौरान केवल एक दिन के लिए पशु बलि पर रोक लगाई गई थी। समुदाय ने 21 अगस्त से 9 दिनों तक पशु बलि पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।
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ट्रस्ट ने जैन समुदाय के धार्मिक विश्वासों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला था, जिसमें अहिंसा का जिक्र करते हुए उसने कहा कि अगर पर्युषण पर्व के दौरान पशु बलि होती है, तो यह जैन धर्म के उद्देश्य के लिए हानिकारक होगा। इसके बाद कोर्ट ने यह पूछा कि क्या वह ऐसा आदेश जारी कर सकती है।

कोर्ट ने पूछा, ऐसा नहीं होना चाहिए कि कल कोई और समुदाय भी ऐसे ही प्रतिबंध की मांग करे। आप (जैन समुदाय) को पर्युषण पर्व के लिए 9 दिनों का आदेश मिलेगा और फिर कोई अन्य समुदाय आगे आएगा और गणेश चतुर्थी व नवरात्रि के लिए भी ऐसे आदेश की मांग करेगा।


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बेंच को बताया गया कि महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही एक साल में 15 दिनों के लिए पशुओं की बलि पर प्रतिबंध की अधिसूचना दी है, जिसमें पर्युषण पर्व के लिए एक दिन भी शामिल है। कोर्ट ने आश्चर्य जताया कि क्या वह नीतिगत फैसले में दखल दे सकती है, क्योंकि उसे इस बात की जानकारी नहीं है कि राज्य की कितनी फीसदी आबादी शाकाहारी और मांसाहारी है। 
बेंच ने कहा, मुंबई अन्य नगर निगमों से घिरा हुआ है, जिनके पास बूचड़खाने नहीं हैं और इसलिए वे महानगर के देवनार बूचड़खाने पर निर्भर हैं। कोर्ट ने पूछा, किस कानूनी बाध्यता के तहत बूचड़खानों को नौ दिनों तक बंद रखने का आदेश दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने बीएमसी, नासिक, पुणे और मीरा भायंदर नगर निगमों को आदेश दिया कि वे ट्रस्ट की ओर से 9 दिनों तक पशु बलि पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर विचार करें और 18 अगस्त तक अपना निर्णय दें।



 
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