फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Six out of 10 adolescent girls are suffering from anemia, research by many institutions including BHU revealed

अध्ययन: किशोरियों को ‘कमजोर’ कर रहा एनीमिया, 10 में छह पीड़ित; BHU सहित देश के कई संस्थानों के शोध में खुलासा

Sun, 10 Sep 2023 06:20 AM IST
शिव शरण शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 10 Sep 2023 06:20 AM IST
सार

शोधकर्ताओं ने अध्ययन में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एचएफएचएस) के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। पीएलओएस ग्लोबल पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, 15 से 19 वर्ष की आयु की किशोरियों में एनीमिया बड़ा स्वास्थ्य जोखिम बना हुआ है।

विज्ञापन
Six out of 10 adolescent girls are suffering from anemia, research by many institutions including BHU revealed
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

देश की किशोरियों को एनीमिया कमजोर कर रहा है। स्थिति यह है कि 10 में छह किशोरी एनीमिया ग्रस्त हैं। देश के 21 राज्यों में हर साल एनीमिया का दायरा बढ़ता जा रहा है। यह जानकारी बनारस हिंदू विवि सहित देश के कई संस्थानों के संयुक्त अध्ययन में सामने आई है।

विज्ञापन


शोधकर्ताओं ने अध्ययन में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एचएफएचएस) के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। पीएलओएस ग्लोबल पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, 15 से 19 वर्ष की आयु की किशोरियों में एनीमिया बड़ा स्वास्थ्य जोखिम बना हुआ है। एनीमिया शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी या खराब लाल रक्त कोशिकाओं के कारण होता है। इसके कारण शरीर के अंगों में ऑक्सीजन पहुंचना कम होने लगती है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 2015-16 और 2019-21 के एचएफएचएस के आंकड़ों को शामिल करते हुए क्रमशः 1,16,117 और 1,09,400 किशोरियों के स्वास्थ्य को लेकर समीक्षा की है।
विज्ञापन


शोधकर्ताओं का कहना है कि देश में अभी भी 18 वर्ष से पहले किशोरियों का विवाह हो रहा है और ऐसे मामलों में एनीमिया की व्यापकता भी सबसे अधिक देखने को मिली है। अध्ययन में शामिल 70 फीसदी किशोरियां ग्रामीण क्षेत्रों से हैं, जो यह बताता है कि एनीमिया की परेशानी शहरों से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दो बच्चों वाली माताएं ज्यादा एनीमिक
शोधकर्ताओं ने पाया कि कम से कम दो बच्चों वाली माताएं बिना बच्चों वाली किशोिरयों की तुलना में अधिक एनीमिक मिली हैं। इनका मानना है कि किशोरियों में एनीमिया के बढ़ते दायरे के लिए अशिक्षा एक बड़ा कारण है। शिक्षित किशोरियों में एनीमिया होने की आशंका कम होती है, क्योंकि शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य की जानकारी के जरिए इस स्थिति से बचा जा सकता है। शोधकर्ताओं ने जाति के आधार पर भी परिणाम निकाले हैं। इनका कहना है कि एससी और एसटी से संबंधित किशोरियों में अन्य समूहों की तुलना में एनीमिया होने की संभावना ज्यादा देखने को मिली है।


इन राज्यों में बढ़ रहा दायरा
अध्ययन के अनुसार, असम, छत्तीसगढ़ और त्रिपुरा की किशोरियों में एनीमिया का दायरा हर साल 15 फीसदी बढ़ रहा है जबकि पंजाब, कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और मध्य प्रदेश राज्यों में पांच फीसदी वृद्धि देखी गई है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने उत्तराखंड और केरल में अध्ययन अवधि के दौरान एनीमिया के प्रसार में गिरावट दर्ज की है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed