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जनवरी से अब तक 74 बाघों का अवैध शिकार

Wed, 29 Jun 2016 05:29 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 29 Jun 2016 05:29 PM IST
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 Since January 74 poaching of tigers
बाघ - फोटो : getty images

अभी कुछ दिन पहले गिर के जंगलों से खुशखबरी आई थी की इस बार शेरों की सख्या में इजाफा हुआ है। गिर के जंगलों में इस बार शेरों की प्रजनन दर अच्छी रही है। इसी गिर के जंगल से जुड़ी एक सच्चाई यह भी है की 1 जनवरी से 26 जून तक 74 बाघ मारे जा चुके है।

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 इंडियनएक्सप्रेस की खबर के मुताबिक गिर के जंगलो में अवैध शिकारियों के शिकार करने और वन अभ्यरण अधिकारीयों की लापरवाई की वजह से ही 1 जनवरी से 26 जून तक के इतने कम समय में 74 बाघों की जान गई। खबर है कि शिकारी यहां अवैध तरीके से बाघों का शिकार करते है।
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जिससे की वो उनके खाल, दांत, हड्डी और शरीर के अन्य अगों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच सकें। बाघों की लगातार हो रही मौत पर वाइल्डलाइफ प्रोटेंशन सोसायटी ऑफ इडिंया ( डब्ल्यूपीएसआई ) ने जनवरी से जून तक के आंकड़े पेश किये है। 

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इस साल 14 बाघों की मौत करंट लगने से हुई है

 Since January 74 poaching of tigers
बाघ - फोटो : getty images

जिसमें उन्होंने बताया है कि इस साल 14 बाघों की मौत करंट लगने से हुई है। और 26 की बीमारी से मौत हुई है 3 बाघों की जान एक्सिडेंट में गई है। डब्ल्यूपीएसआई के अधिकारीयों ने कहा की पिछले दिनों में जंगल से गायब 30 बाघों की तलाश अभी जारी है।

साल 2015 में 26 बाघों को अवैध शिकारियों ने शिकार बनाया था। इस साल इस सख्या इजाफा हुआ है। वाइल्डलाइफ प्रोटेंशन सोसायटी ऑफ इडिंया ( डब्ल्यूपीएसआई ) के द्वारा पेश किए गए ये आंकड़े जंगल में बाघों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा करते है।

डब्ल्यूपीएसआई के टीटो जोसफ का कहना है कि हमें जंगल की सुरक्षा कड़ी करनी होगी और से जल्द से जल्द अवैध शिकारीयों द्वारा जंगल में शिकार और घुसपैठ पर रोकने के लिए नीति तैयार करनी होगी। यह भी देखना होगा की व्यापार के लिए किसी भी जानवर का शिकार ना ही अधिक सख्या में जानवर बीमार हो।       

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