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बार-बार होने वाले चुनावों से बेहतर है एक साथ चुनाव कराना : नायडू
Fri, 27 Sep 2019 02:00 AM IST
संदीप भट्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
Published by: संदीप भट्ट
Updated Fri, 27 Sep 2019 02:00 AM IST
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उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने देश में बार-बार चुनाव कराए जाने को चिंता का विषय बताते हुए कहा कि पूरे देश में ‘एक साथ और व्यापक स्तर पर’ चुनाव कराया जाना चाहिए।
यहां ‘पुण्यभूषण’ पुरस्कार समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ‘चूंकि चुनाव नजदीक हैं और आदर्श आचार संहिता लागू की जा रही है और कुछ साथी (सांसद एवं मंत्री) इस समारोह में शामिल नहीं हो सकते.... बार-बार चुनाव देश के लिए चिंता का विषय है।’ उन्होंने विख्यात पुरातत्वविद जीबी देगलुरकर को प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया।
नायडू ने कहा कि चुनाव के कारण करीब डेढ महीने तक आदर्श आचार संहिता लागू रहती है और हर किसी को चुनाव, चयन और सुधार के फार्मूले का पालन करना होता है। उन्होंने कहा कि ‘इसलिए यह देश के हित में है कि 15 दिनों के भीतर देश भर में एक व्यापक और एक साथ चुनाव होना चाहिए, ताकि जनता के काम में किसी प्रकार की कोई रूकावट न आये, वह कमजोर या धीमा न हो।’
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नायडू ने देगलुरकर की प्रशंसा करते हुए कहा कि पुरातात्विक स्थल ऐसे पुल होते हैं, जो अतीत को वर्तमान से जोड़ते है। उन्होंने कहा कि ‘पुरातत्व शास्त्र एक आकर्षक विषय है, जो साक्ष्यों के साथ इतिहास की हमारी समझ को बढ़ाता है।
इस विशेषता के कारण, यह किसी भी अन्य मानव विज्ञान की तुलना में अधिक विश्वसनीय हो सकता है।’ नायडू ने कहा कि पुरातत्व विज्ञान अतीत के विभिन्न आयामों का खुलासा करने में अहम भूमिका निभाता है।
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यहां ‘पुण्यभूषण’ पुरस्कार समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ‘चूंकि चुनाव नजदीक हैं और आदर्श आचार संहिता लागू की जा रही है और कुछ साथी (सांसद एवं मंत्री) इस समारोह में शामिल नहीं हो सकते.... बार-बार चुनाव देश के लिए चिंता का विषय है।’ उन्होंने विख्यात पुरातत्वविद जीबी देगलुरकर को प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया।
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नायडू ने कहा कि चुनाव के कारण करीब डेढ महीने तक आदर्श आचार संहिता लागू रहती है और हर किसी को चुनाव, चयन और सुधार के फार्मूले का पालन करना होता है। उन्होंने कहा कि ‘इसलिए यह देश के हित में है कि 15 दिनों के भीतर देश भर में एक व्यापक और एक साथ चुनाव होना चाहिए, ताकि जनता के काम में किसी प्रकार की कोई रूकावट न आये, वह कमजोर या धीमा न हो।’
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नायडू ने देगलुरकर की प्रशंसा करते हुए कहा कि पुरातात्विक स्थल ऐसे पुल होते हैं, जो अतीत को वर्तमान से जोड़ते है। उन्होंने कहा कि ‘पुरातत्व शास्त्र एक आकर्षक विषय है, जो साक्ष्यों के साथ इतिहास की हमारी समझ को बढ़ाता है।
इस विशेषता के कारण, यह किसी भी अन्य मानव विज्ञान की तुलना में अधिक विश्वसनीय हो सकता है।’ नायडू ने कहा कि पुरातत्व विज्ञान अतीत के विभिन्न आयामों का खुलासा करने में अहम भूमिका निभाता है।