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आखिर हासिल क्या करना चाहता है सिमी?

Mon, 31 Oct 2016 07:24 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Mon, 31 Oct 2016 07:24 PM IST
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Simi wants to achieve what the hell?
आतंकी - फोटो : BBC

यह पहला मौका नहीं है जब मध्य प्रदेश की किसी जेल से कोई कैदी भगा हो और वो भी तब जबकि वो 'सिमी' जैसे प्रतिबंधित संगठन का सदस्य हो। मध्य प्रदेश की खंडवा की जिला जेल से वर्ष 2013 'सिमी' का सदस्य होने के आरोप में बंद सात कैदी भाग निकले थे। उन्होंने जेल के दो सुरक्षा गार्डों पर चाकू से हमला किया था और जेल के बाथरूम की खिडकी तोडकर भागे गए थे।

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'स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया' यानी 'सिमी' का गठन वर्ष 1977 के अप्रैल माह में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था। अमेरिकी राज्य इलिनोय के एक प्रोफेस्सर मोहम्मद अहमदुल्लाह सिद्दीकी को संगठन का संस्थापक बताया जाता है। भारत में इस संगठन पर वर्ष 2001 में प्रतिबंध लगा दिया गया था।
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फिर दो अलग अलग बार इसे प्रतिबंधित करने के अध्यादेश भारत सरकार ने जारी किए। तबसे इसकी गतिविधियां पूरी तरह से भूमिगत हैं। 'साउथ एशियन टेररिज्म पोर्टल' के अनुसार शुरूआती दौर में इसे 'जमात-ए-इस्लामी' की छात्र इकाई के रूप में जाना जाता था। लेकिन वर्ष 1981 में यह संगठन 'जमात-ए-इस्लामी' से अलग हो गया। सिमी इस्लामिक राज्य की स्थापना के सिद्धांत पर चलता है और इस्लाम का प्रसार इस संगठन का मूल विचार है।
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संगठन के प्रभाव और गतिविधियों में काफी कमी आई

Simi wants to achieve what the hell?
आतंकी - फोटो : social media

पहला बैन 9/11 के बाद
भारतीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार 'सिमी' पर पहला प्रतिबंध 27 सितंबर वर्ष 2001 में अमरीका में 9/11 को हुए हमलों के बाद लगाया गया था। यह प्रतिबंध इस संगठन पर अगले दो सालों तक चलता रहा यानी सितंबर 2003 तक। इस दौरान संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने के आरोप में कई लोगों को भारत के विभिन्न प्रान्तों से गिरफ्तार किया गया और उन पर चरमपंथ और संगीन अपराधों को रोकने के लिए बनाये गए विभिन्न कानूनों के तहत कार्रवाई हुई।

इन कानूनों में महाराष्ट्र का 'महाराष्ट्र कंट्रोल आफ आर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट' यानी 'मोकोका', 'टेररिस्ट ऐंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट' यानी 'टाडा' और 'अनलॉफुल ऐक्टिविटीज (प्रीवेंशन) एक्ट यानी 'यूएपीए' जैसे कानून शामिल हैं। सिमी हमेशा चरमपंथी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों को सिरे से खारिज करता आया है। सिमी का दावा था कि सिमी मुस्लिम छात्रों का शरीयत के मुताबिक चरित्र निर्माण में जुटी है।

सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है सितंबर 2003 में प्रतिबंध के हटने के बाद 'सिमी' की गतिविधियों पर कोई रोक नहीं थी। जानकार कहते हैं कि ऐसा समझा जाने लगा कि प्रतिबंध के दौरान संगठन के प्रभाव और गतिविधियों में काफी कमी आई। यह भी माना जाने लगा कि संगठन के कई नेता भी तीस साल की उम्र से ज्यादा के हो गए, जिसकी वजह से वो अपने आप ही संगठन में रहने के लिए अयोग्य हो गए। कुछ मुकदमों को लडने में व्यस्त रहे।

'सिमी' का संबंध पकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठनों से है।

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आतंकी - फोटो : demo

गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार ने 'अनलॉफुल ऐक्टिविटीज (प्रीवेंशन) ट्रिब्यूनल को वर्ष 2006 के फरवरी माह में बताया कि इस संगठन के सदस्यों का देश के अलग अलग हिस्सों में हुए विस्फोटों में हाथ है। भारत सरकार ये भी मानती है कि इस संगठन के सदस्यों का संपर्क दुनिया भर में कई चरमपंथी गुटों से है। सरकार की इस दलील के आधार पर 'सिमी' पर एक बार 2006 में फिर प्रतिबंध लगाया गया।

मगर वर्ष 2008 के अक्टूबर माह में दिल्ली उच्च न्यायालय ने संगठन पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया। हालांकि फिर अगले ही दिन सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर दोबारा बैन लगा दिया क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अदालत को बताया था कि 'सिमी' का संबंध पकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठनों के अलावा भारत से संचालित 'इन्डियन मुजाहिदीन' नाम के चरमपंथी संगठन से भी है।

सिमी के संदर्भ में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है, "मैंने तब की एनडीए सरकार से सिमी और बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी। उन्होंने सिमी पर तो प्रतिबंध लगा दिया लेकिन बजरंग दल पर नहीं लगाया।"

जमात-ए-इस्लामी और 'सिमी' के बीच तल्खियां बढीं

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आतंकी - फोटो : File Photo

नौ सितंबर, 2001 को सिमी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ। शाहिद बद्र फलाही ने मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में मीडिया से बातचीत में कहा था की सिमी की बजरंग दल या विश्व हिंदू परिषद् से तुलना ठीक नहीं है। उनका दावा था कि सिमी मुस्लिम छात्रों का शरीयत के मुताबिक, चरित्र निर्माण में जुटी है। तब उनका दावा था कि देश के 17 राज्यों में संगठन के 950 अंसार (सक्रिय सदस्य) हैं। 'सिमी' ने तब सब को तब चौंका दिया था जब उसने 'फलस्तीन लिबरेशन आर्गेनाईजेशन' यानी (पीएलओ) के नेता यासिर अराफात का भारत आने पर विरोध किया था। संगठन के कार्यकर्ताओं ने 1981 में अराफात को काले झंडे भी दिखाए थे और उन्हें पश्चिमी मुलकों का एजेंट बताया था।

यहीं से जमात-ए-इस्लामी और 'सिमी' के बीच तल्खियां बढीं और जमात -ए-इस्लामी ने सिमी को संगठन से अलग कर दिया क्योंकि जमात वाले अराफात को हीरो मानते थे। जमात-ए-इस्लामी ने छात्र इकाई बनायी जिसका नाम 'स्टूडेंट्स इस्लामिक आर्गेनाईजेशन' (एसआईओ) रखा गया है।

सिमी' के अध्यक्ष शाहिद बदर फलाह को दिल्ली के जाकिर नगर के इलाके से गिरफ्तार किया गया था। संगठन के सचिव सफदर नागोरी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। भारत की सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि 'सिमी' ने जाल नेपाल, बांग्लादेश और पकिस्तान में फैला रखा है।

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