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केरल हथियार प्रशिक्षण मामले में सफदर नागौरी समेत सिमी के 18 सदस्य दोषी करार
एजेंसी, कोच्चि
Updated Tue, 15 May 2018 03:19 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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दिसंबर 2007 में केरल हथियार प्रशिक्षण शिविर मामले में यहां की एक विशेष एनआईए अदालत ने सोमवार को प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के संस्थापक सदस्य सफदर नागौरी समेत 18 सदस्यों को दोषी करार दिया। हालांकि अदालत ने 17 अन्य आरोपियों को इस मामले में बरी कर दिया।
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विशेष एनआईए अदालत के न्यायाधीश कौसर इदाप्पगथ ने गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम एवं आपराधिक षडयंत्र (सेक्शन-120बी) समेत भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत 18 लोगों को दोषी करार दिया।
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अदालत मंगलवार को दोषियों को सजा सुनाएगी। अदालत में सोमवार को केवल दो ही आरोपी पेश किए गए थे। अन्य आरोपी अहमदाबाद, भोपाल और बंगलूरू की जेलों में बंद हैं। ये वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल हुए। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने की थी। उसने आरोपियों पर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने, आतंकी समूहों के साथ मिलीभगत करने, आपराधिक साजिश रचने समेत अन्य आरोप लगाए थे।
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अदालत ने सोमवार को जिन लोगों को दोषी करार दिया उनमें 48 साल के नागौरी के अलावा सादुली, पी. ए. शिबिली, मोहम्मद अंसार, अब्दुल सत्तार (सभी केरल), हफीज हुसैन, मोहदम्मद सामी बागेवादी, नदीम सईद, डॉ. एच. ए. असादुल्ला, शकील अहमद एवं मिर्जा अहमद बेग (कर्नाटक) शामिल हैं। अदालत ने आमिल परवाज एवं कमरुद्दीन नागौरी (मध्य प्रदेश), मुफ्ती अब्दुल बशर (उत्तर प्रदेश), दानिश एवं मंजर इमाम (झारखंड), मोहम्मद अबू फैजल खान (महाराष्ट्र) और आलम जेब अफरीदी (गुजरात) को भी दोषी करार दिया।
बता दें कि जिस शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था उसमें कहा गया था कि दिसंबर 2007 में राज्य के वागामोन के थंगालपारा में सिमी ने कथित तौर पर एक गोपनीय प्रशिक्षण शिविर लगाया। शिकायत में कहा गया कि नवंबर 2007 में सिमी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने अपने प्रशिक्षण शिविर लगाने को लेकर मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित चोरल में आपराधिक साजिश रची। एनआईए ने आरोप लगाया था कि सिमी ने 10 दिसंबर 2007 से 12 दिसंबर 2007 के बीच कर्नाटक, मध्य प्रदेश और गुजरात में शिविर लगाए।
विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद नागौरी ने बढ़ाया था चरमपंथ की ओर कदम
बताया जाता है कि अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद से सिमी के संस्थापक सदस्य नागौरी का झुकाव चरमपंथ की ओर हो गया था। मध्य प्रदेश के एक पुलिसकर्मी का बेटे नागौरी का नाम पहली बार पुलिस रिकॉर्ड में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में 1998 में आया था। उसे पुलिस ने 2008 में मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया था।
आजमगढ़ का वसीक बिल्ला अभी भी फरार
आरोपियों में यूपी के आजमगढ़ का वसीक बिल्ला फरार है। जबकि दूसरा आरोपी महबूब अक्तूबर 2016 में भोपाल में हुए एक एनकाउंटर में मार गिराया गया था। महबूब मध्य प्रदेश का रहने वाला था। अन्य आरोपी अब्दुस सुभान कुरेशी अलियास तवकीर को हाल ही में मुंबई से गिरफ्तार किया गया था।