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सिख दंगा पीड़ितों को 34 साल बाद भी मुआवजा नहीं

Fri, 16 Nov 2018 04:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Updated Fri, 16 Nov 2018 04:46 AM IST
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Sikh Riots victims are not compensated even after thirty four years
sikh protest - फोटो : अमर उजाला
1984 में हुए सिख विरोधी दंगे के पीड़ित कई सिख परिवारों को घटना के 34 साल बाद भी मुआवजा नहीं मिल पाया गया है। पीलीभीत और बरेली के दंगा पीड़ितों ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति भारती सप्रू और न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की पीठ ने केंद्र और राज्य सरकार से एक माह में जवाब मांगा है।
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याची प्यारा सिंह और हरपाल सिंह के अधिवक्ता दिनेश राय के मुताबिक दंगाइयों ने प्यारा सिंह की पत्नी और पुत्री की हत्या कर दी थी तथा घर में आग लगा दी। दोनों की लाशें जलते हुए घर में फेंक दी गई। आग में कई मवेशी भी मर गए थे। सरकार की ओर से मृतकों के लिए 20 और घायलों के लिए 10 हजार रुपये की सहायता ही दी गई है। 
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पूरा मुआवजा आज तक नहीं मिला। इसी प्रकार से हरपाल सिंह के घर में भी आग लगाकर उनके पिता को उसमें फेंक कर मार दिया गया। उसकी मां को बुरी तरह से मारा गया जिससे वह मरणासन्न हो गई। कई मवेशी आगजनी में मर गए।

सरकार ने नौ लाख 45 हजार रुपये मुआवजे की घोषणा की थी मगर, मृतक के लिए 20 और घायलों के लिए 10 हजार रुपये की सहायता ही दी गई। अधिवक्ता दिनेश राय का कहना था केंद्र सरकार ने 16 जनवरी 2006 को पुनर्वास नीति घोषित की।

 

इसके तहत मृतक के लिए तीन लाख रुपये और घायल के लिए एक लाख 25 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश राज्यों को दिया गया। यह भी घोषणा की गई कि संपत्ति के नुकसान का दस गुना मुआवजा दिया जाएगा। केंद्र की नीति को राज्यों ने भी स्वीकार किया।

याचीगण को फरवरी 2015 में पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया मगर उनका दावा आयुक्त सिख विरोधी दंगा कानपुर मंडल के यहां से 34 साल बाद भी निस्तारित नहीं हो सका है। इसलिए याचिका दाखिल की गई है।
 
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