सिख दंगा: मनमोहन के बयान से दुखी हुए पू्र्व पीएम के पोते, कहा- सेना बुलाने से मचती तबाही
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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर एक बयान दिया है जिससे कि विवाद खड़ा हो गया है। उनके इस बयान पर तत्कालीन गृह मंत्री नरसिम्हा राव के पोते एनवी सुभाष ने प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेता सुभाष ने मनमोहन के बयान पर दुख व्यक्त करते हुए सवाल किया कि क्या कोई गृह मंत्री कैबिनेट की मंजूरी के बिना कोई फैसला ले सकता है।
सेना के आने से मच जाती तबाही
एनवी सुभाष ने गुरुवार को कहा, नरसिम्हा राव के परिवार का हिस्सा होने की वजह से मैं डॉक्टर मनमोहन सिंह के बयान से काफी दुखी हूं। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है। क्या कोई गृह मंत्री बिना कैबिनेट की मंजूरी के स्वतंत्र रूप से कोई फैसला ले सकता है? यदि सेना को बुला लिया जाता तो तबाही मच जाती।
NV Subash, grandson of PV Narasimha Rao & BJP leader: As a family member I'm feeling saddened by this statement by Dr Manmohan Singh, it's unacceptable. Can any Home Minister take independent decision without Cabinet's approval? If Army had been called,it would've been a disaster https://t.co/Y9yy3j1Sr8 pic.twitter.com/LQZGRc7FoJ
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) December 5, 2019
सिख दंगों को लेकर मनमोहन ने दिया था बड़ा बयान
मनमोहन सिंह ने सिख दंगों को लेकर बुधवार को कहा कि अगर तत्कालीन गृह मंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने इंद्र कुमार गुजराल की बात पर ध्यान दिया होता तो 1984 में हुई सिख विरोधी हिंसा की घटना टाली जा सकती थी। मनमोहन सिंह ने यह बात पूर्व प्रधानमंत्री गुजराल की जयंती पर आयोजित एक समारोह में कही।
उन्होंने यह भी कहा था कि गुजराल ने नरसिम्हा राव को इस संबंध में सलाह दी थी। पूर्व पीएम सिंह ने कहा कि 'दिल्ली में जब 84 के सिख दंगे हो रहे थे, गुजराल जी उस समय के गृह मंत्री नरसिम्हा राव के पास गए थे। उन्होंने राव से कहा कि स्थिति इतनी गंभीर है कि सरकार के लिए जल्द से जल्द सेना को बुलाना आवश्यक है। अगर राव गुजराल की सलाह मानकर जरूरी कार्रवाई करते तो शायद 1984 के नरसंहार से बचा जा सकता था।'