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रेलवे में सुरक्षा कर्मचारियों की भारी कमी, खाली पड़े हैं 1.3 लाख पद

Tue, 22 Nov 2016 11:05 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 22 Nov 2016 11:05 AM IST
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shortage of security staff derail indian railway
- फोटो : amar ujala

भारत में हर साल ट्रेन हादसों में होने वाली मौतों की संख्या रेलवे सुरक्षाा कर्मचारियों की कमी से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। 2016 तक भारतीय रेलवे की सुरक्षा श्रेणी से जुड़े 1.27 लाख कर्मचारियों की कमी है।

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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक टैकमैन, प्वॉइन्टमैन, पेट्रोलमैन, टैक्नीशियन, स्टेशन मास्टर जैसे कर्मचारी सुरक्षित रेल सफर के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि जमीनी हकीकत में इन कर्मचारियों की कमी की वजह से हर रोज यात्रियों की सुरक्षा खतरे में होती है।
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कर्मचारियों की वजह से मौजूदा स्टाफ को भी ज्यादा काम करना पड़ता था। एक दिन में 15 घंटे तक ये कर्मचारी काम कर रहे हैं। कर्मचारियों की कमी और काम के दबाव की वजह से इंदौर-पटना जैसे हादसे सामने आते हैं, जिनमें 100 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

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पिछले तीन सालों में महज 19,500 पदों को ही भरा गया

shortage of security staff derail indian railway

मौजूदा वक्त में रेलवे डिजाइनर यूनिफॉर्म और अन्य ब्रांडिग कार्यक्रमों पर पैसा खर्च कर रहा है, वहीं इसका इस्तेमाल सुरक्षा कर्मचारियों की भर्ती करने में किया जाना चाहिए था।

2013 के आंकड़ों के मुताबिक खाली पड़े पदों की संख्या 1.42 लाख थी। पिछले तीन सालों में महज 19,500 पदों को ही भरा गया। रेल मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय रेल के पास 2.17 लाख कर्मचारियों की कमी है।

जिसमें से 56 प्रतिशत यानि 1.27 लाख कर्मचारी रेलवे सुरक्षा से जुड़े हुए हैं। ऑल इंडिया रेलवे फेडरेशन के महासचिव शिव पाल मिश्रा कहते हैं कि 'जहां हमें तीन पेट्रोलमैन की जरूरत है ,वहां हमारे पास सिर्फ एक है'।

ट्रैकमैन हर रोज 12-13 घंटे काम करते हैं

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एक ट्रैकमैन उदाहरण देते हुए कहते हैं कि, मैं शिफ्ट में हर रोज 12-13 घंटे काम करता हूं, वहीं अगर कोई बीमार होता है तो इससे ज्यादा भी काम करना होता है। चाहें बारिश हो या फिर 42 डिग्री तापमान औसतन एक ट्रैकमैन को 15-17 किलो उपकरणों के साथ काम करना होता है।

कठिन परिस्थितियों में इसमें किसी प्रकार की कोई मोहलत नहीं होती है। हम उम्मीद करते हैं कि जितने पद खाली हैं अगर वो भर जाएं तो तय आराम हमलोगों को मिल सके। 18 रेलवे डिवीजन में ज्यादातर उत्तरी डिवीजन (14, 442), पूर्वी मध्य (10, 034), दक्षिण पूर्व (9,967), मध्य (9,910) में पद खाली हैं।

उत्तरी पूर्वी डिवीजन जो कि रविवार को हुए हादसे का हिस्सा है में 9,223 सुरक्षा कर्मचारियों की जरूरत है। नाम न छापने की शर्त पर एक एक लोको पायलट बताता है कि, रूट और डिवीजन के आधार पर एक लोकोपायलट को लगातार 8-13 घंटे तक ट्रेन चलाना होता है।

इस वजह से हो जाती हैं गलतियां

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सुरक्षा कर्मचारियों की कमी का असर हम सभी पर पड़ता है, क्योंकि हम सभी इंसान हैं। हम बीमार होते हैं, थके होते हैं, जिसकी वजह से गलतियां हो जाती हैं। आप समझ सकते हैं कि सैकड़ों लोगों की जिंदगी हमारे हाथों में होती है तो हमें कितने दबाव में काम करना पड़ता है।

जहां एक ओर रेलवे का कहना है कि सुरक्षा के मद्देनजर साधनों में बदलाव, रेलवे ट्रैक के रखरखाव के लिए बेहतर तकनीकी का इस्तेमाल, सिग्नल और इंटरलॉकिंग सिस्टम का इस्तेमाल हो रहा है।

वहीं यूनियन के सदस्य कहते हैं कि लोगों की कमी इन सारे हादसों के लिए जिम्मेदार है।

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