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रोज की बिक्री बैंक में जमा कराएं दुकानदारः रिजर्व बैंक

Wed, 30 Nov 2016 05:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली Updated Wed, 30 Nov 2016 05:52 AM IST
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shopkeeper Daily submit their sale to bank: RBI
नोटबंदी के बाद बाजार में छोटे नोटों की चल रही तंगी के बीच रिजर्व बैंक ने मॉल के कारोबारियों और दुकान मालिकों से रोजाना बिक्री से मिली नकदी को बैंकों के पास जमा कराने को कहा है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि उन्हें जमा की गई राशि 2,000 और 500 रुपये के नोट में निकालने की  अनुमति होगी, बेशक मौजूदा निकासी की सीमा कुछ भी हो। बैंकिंग क्षेत्र के नियामक के इस कदम का उद्देश्य नए नोटों की जमाखोरी को रोकना है,  जिससे नकदी संकट को खत्म किया जा सके।
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रिजर्व बैंक की  एक अधिसूचना के मुताबिक, ऐसा सामने आया है कि कुछ जमाकर्ता मौजूदा निकासी की सीमा की वजह से अपना  पैसा बैंक खातों में जमा कराने से हिचकिचा रहे हैं। रिजर्व बैंक ने कहा है कि करेंसी नोटों को बाजार में लाने के लिए सावधानी से विचार विमर्श के बाद  यह फैसला किया गया है कि 29 नवंबर, मंगलवार या उसके बाद वैध नोटों में की गई जमा को मौजूदा निकासी सीमा से आगे भी निकालने की अनुमति होगी। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि इस तरह की निकासी के लिए ऊंचे मूल्य यानी  2,000 और 500 के नोट जारी किए जायेंगे। 
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नोटबंदी लागू होने के बाद आम जनता ने बीते 27 नवंबर तक चलन से हटाए गए 500 और 1,000 रुपये के 8.45 लाख करोड़ रुपये मूल्य के नोट जमा कराए हैं या बदले हैं। इस दौरान विभिन्न बैंक शाखाओं ने काउंटर या एटीएम के जरिए 2.16 लाख करोड़  रुपये वितरित किए हैं।
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बैंक अधिकारियों ने किया सीआरआर बढ़ाने का विरोध

shopkeeper Daily submit their sale to bank: RBI
नोटबंदी के आलोक में बैंकों में जमा हो रही भारी राशि पर रिजर्व बैंक द्वारा नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) बढ़ा कर शत-प्रतिशत करने का बैंक अधिकारियों ने विरोध किया है। बैंक के अधिकारियों के सबसे बड़े संगठन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कंफेडरेशन (एआईबीओसी) ने इस बारे में रिजर्व बैंक के गवर्नर को पत्र लिख कर विरोध दर्ज कराया है।

एआईबीओसी के महासचिव हरविंदर सिंह का कहना है कि रिजर्व बैंक द्वारा सीआरआर बढ़ाने के कदम से बैंकों पर कुछ और दुष्परिणाम दिखेंगे। उनके मुताबिक ,बैंकों में जो भी राशि जमा हुई है, उस पर कम से कम 4 फीसदी का ब्याज देय होगा। लेकिन रिजर्व बैंक ने सीआरआर की सीमा बढ़ा कर जो राशि ले ली है, उसके बदले बैंकों को कोई ब्याज नहीं मिलेगा। 

संगठन का कहना है कि नोटबंदी के बाद बैंकों में जो भारी मात्रा में रकम जमा हो रही है, वह रिजर्व बैंक के इस कदम के बाद बैंकों के लिए खतरनाक साबित हो रही है क्योंकि इस वजह से बैंकों को कम से कम हर साल 9.5 से 10 फीसदी का नुकसान होगा। यही नहीं, उनके मुताबिक बैंकों के करेंसी चेस्ट पुराने नोटों से भरे पड़े हैं। इसका भी अभी तक समाधान नहीं आया है। 
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