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फिर विवादों के घेरे में शशि थरूर, इस बार 1989 में लिखा उपन्यास बना वजह

Thu, 04 Apr 2019 07:15 PM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Thu, 04 Apr 2019 07:15 PM IST
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Shashi Tharoor again under shadows of disputes due to his novel written in 1989
शशि थरूर (फाइल फोटो)

अक्सर विवादों में रहने वाले कांग्रेस नेता शशि थरूर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार थरूर चर्चा में हैं अपने 1989 में लिखे एक उपन्यास 'दि ग्रेट इंडियन नॉवेल' की वजह से। आरोप है कि इस उपन्यास के एक हिस्से में महाभारतकालीन पांडवों के पिता पर आधारित एक चरित्र पांडु ने नायर समुदाय की महिलाओं के प्रति अनुचित टिप्पणियां की हैं। 

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बता दें कि 'दि ग्रेट इंडियन नॉवेल' थरूर का एक व्यंग्य उपन्यास है। इसमें उन्होंने महाभारत के पात्रों को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और 1947 के बाद के तीन दशकों के समयकाल में उतारा था। इस उपन्यास के प्रकाशन के समय कुछ आलोचकों ने भी इसपर आपत्ति जताई थी। 
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माना जाता है कि उपन्यास का एक हिस्सा केरल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की महिला विंग से प्रभावित लगता है। वहीं, कुछ ट्विटर यूजर दावा कर रहे हैं कि उपन्यास का एक हिस्सा नायर समुदाय की महिलाओं के लिए अपमानजनक है। 
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एक ट्विटर यूजर चौकीदार शिल्पा नायर ने ट्वीट कर शशि थरूर से सवाल किया, 'आपने लिखा है कि नायर महिलाओं के कई प्रेमी होते थे और वह अपने पति को कमरे में तभी आने देती थीं जब वह किसी और के साथ नहीं होती थीं। इस एक पैराग्राफ से आपने सभी नायर महिलाओं को एक ही श्रेणी में रख दिया और उर उनके सम्मान की बलि चढ़ा दी। सवाल यह है कि किस मुंह से आप हमसे वोट मांग रहे हैं?'

शिल्पा की ट्विटर प्रोफाइल के मुताबिक वह केरल की भाजपा राज्य समिति में एनआरआई सेल की सदस्य हैं। प्रोफाइल में लिखा है कि वह सामाजिक कार्यकर्ता और शास्त्रीय नृत्य का शौक रखती हैं।

शिल्पा के इस सवाल पर शशि थरूर ने कहा, 'यह एक बकवास है जिसे चैकीदार मेरे निर्वाचन क्षेत्र में फेसबुक, व्हाट्सऐप और ट्विटर के माध्यम से फैला रहे हैं। मेरे 1989 में लिखे गए उपन्यास दि ग्रेट इंडियन नॉवेल के एख काल्पनिक चरित्र के वक्तव्य को तोड़-मरोड़ कर नायर महिलाओं के प्रति मेरे आज के विचारों का रूप देने की कोशिश की जा रही है।'
थरूर ने कहा कि यह मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए किया जा रहा है। दुर्भाग्य से कई लोग इस झूठ पर विश्वास भी कर रहे हैं। भाजपा खुद पर शर्मिंदा नहीं हो सकती, लेकिन सोशल मीडिया पर तो सवाल उठाए जा सकते हैं। बता दें कि थरूर खुद नायर समुदाय से हैं और उनके निर्वाचन क्षेत्र में भी नायर समुदाय की अधिकता है। 

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