{"_id":"603e10ff6f454d15d34d8892","slug":"sharp-rise-in-temprature-extreme-weather-events-in-last-100-yrs","type":"story","status":"publish","title_hn":"फरवरी में ही पारा ढा रहा है कहर, अभी से सुलगा रही है गर्मी, आगे और तपाएगी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
फरवरी में ही पारा ढा रहा है कहर, अभी से सुलगा रही है गर्मी, आगे और तपाएगी
Tue, 02 Mar 2021 03:48 PM IST
Harendra Chaudhary
आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 02 Mar 2021 03:48 PM IST
सार
- मौसम विभाग ने जताई चिंता, कहा जिस तरीके से परिवर्तन हो रहा है मौसम में उसका अध्ययन जरूरी।
- भुवनेश्वर में पारा पहुंच चुका था फरवरी में 40 डिग्री के करीब
- देश की राजधानी में पारा दो फरवरी को ही हुआ 33 डिग्री के पार
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ओडिसा की राजधानी भुवनेश्वर में इसी फरवरी में तापमान 40 डिग्री के करीब पहुंच गया। देश की राजधानी दिल्ली में फरवरी में तापमान 33 डिग्री से ज्यादा हो गया। मौसम विभाग के दस्तावेजों में दर्ज आंकड़े बताते हैं कि बीते 100 साल से ज्यादा का वक्त गुजर गया, लेकिन ऐसी गर्मी फरवरी के महीने में कभी नहीं पड़ी।
विज्ञापन
मौसम की इसी आंख मिचौली ने देश के वैज्ञानिकों को एक बार फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर मौसम में इस बदलाव की वजह क्या है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का दावा है कि बदलते हुए क्लाइमेट के चलते हम सब लोगों को मौसम के ऐसे रंग देखने को मिल रहे हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है जितनी गर्मी साल के शुरुआती महीनों में पड़ रही है, उससे ज्यादा तपिश आने वाले महीनों में देखने को मिलेगी।
विज्ञापन
मौसम विशेषज्ञ डॉक्टर एसएस भरद्वाज कहते हैं कि जिस तरह से बीते कुछ महीनों में हिमालय के ऊपरी हिस्से में प्रकृति ने अपना रंग दिखाना शुरू किया है, यह उसी का असर है कि मैदानी इलाकों में फरवरी के महीने में इतनी ज्यादा गर्मी देखने को मिल रही है। भरद्वाज का कहना है कि ऐसा नहीं है कि फरवरी में पहली बार तापमान इतना बढ़ा हो, लेकिन इतने ज्यादा दिनों तक तापमान का बढ़ा रहना चिंतित करता है।
विज्ञापन
नॉर्थ रीजन में मौसम विभाग के प्रभारी डॉ सुरेंद्र पाल कहते हैं कि जो मौसम फरवरी में दिख रहा है, वह मई और जून में ज्यादा तपिश लेकर आएगा। उनका कहना है कि इस बार हम सब लोगों के लिए ज्यादा चुनौती मौसम का आकलन करना और उसकी गतिविधियों पर नजर रखना है।
मौसम विभाग के आंकड़ों में दर्ज देश की राजधानी की गर्मी बताती है कि फरवरी में 106 साल बाद इतनी ज्यादा गर्मी कई दिनों तक पड़ी। फरवरी के अंतिम दिन रविवार को देश की राजधानी का अधिकतम तापमान 32 डिग्री से ज्यादा था। जबकि 25 फरवरी को अधिकतम तापमान 32.5 डिग्री और 26 फरवरी को 33.2 डिग्री दर्ज किया गया था। इसी तरह मौसम विभाग ने पाया था कि उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में फरवरी के अंतिम सप्ताह में पारा 40 डिग्री के करीब पहुंच गया।
पर्यावरण विशेषज्ञ और भारतीय वन सेवा के अधिकारी रमेश चंद्र पांडे कहते हैं कि मौसम के बदलाव को बहुत बारीकी से अध्ययन किया जाना चाहिए। क्योंकि यह संकेत न सिर्फ प्रकृति के लिए बल्कि पूरी मानव सभ्यता के लिए बहुत बड़ा चैलेंज है। उनका कहना है कि मौसम का असर इंसानों से लेकर जानवर और प्रकृति पर सीधे तौर पर पड़ता है।
अगर मौसम में इस तरीके की तब्दीली अचानक से आने लगेगी, तो प्रकृति का संतुलन इंसान और जानवरों के साथ-साथ सब चीज से विमुख हो जाएगा। इसका नतीजा क्या होगा यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इसे लेकर सोचने की और अध्ययन करने की बहुत ही आवश्यकता है।