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Sharmistha Panoli: 'महिला इन्फ्लुएंसर की गिरफ्तारी के वक्त कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया', पुलिस का दावा

Mon, 02 Jun 2025 12:19 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 02 Jun 2025 12:19 PM IST
सार

सोशल मीडिया पर अपनी टिप्पणियों के जरिए कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में शर्मिष्ठा पनोली नाम की पुणे की लॉ छात्रा को गिरफ्तार किया गया था। ऑपरेशन सिंदूर पर आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में गुरुवार रात को कोलकाता पुलिस ने उसे गुरुग्राम से गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद में पोस्ट को हटा दिया गया था।

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Sharmistha Panoli: All legal procedures followed while arresting female Instagram influencer: Kolkata Police
Sharmistha Panoli - फोटो : PTI

विस्तार

कोलकाता पुलिस ने उन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है कि उन्होंने सांप्रदायिक टिप्पणियों वाला वीडियो अपलोड करने के आरोप में 22 वर्षीय महिला इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर को अवैध रूप से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दावा किया कि शर्मिष्ठा पनोली की गिरफ्तारी का बचाव करते हुए कहा कि मामले की उचित जांच की गई और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया।

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कोलकाता पुलिस ने फेसबुक पर पोस्ट में कहा, 'कोलकाता पुलिस ने कानून की ओर से स्थापित प्रक्रिया के अनुसार वैधानिक रूप से काम किया। आरोपी को देशभक्ति व्यक्त करने या व्यक्तिगत विश्वास के लिए गिरफ्तार नहीं किया गया था। उस पर समुदायों के बीच घृणा को बढ़ावा देने वाली आपत्तिजनक सामग्री साझा करने के लिए कानूनी कार्रवाई की गई थी।' 
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पुलिस ने बताया कैसे और क्यों की गई गिरफ्तारी?
कोलकाता पुलिस ने कहा, 'मामले की विधिवत जांच की गई और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आरोपी को बीएनएसएस की धारा 35 के तहत नोटिस देने के कई प्रयास किए गए, लेकिन हर बार वह फरार पाई गई। इसके बाद सक्षम अदालत की ओर से गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया, जिसके बाद उसे गुड़गांव से वैध तरीके से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उसे उचित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया और कानून की उचित प्रक्रिया के अनुसार उसे ट्रांजिट रिमांड में भेजा गया। बाद में अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।'
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क्या है मामला?
इससे पहले कोलकाता पुलिस ने कथित तौर पर सांप्रदायिक टिप्पणियों वाला एक वीडियो अपलोड करने के लिए महिला को गिरफ्तार किया था, जिसमें दावा किया गया था कि बॉलीवुड अभिनेता ऑपरेशन सिंदूर पर चुप थे। कोलकाता पुलिस ने कहा, 'कुछ सोशल मीडिया अकाउंट गलत सूचना फैला रहे हैं कि कोलकाता पुलिस ने पाकिस्तान का विरोध करने के लिए एक कानून की छात्रा को अवैध रूप से गिरफ्तार किया है। यह कहानी शरारती और भ्रामक है।' 

15 मई को गार्डन रीच पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज
महिला के खिलाफ 15 मई को गार्डन रीच पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसने एक वीडियो पोस्ट किया था, जो भारत के नागरिकों के एक वर्ग की धार्मिक आस्था का अपमान करता है और विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य और घृणा को बढ़ावा देता है। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की उचित धारा के तहत दर्ज किया गया था। आरोपी महिला पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से दुर्भावनापूर्ण कार्य करने, जानबूझकर अपमान करने, शांति भंग करने के लिए उकसाने के अलावा संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके बाद गुड़गाव से उसकी गिरफ्तारी हुई। फिर उसे कोलकाता लाया गया। यहां की एक अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज की और 13 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।


सुकांत मजूमदार ने लगाए थे आरोप
भाजपा पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कथित तौर पर वीडियो पोस्ट करने के लिए महिला को गिरफ्तार करने में कोलकाता पुलिस की आलोचना की। भाजपा नेता ने आरोप लगाया है कि गिरफ्तारी न्याय के लिए नहीं, बल्कि तुष्टिकरण के लिए की गई थी। उन्होंने कहा, '22 वर्षीय कानून की छात्रा शर्मिष्ठा पनोली को अब हटाए जा चुके वीडियो और सार्वजनिक माफी के बाद भी गिरफ्तार किया गया। कोई दंगा नहीं। कोई अशांति नहीं। फिर भी ममता बनर्जी की पुलिस ने रातों-रात कार्रवाई की। न्याय के लिए नहीं, बल्कि तुष्टिकरण के लिए। जब टीएमसी नेता सनातन धर्म का अपमान करते हैं... महाकुंभ का मजाक उड़ाते हैं और सांप्रदायिक जहर फैलाते हैं तो कोई एफआईआर नहीं होती, कोई गिरफ्तारी नहीं होती, कोई माफी नहीं मिलती। यह न्याय नहीं है। यह वोट बैंक प्रतिशोध है।'

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