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Sharad Pawar Resigns: NCP में आगे क्या होगा, सुप्रिया सुले और अजित पवार को मिलेगी कौन-कौन सी जिम्मेदारी?
Wed, 03 May 2023 05:02 PM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Wed, 03 May 2023 05:02 PM IST
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शरद पवार
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष पद से शरद पवार के इस्तीफे ने महाराष्ट्र के साथ-साथ देश की राजनीति में हलचल शुरू कर दी है। एक तरफ पवार को मनाने की कोशिश चल रही है तो दूसरी ओर इस बात की भी चर्चा हो रही है कि अब आगे क्या होगा?सवाल ये है कि आखिर एनसीपी में आगे क्या होगा? क्या शरद पवार अपना इस्तीफा वापस लेंगे? अगर नहीं, तो कौन होगा उनका उत्तराधिकारी? पवार की बेटी सुप्रिया सुले को क्या जिम्मेदारी मिलेगी? अजित पवार की पावर कितनी बढ़ेगी? आइए समझते हैं...
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एनसीपी में आगे क्या होगा?
इसे समझने के लिए हमने महाराष्ट्र की राजनीति पर अव्छी पकड़ रखने वाले राजनीतिक विश्लेषक आनंद त्रिपाठी से बात की। उन्होंने कहा, 'एनसीपी को लेकर अभी कुछ चीजें स्पष्ट होने लगी हैं। शरद पवार राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं। उन्हें मालूम है कि उनके किस कदम से पार्टी और उनकी छवि पर क्या असर पड़ सकता है। यही कारण है कि उन्होंने बहुत सोच-समझकर ये फैसला लिया है। वह अपनी ही पार्टी नहीं, बल्कि देश के अन्य राजनीतिक दलों को भी एक संदेश देना चाहते हैं।' त्रिपाठी के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए एनसीपी के भविष्य पर चार तरह के कयास लग रहे हैं।
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इसे समझने के लिए हमने महाराष्ट्र की राजनीति पर अव्छी पकड़ रखने वाले राजनीतिक विश्लेषक आनंद त्रिपाठी से बात की। उन्होंने कहा, 'एनसीपी को लेकर अभी कुछ चीजें स्पष्ट होने लगी हैं। शरद पवार राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं। उन्हें मालूम है कि उनके किस कदम से पार्टी और उनकी छवि पर क्या असर पड़ सकता है। यही कारण है कि उन्होंने बहुत सोच-समझकर ये फैसला लिया है। वह अपनी ही पार्टी नहीं, बल्कि देश के अन्य राजनीतिक दलों को भी एक संदेश देना चाहते हैं।' त्रिपाठी के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए एनसीपी के भविष्य पर चार तरह के कयास लग रहे हैं।
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1. खुद अध्यक्ष बने रहें, दो कार्यकारी अध्यक्ष भी बना दिए जाएं: सबसे ज्यादा इसी के कयास लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि पवार पार्टी में अपनी शक्ति देखना चाहते हैं। अब बड़ी संख्या में लोग उनसे इस्तीफा वापस लेने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में संभव है कि वह अपना इस्तीफा वापस ले लें। इसके साथ ही पार्टी चलाने के लिए दो कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए जा सकते हैं।
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2. बेटी या भतीजे को सौंप दें विरासत: एनसीपी के नए अध्यक्ष को लेकर दो बड़े दावेदार हैं। शरद पवार के भतीजे और महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजित पवार का नाम इसमें सबसे पहले है। अजित पार्टी प्रमुख के लिए सबसे बड़े दावेदार हैं। पार्टी पर उनका काफी प्रभाव है। यही कारण है कि जहां शरद पवार खुद नहीं होते हैं, वहां अजित को भेजा जाता है।
अजित ने पार्टी के फैसले के खिलाफ जाकर 2019 में देवेंद्र फडणवीस के साथ मिलकर शपथ ले ली थी। बगावत के बावजूद जब वापस अजित शरद पवार के साथ गए तो महाविकास अघाड़ी की सरकार में भी उन्हें ही डिप्टी सीएम बनाया गया।
इसके बाद जब उद्धव ठाकरे की सरकार गिरी तो भी शरद पवार ने अजित को ही नेता प्रतिपक्ष बनाया। अजित के साथ सबसे बड़ी ताकत 'पवार' नाम की है। अजित के साथ पवार शब्द जुड़ा हुआ है। ऐसे में संभव है कि पार्टी की बागडोर अजित पवार को ही मिल जाए। हालांकि, जब अजित से इस बाबत सवाल पूछा गया कि अगर शरद पवार उन्हें अध्यक्ष बनाएं तो क्या वह बनेंगे? इसपर अजित पवार ने साफ इनकार कर दिया। बोले, इसका सवाल ही नहीं बनता। ये सोच भी नहीं सकते।
शरद पवार की बेटी और एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले अध्यक्ष पद की दूसरी सबसे बड़ी दावेदार हैं। सुप्रिया तेज तर्रार नेता हैं और बोलने में काफी माहिर हैं। उनकी वाक शैली से लोग उनके कायल हो जाते हैं। सुप्रिया ने राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान बना रखी है। ऐसे में संभव है कि पार्टी की कमान आगे सुप्रिया को ही मिल जाए।
ये भी पढ़ें : बेटी सुप्रिया या भतीजे अजित? शरद पवार की जगह कौन लेगा
अजित ने पार्टी के फैसले के खिलाफ जाकर 2019 में देवेंद्र फडणवीस के साथ मिलकर शपथ ले ली थी। बगावत के बावजूद जब वापस अजित शरद पवार के साथ गए तो महाविकास अघाड़ी की सरकार में भी उन्हें ही डिप्टी सीएम बनाया गया।
इसके बाद जब उद्धव ठाकरे की सरकार गिरी तो भी शरद पवार ने अजित को ही नेता प्रतिपक्ष बनाया। अजित के साथ सबसे बड़ी ताकत 'पवार' नाम की है। अजित के साथ पवार शब्द जुड़ा हुआ है। ऐसे में संभव है कि पार्टी की बागडोर अजित पवार को ही मिल जाए। हालांकि, जब अजित से इस बाबत सवाल पूछा गया कि अगर शरद पवार उन्हें अध्यक्ष बनाएं तो क्या वह बनेंगे? इसपर अजित पवार ने साफ इनकार कर दिया। बोले, इसका सवाल ही नहीं बनता। ये सोच भी नहीं सकते।
शरद पवार की बेटी और एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले अध्यक्ष पद की दूसरी सबसे बड़ी दावेदार हैं। सुप्रिया तेज तर्रार नेता हैं और बोलने में काफी माहिर हैं। उनकी वाक शैली से लोग उनके कायल हो जाते हैं। सुप्रिया ने राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान बना रखी है। ऐसे में संभव है कि पार्टी की कमान आगे सुप्रिया को ही मिल जाए।
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3. किसी करीबी को बनाया जा सकता है अध्यक्ष: इसकी भी काफी संभावना है। एनसीपी भी उन दलों में शुमार है, जिसपर भाजपा हमेशा से परिवारवाद का आरोप लगाती रही है। कांग्रेस ने हाल ही में मल्लिकार्जुन खरगे को अध्यक्ष बनाया। लंबे समय बाद कांग्रेस ने गांधी परिवार के बाहर से किसी को अध्यक्ष बनाया था। ऐसे में संभव है कि एनसीपी में भी पवार परिवार के बाहर से किसी को अध्यक्ष बनाया जाए। इसमें जो भी हो, वो पवार परिवार के करीबी हो।
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4. सुप्रिया सुले राष्ट्रीय तो अजित को सूबे की कमान सौंप दी जाए : इस तरह की भी चर्चा है। अभी शरद पवार की बेटी सुप्रिया सांसद हैं और राष्ट्रीय राजनीति में वह काफी दखल भी देती हैं। वहीं, अजित पवार की महाराष्ट्र राजनीति पर अच्छी पकड़ है। ऐसे में संभव है कि सुप्रिया सुले को राष्ट्रीय राजनीति सौंप दी जाए और अजित पवार को महाराष्ट्र की कमान दे दी जाए।
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विपक्ष में क्यों है हलचल
शरद पवार के एनसीपी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से विपक्षी दलों में भी हलचल तेज हो गई है। अभी तक शरद पवार विपक्षी एकजुटता के लिए लगातार काम कर रहे थे। वह विपक्ष के बड़े नेताओं में शुमार हैं। उनकी बात ममता बनर्जी से लेकर अखिलेश यादव, नीतीश कुमार और तेजस्वी तक मानते हैं।
ऐसे में अगर शरद पवार एनसीपी के अध्यक्ष नहीं रहे तो विपक्षी एकजुटता को भी बड़ा झटका लग सकता है। कहा जा रहा है कि एनसीपी का एक गुट भाजपा के साथ गठबंधन चाहता है। ऐसे में अगर एनसीपी के नए अध्यक्ष ऐसा कदम उठाते हैं तो विपक्षी एकता को बड़ा झटका लग सकता है।
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शरद पवार के एनसीपी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से विपक्षी दलों में भी हलचल तेज हो गई है। अभी तक शरद पवार विपक्षी एकजुटता के लिए लगातार काम कर रहे थे। वह विपक्ष के बड़े नेताओं में शुमार हैं। उनकी बात ममता बनर्जी से लेकर अखिलेश यादव, नीतीश कुमार और तेजस्वी तक मानते हैं।
ऐसे में अगर शरद पवार एनसीपी के अध्यक्ष नहीं रहे तो विपक्षी एकजुटता को भी बड़ा झटका लग सकता है। कहा जा रहा है कि एनसीपी का एक गुट भाजपा के साथ गठबंधन चाहता है। ऐसे में अगर एनसीपी के नए अध्यक्ष ऐसा कदम उठाते हैं तो विपक्षी एकता को बड़ा झटका लग सकता है।
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