जब उद्धव को सीएम शरद पवार ने अकेले बुलाकर कहा था, आतंकवादियों की हिट-लिस्ट में है मातोश्री
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजनीतिक परिस्थितियां सदैव एक जैसी नहीं रहती। समय के अनुसार सियासत और उसका रंग बदलता है। महाराष्ट्र के सियासी दंगल में भी ऐसा ही कुछ हो रहा है। सत्ता को लेकर आमने सामने की भूमिका जो भी रही हो, मगर बाला साहेब ठाकरे और शरद पवार एक दूसरे का दिल से सम्मान करते थे।
आतंकवादियों ने 1989 में बाला साहब ठाकरे के निवास स्थान 'मातोश्री' पर हमला करने की योजना बनाई थी। उस दौरान शरद पवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे। खुफिया एजेंसी ने पवार को बताया कि मातोश्री पर आतंकी हमले का अलर्ट है।
बिना कोई देरी किए मुख्यमंत्री पवार ने उद्धव ठाकरे को फोन कर अकेले अपने पास बुलाया। पवार ने उद्धव के सामने वह कागज रख दिया, जिसमें आतंकी हमले के अलर्ट का उल्लेख किया गया था। इसके बाद उद्धव ने घर पहुंचकर अपने पिता बाला साहेब को सारी बात बताई। उद्धव की बात सुनकर बाल ठाकरे ने कुछ दिनों के लिए एक सुरक्षित घर खोजने और मातोश्री को खाली करने का निर्देश दिया।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने अपनी पुस्तक 'होल्ड्स ब्रेयर्ड: माई इयर्स इन पॉलिटिक्स' में उक्त घटना का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि शिवसेना के संरक्षक बाल ठाकरे खालिस्तानी आतंकियों की हिट-लिस्ट में थे। उस समय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे शरद पवार ने बाल ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे को फोन किया और उन्हें धमकी के बारे में सारी जानकारी दे दी।
19 मार्च, 1988 को बाल ठाकरे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी, जिसमें एक प्रश्नावली वितरित की गई। इसके जरिए मुंबई शहर में रह रहे सिख समुदाय के लोगों को यह आश्वासन दिया गया कि चूंकि वे किसी तरह के आंदोलन की गतिविधियों में आर्थिक मदद नहीं कर रहे हैं, इसलिए बिना भय के रहें।
साथ ही बाल ठाकरे ने प्रेस में यह घोषणा भी कर दी कि अगर सिख, चरमपंथ की फंडिंग करते हुए मिले तो वह सुनिश्चित करेंगे कि शहर में उनका सामाजिक और आर्थिक रूप से बहिष्कार किया जाए। 1989 में शिवसेना महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव हार गई। राणे के मुताबिक इस हार ने बाल ठाकरे को और भी कमजोर स्थिति में डाल दिया।
उस वक्त राज्य की सुरक्षा कांग्रेस द्वारा नियंत्रित थी। हालांकि मुख्यमंत्री शरद पवार ने पहले से ही मातोश्री की सुरक्षा बढ़ा दी थी, लेकिन फिर भी उन्होंने बाल ठाकरे के परिवार को यह जानकारी देना उचित समझा। तमाम तरह के तनाव के बीच एक दिन मुख्यमंत्री पवार का उद्धव ठाकरे को अप्रत्याशित फोन आया।
उन्होंने उद्धव से कहा, 'वे तुरंत आएं और देखें। साथ ही उद्धव को अकेले आने की हिदायत भी दे दी गई।' राणे के मुताबिक, शरद पवार ने यहां पर बाल ठाकरे के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों को साझा किया था। उसी रिश्ते के कारण, उन्होंने उद्धव को आतंकी साजिश के बारे में सूचित किया। इस साजिश में अंदरूनी लोगों के शामिल होने की बात भी कही गई। यहां तक कि पुलिस और गृह मंत्रालय के बारे में भी कुछ अहम बातें साझा हुई।
पुस्तक में राणे ने दावा किया है कि पवार ने बाल ठाकरे परिवार को अतिरिक्त पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने की पेशकश की। साथ ही उन्हें परिवार के भीतर जानकारी रखने की सलाह भी दी। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने अपने पिता के साथ शरद पवार के साथ हुई बातचीत पर चर्चा की। सारी बात सुनकर बाला साहेब ने परिवार के हर सदस्य को कुछ दिनों के लिए एक सुरक्षित घर खोजने और मातोश्री को खाली करने का निर्देश दिया।