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निधन: गांधीवादी शकुंतला चौधरी नहीं रहीं, पीएम ने जताया शोक, इसी साल पद्मश्री से किया गया था सम्मानित

Mon, 21 Feb 2022 08:02 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 21 Feb 2022 08:02 PM IST
सार

सरानिया आश्रम में उनकी देखभाल करने वालों ने बताया कि पिछले 10 साल से उपचार चल रहा था और उम्र संबंधी बीमारियों के चलते रविवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली।

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Shakuntala Choudhary Died Padma Shri Awardee PM Modi Himant Biswa Sarma expressed grief Latest Update
शकुंतला चौधरी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

असम की जानी मानी गांधीवादी 102 वर्षीय शकुंतला चौधरी बाइदेउ का निधन हो गया। इसी साल पद्मश्री से सम्मानित चौधरी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक प्रकट किया और कहा कि वह अपनी गांधीवादी मूल्यों के लिए हमेशा याद की जाएंगी।  

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सरानिया आश्रम में उनकी देखभाल करने वालों ने बताया कि पिछले 10 साल से उपचार चल रहा था और उम्र संबंधी बीमारियों के चलते रविवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली। वह दशकों से गुवाहाटी के शरणिया पहाड़ी स्थित कस्तूरबा गांधी आश्रम में रह रही थीं। राज्य सरकार की ओर से अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ कराए जाने का एलान किया गया। 
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पीएम मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री मोदी ने उनके निधन पर शोक जताया और कहा कि गांधीवादी मूल्यों में दृढ़ विश्वास रखने के लिए उन्हें याद किया जाएगा। उन्होंने ट्वीट किया कि शकुंतला चौधरी को गांधीवादी मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए उनके जीवनभर के प्रयासों के लिए याद किया जाएगा। सरनिया आश्रम में उनके नेक काम ने कई लोगों की जिंदगियों पर सकारात्मक असर डाला। उनके निधन से दुखी हूं। उनके परिवार तथा असंख्य प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। ओम शांति।
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असम के सीएम ने भी जताया दुख
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व शर्मा ने भी उनके निधन पर शोक जताते हुए ट्वीट किया कि गांधीवादी और पद्म श्री शकुंतला चौधरी के निधन से बहुत दुखी हूं। उनका जीवन सरानिया आश्रम, गुवाहाटी में निःस्वार्थ सेवा, सच्चाई, सादगी और अहिंसा के प्रति समर्पित रहा, जहां महात्मा गांधी 1946 में रहे थे। उनकी सद्गति की प्रार्थना करता हूं। ओम शांति। राज्य के मंत्री केशव महंत और रनोज पेगू ने सरनिया आश्रम में सरकार की ओर से चौधरी के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की।

शकुंतला ने बच्चों की पढ़ाई के लिए काफी काम किया
गुवाहाटी में जन्मी शकुंतला पढ़ाई में काफी अच्छी थीं और गुवाहाटी के टीसी स्कूल में अध्यापन के दौरान ही वह अन्य गांधीवादी अमलप्रोवा दास के संपर्क में आईं, जिनके पिता ने सरानिया हिल्स की अपनी संपत्ति आश्रम बनाने के लिए दान में दे दी थी। दास ने चौधरी से ग्राम सेविका विद्यालय चलाने और कस्तूरबा गांधी नेशनल मेमोरियल ट्रस्ट (केजीएनएमटी) की असम शाखा के प्रबंधन में मदद करने का अनुरोध किया था। इसके बाद वह कार्यालय सचिव बन गईं और उन्हें ट्रस्ट के प्रशासन का जिम्मा दिया गया।


मशहूर ‘भूदान’ आंदोलन का भी हिस्सा बनीं
इसके साथ ही वह विद्यालय में पढ़ाती भी रहीं। चौधरी ने 1955 में केजीएनएमटी के ‘प्रतिनिधि’ का पद संभाला और 20 वर्षों तक चीनी आक्रमण, तिब्बती शरणार्थी संकट, 1960 के भाषाई आंदोलन जैसे कई घटनाक्रम के बीच मिशन का नेतृत्व किया। अपने जीवन में वह विनोबा भावे से भी जुड़ी रहीं और उनके मशहूर ‘भूदान’ आंदोलन के अंतिम चरण के दौरान असम में डेढ़ साल तक चली ‘पदयात्रा’ में भी शामिल हुईं।

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