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हिंद महासागर में भारत की कोशिश को झटका, सेशेल्स ने नौसेना परियोजना से हाथ खींचे

Sun, 17 Jun 2018 09:42 PM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Sun, 17 Jun 2018 09:42 PM IST
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Seychelles said that the country has decided to not move ahead with an Indian naval base

सेशेल्स के राष्ट्रपति डैनी फॉरे ने 26 जून के भारत दौरे से पहले कहा है कि वह अजंपशन द्वीप पर नौसैनिक अड्डा निर्माण परियोजना में भारत को साझीदार नहीं बनाएगा। वह इस द्वीप पर खुद सैन्य सुविधाएं विकसित करेगा। 2015 में भारत के साथ समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से ही सेशेल्स में विपक्षी दलों का विरोध तेज हो गया था। यह समझौता पीएम नरेंद्र मोदी के सेशेल्स दौरे के दौरान हुआ था। इस द्वीप पर नौसैनिक अड्डा बनने से भारत को हिंद महासागर में रणनीतिक लाभ मिलता।

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डैनी के भारत दौरे में द्विपक्षीय सहयोग पर बातचीत होगी। सेशेल्स समाचार एजेंसी के अनुसार, डैनी ने है कहा कि वह अपने भारत दौरे में इस नौसैनिक परियोजना पर कोई बातचीत नहीं करेंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पर टिप्प्णी से इनकार किया। सेशेल्स के इस फैसले को भारत की कूटनीतिक हार के तौर पर देखा जा रहा है। इससे चीन को टक्कर देने के लिए हिंद महासागर में अपना दखल बढ़ाने की भारत की कोशिशों को झटका लगा है। 
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गोखले की कोशिशें भी हुईं नाकाम

डैनी ने कहा कि इस परियोजना के सभी उद्देश्य खत्म हो चुके हैं। सेशेल्स अगले साल खुद इस सैन्य अड्डे का निर्माण करेगा। उन्होंने कहा कि इस इलाके में हमारा सैन्य अड्डा होना जरूरी है। हाल में विक्टोरिया गए विदेश सचिव विजय गोखले की कोशिशें भी समझौते को बचाने में असफल रहीं। समझौते पर पूर्व विदेश सचिव एस. जयशंकर ने चर्चा शुरू की थी और उन्होंने ही हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, इसके तुरंत बाद अटकलें लगने लगी थीं कि समझौता टिक नहीं पाएगा।
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सेशेल्स नेता विपक्ष को बता रहा जिम्मेदार 

सेशेल्स के मीडिया का कहना है कि सरकार इस समझौते के टूटने में नेता विपक्ष भारतीय मूल के रामकलावन को जिम्मेदार ठहरा रही है। रामकलावन ने अपने भारत दौरे के बाद समझौते के लिए हामी भरी थी, लेकिन बाद में मुकर गए। विपक्ष समझौते का विरोध करने लगा। यह समझौता विपक्ष की मंजूरी के बिना नहीं हो सकता था। 

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