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सोनागाछी में सेक्स वर्करों ने लगाया मां दुर्गा का पंडाल, समाज को देना चाहते हैं संदेश

Tue, 09 Oct 2018 02:06 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Updated Tue, 09 Oct 2018 02:06 PM IST
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Sex workers of Sonagachi pitched set up a small pandal for durga puja

पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में मौजूद है एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया सोनागाछी। यहां करीब 10 हजार सेक्स वर्कर्स का घर है। यूं तो दुर्गा पूजा के समय पूरे पश्चिम बंगाल में खुशियां रहती हैं। लेकिन इसबार सोनागाछी भी पीछे नहीं है। यहां करीब 3 हजार सेक्स वर्कर्स ने 6 फीट ऊंची दुर्गा मां की मूर्ति के साथ एक छोटा सा पंडाल लगाया है।


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पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में मौजूद है एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया सोनागाछी। यहां करीब 10 हजार सेक्स वर्कर्स का घर है। यूं तो दुर्गा पूजा के समय पूरे पश्चिम बंगाल में खुशियां रहती हैं। लेकिन इसबार सोनागाछी भी पीछे नहीं है। यहां करीब 3 हजार सेक्स वर्कर्स ने 6 फीट ऊंची दुर्गा मां की मूर्ति के साथ एक छोटा सा पंडाल लगाया है।

35 वर्षीय तुम्पा (बदला हुआ नाम) एक सेक्स वर्कर हैं। उनका कहना है कि इस बार की दुर्गा पूजा के लिए वह बहुत उत्सुक है। वह सामुदायिक पंडाल में बैठ पाने के लिए बेहद खुश है। इसके लिए उन्होंने तीन साड़ियां भी खरीदी हैं। इस इलाके में महिलाओं ने पहली बार दुर्गा पूजा का आयोजन किया है। पूजा से संबंधित सारे अनुष्ठान महिलाओं ने किए हैं। यहां तक कि पंडाल में लगी दुर्गा मां की मूर्ति भी महिला कलाकार कांची पाल ने ही बनाई है।

सोनागाछी सरोजानी दुर्गा उत्सव के सदस्यों का कहना है कि उनका पंडाल बेशक छोटा है। लेकिन वहां मौजूद सेक्स वर्कर्स के लिए यह सामाजिक पाबंदी से ऊपर उठने का संकल्प है। तुम्पा का कहना है कि वह पंडाल में अपने बेटे को भी लेकर आई हैं। ताकि वह सीख सके कि महिलाएं शक्तिशाली होती हैं। और हर महिला मां दुर्गा की बेटी है। ताकि वह भी महिलाओं का सम्मान करना सीखे।

तुम्पा का कहना है कि जब उनके पति ने जबरन उन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेला उस वक्त वह महज 17 साल की थीं। वह इस इलाके में बीते 18 साल से रह रही हैं। पति की मौत के बाद तुम्पा का बेटा उत्तरी कोलकाता के एक हॉस्टल में रहकर सामान्य जीवन जी रहा है। तुम्पा समाज से सवाल करते हुए कहती हैं कि जब उनके यहां की मिट्टी को पवित्र और धार्मिक माना जाता है तो फिर वही समाज उन्हें क्यों स्वीकार नहीं करता है।

कई बाधाओं का करना पड़ा सामना

दरबार महिला समन्वय कमिटि के प्रेजिडेंट पुतुल का कहना है कि देवी नारी शक्ति का प्रतीक है और हम नारीत्व को मना रहे हैं। पुतुल का कहना है कि उनका 20 वर्षीय बेटा ड्राइवर है और अच्छा खासा कमा भी लेता है लेकिन फिर भी वह सोनागाछी में रहना ही पसंद करती हैं। पूजा के काम में लगी एक अन्य महिला का कहना है कि उन्हें इस काम के दौरान कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। खासतौर से नैतिक आधार पर। उन्होंने कहा कि कई साल पहले जब उन्होंने पहली बार खुद की पूजा करने का फैसला लिया था तो उन्हें कोर्ट तक जाना पड़ा था।

पूजा में शामिल महिलाओं का कहना है कि उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है महिला पुजारी को ढूंढना। साथ ही ढाक कलाकार भी अधिकतर पुरुष ही हैं। लकिन पुजारी के काम के लिए मिदनापुर की शरमिस्ठा भट्टाचार्य मान गई हैं। और ढाक के लिए एक ग्रुप से बात की गई है। उम्मीद है कि वह मान जाएंगे।

एक अन्य सेक्स वर्कर का कहना है कि इस पंडाल के लिए सभी महिलाओं ने अपनी अपनी क्षमता के अनुसार पैसे दिए हैं। पंडाल 10 फीट तक ऊंचा है और पूरा होने वाला है। उनका कहना है कि उनका बजट को अधिक नहीं है लेकिन वह समाज को संदेश देना चाहते हैं कि समाज बिना महिलाओं के जीवित नहीं रह सकता है। इसलिए महिलाओं को भी अधिकार मिलने चाहिए।
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