Heat: गरीबों की याददाश्त कमजोर कर रही भीषण गर्मी, तपिश के कारण ज्ञान संबंधी तंत्रिकाएं हो सकती हैं कमजोर
अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहने से गरीब इलाकों के निवासियों में तेजी से संज्ञानात्मक गिरावट आई, लेकिन अमीर इलाकों में रहने वालों के साथ ऐसा नहीं हुआ। शोधकर्ताओं के अनुसार, समृद्ध पड़ोंस में ऐसे संसाधन होते हैं।
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अत्यधिक गर्मी कमजोर आबादी विशेष रूप से बुजुर्गों और गरीबी में जीने के लिए मजबूर लोगों की याददाश्त को कमजोर कर रही है। यह बात एनवाईयू स्कूल ऑफ ग्लोबल पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं की अगुवाई में किए गए अध्ययन में सामने आई है। अध्ययन के अनुसार, अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने से ज्ञान-संबंधी तंत्रिकाएं कमजोर हो सकती हैं, लेकिन यह पूरी आबादी में एक समान नहीं होता है।
अध्ययन के अनुसार, दुनियाभर में खासकर अमेरिका में मौसम संबंधी मौतों का प्रमुख कारण अत्यधिक गर्मी है जो हर साल तूफान, बवंडर और बिजली गिरने की तुलना में अधिक लोगों की जान ले लेती है। छोटे बच्चे और बूढ़े लोग विशेष रूप से गर्मी से संबंधित बीमारियों जैसे गर्मी से थकावट और हीट स्ट्रोक से काफी प्रभावित होते हैं।
यह आया सामने
शोधकर्ताओं ने पाया कि अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहने से गरीब इलाकों के निवासियों में तेजी से संज्ञानात्मक गिरावट आई, लेकिन अमीर इलाकों में रहने वालों के साथ ऐसा नहीं हुआ। शोधकर्ताओं के अनुसार, समृद्ध पड़ोंस में ऐसे संसाधन होते हैं जो गर्मी, लू से बचने में मदद कर सकते हैं। अच्छी तरह से बनाए गए ग्रीन एरिया, एयर कंडीशनिंग और ठंडा करने जैसी चीजें इन्हें गर्मी से बचाती हैं। गरीबी वाले इलाकों में ऐसे संसाधन मौजूद नहीं थे ।
12 साल के सर्वेक्षण से निकाला निष्कर्ष
शोधकर्ताओं ने अध्ययन के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की ओर से आयोजित स्वास्थ्य और सेवानिवृत्ति अध्ययन के तहत 12 साल की अवधि तक सर्वेक्षण किए। इस सर्वेक्षण में 52 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लगभग 9,500 वयस्कों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं ने पड़ोस के उन सामाजिक आर्थिक उपायों को भी देखा जहां प्रतिभागी रहते थे। इसके अलावा उन्होंने तापमान के आंकड़ों के आधार पर 12 साल की अवधि के दौरान प्रतिभागियों के अत्यधिक गर्मी के पूरे खतरों की गणना की।