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SC: पर्यावरण निधि के 'दुरुपयोग' पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई गंभीर चिंता, उत्तराखंड सरकार से मांगा जवाब

Wed, 05 Mar 2025 07:27 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Wed, 05 Mar 2025 07:27 PM IST
सार

Misuse of Environmental Funds: सर्वोच्च अदालत ने उत्तराखंड में पर्यावरण निधि के 'दुरुपयोग' पर गंभीर चिंता जताई है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब भी मांगा है। सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इस फंड का इस्तेमाल आईफोन, लैपटॉप, फ्रिज और भवनों की मरम्मत जैसी चीजों को खरीदने में किया है, जो कि फंड के उद्देश्यों के खिलाफ है।

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'Serious concern': SC seeks Uttarakhand govt reply over 'misuse' of environmental funds, News in hindi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तराखंड सरकार से कंपेन्सेटरी अफोरेस्टेशन फंड (सीएएमपीए ) के गलत इस्तेमाल पर जवाब मांगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस फंड का उपयोग राज्य सरकार ने आईफोन और अन्य महंगे सामान खरीदने, लैपटॉप, फ्रिज, कूलर, और कार्यालयों की मरम्मत जैसी गैर-स्वीकृत गतिविधियों के लिए किया है।
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कंपट्रोलर और ऑडिटर जनरल की रिपोर्ट
कंपट्रोलर और ऑडिटर जनरल (सीएजी) की रिपोर्ट के अनुसार, सीएएमपीए फंड को वनों के संरक्षण और वृक्षारोपण के लिए उपयोग में लाना था, लेकिन राज्य सरकार ने इसे गैर-स्वीकृत खर्चों पर खर्च किया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि फंड का उपयोग कोर्ट केस लड़ने और व्यक्तिगत खर्चों के लिए भी किया गया। 
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इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि 2019-2022 के बीच रु. 275.34 करोड़ का ब्याज जमा नहीं किया गया, जो कि सीएएमपीए फंड के तहत जमा किया जाना चाहिए था। हालांकि, राज्य सरकार ने इसे स्वीकार किया और जुलाई 2023 में रु. 150 करोड़ की राशि ब्याज के रूप में जमा करने का दावा किया। फिर भी एक बड़ी राशि का हिसाब नहीं दिया गया, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो गया।
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सुप्रीम कोर्ट ने जताई गंभीर चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीर चिंता का विषय बताया और कहा कि सीएएमपीए फंड को वनों की हरियाली बढ़ाने के लिए ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति बी आर गवाई और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मासिह की पीठ ने कहा, 'अगर राज्य सरकार से 19 मार्च तक संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो हम उत्तराखंड के मुख्य सचिव को कोर्ट में बुलाएंगे।'

मुख्य सचिव से हलफनामा देने का दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार के मुख्य सचिव से एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि सीएएमपीए फंड का सही तरीके से इस्तेमाल किया गया या नहीं। कोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण में सीएएमपीए फंड की अहम भूमिका को ध्यान में रखते हुए इस फंड के सही उपयोग को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।


1995 की जनहित याचिका से जुड़ा है मामला
सुप्रीम कोर्ट यह मामला 1995 में दायर की गई जनहित याचिका 'टी एन गोदावर्मन थिरुमलपद बनाम भारत सरकार' की सुनवाई कर रहा है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और वनों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया गया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि सीएएमपीए फंड का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए ताकि वनों की रक्षा और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सके।

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