आईएस खुरासान के खुलासे से सकते में सुरक्षा एजेंसियां
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मंगलवार को यूपी एटीएस की कार्रवाई से हुए खुलासे के बाद दिल्ली में कैबिनेट सचिवालय से लेकर गृह मंत्रालय तक सक्रिय हो गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत दोभाल की टीम पूरे घटनाक्रम पर खास नजर रख रही है। उच्च पदस्थ सरकारी सूत्रों ने बताया कि सीरिया और इराक में सैन्य कार्रवाई के दबाव में आईएस का बड़ा तबका अफगानिस्तान में आईएस खुरासान का संगठन खड़ा कर रहा है।
'युवकों का आईएस खुरासान से संबंध निकलना चिंता की बात'
खुफिया विभाग के सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि अभी यही अध्ययन चल रहा था कि तालिबान जैसे दर्जन भर खतरनाक आतंकी संगठनों के साथ आईएस खुरासान का भी अफगानिस्तान में जड़ मजबूत करने का इस क्षेत्र में क्या असर होगा। ऐसे में लखनऊ और कानपुर जैसी जगहों के युवकों का आईएस खुरासान से संबंध निकलना वाकई चिंता की बात है।
सरकार के सामरिक रणनीतिकार आईएस खुरासान के कई अंतरराष्ट्रीय आयाम देख रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक रूस और ईरान आईएस खुरासान को भगाने के लिए तालिबान को मजबूती देने के मकसद से अफगानिस्तान से हाथ मिला रहे हैं। अफगानिस्तान में तालिबान की मजबूती वहां की सरकार को कमजोर करेगा जिसका सीधा असर पाकिस्तान और भारत पर पड़ेगा।
खुरासान दरअसल ईरान का एक प्रांत है जो प्राचीन समय में अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया के तजाकिस्तान और तुर्कमानिस्तान तक फैला था। सीरिया और इराक में स्थिति कमजोर होने के बाद आईएस प्लान बी के तहत अफगानिस्तान पहुंचा है। उसका मकसद खरासान के पुराने रुतबे को वापस लाकर वहां खलीफा व्यवस्था को स्थापित करना है।