बंधकों का गला रेतकर मारने के तरीके ने सुरक्षा एजेंसियों को उलझाया
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बांग्लादेश आतंकी हमला भारत के लिए गंभीर खतरे की घंटी है। खुफिया स्तर पर दोनों देशों के बीच सूचनाओं के हो रहे शुरुआती आदान प्रदान के मुताबिक इस हमले का इस्लामिक स्टेट (आईएस) के साथ किसी भी तरह का सीधा संबंध नहीं निकला है। लेकिन आतंकवादियों के पास असलहे और स्वचालित बंदूक होने के बावजूद बंधकों की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या करने के तरीके ने खुफिया और सुरक्षा तंत्र को उलझा दिया है।
एजेंसियों का मानना है कि गला रेतने के आईएस के कुख्यात तरीके का इस्तेमाल सिर्फ भारत के लिए नहीं बल्कि पूरे उप महाद्वीप के लिए चेतावनी है। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से हिंदू पुजारियों और बुद्धिजीवियों की हत्याओं के कारण भारतीय एजेंसियां बांग्लादेश पर पैनी नजर रख रही हैं।
उच्चपदस्थ खुफिया सूत्रों के मुताबिक बांग्लादेश में कुछ महीनों से तमीम चौधरी नाम का कनाडा का नागरिक हिंसक गतिविधियों में सक्रिय है। इस बात की तदस्दीक की जा रही है कि इस घटना के पीछे भी कहीं तमीम चौधरी का हाथ तो नहीं।
बांग्लादेश के 180 मुस्लिम नागरिक आईएस में सक्रिय
कनाडा की खुफिया एजेंसी से मिली जानकारी के मुताबिक वहां के 180 मुस्लिम नागरिक आईएस में अपना सक्रिय रोल अदा कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि बांग्लादेश में अबतक छोटे स्तर पर हो रही आतंकी हिंसा का आईएस और अल-कायदा जिम्मेदारी ले रहे हैं।
इसलिए इन दावों को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा था। लेकिन वहां की ताजा घटना से सभी समीकरण बदलने लगे हैं। हालांकि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी लेकिन इसे नजरअंदाज करना घातक साबित होगा। इनस्टीट्यूट ऑफ कनफ्लीक्ट मैनेजमेंट के कार्यकारी निदेशक अजय सहनी ने अमर उजाला से बातचीत में बताया है कि बांग्लादेश के सभी बड़े आतंकी संगठनों को खत्म किया जा चुका है।
इसके बचे खुचे लोग आईएस और अल-कायदा के नाम पर अपना काम कर रहे हैं। ताकि उन्हें पहचान मिल सके। लेकिन खुफिया सूत्रों के मुताबिक बांग्लादेश का यह गुट सीधे आईएस से नहीं भी जुड़ा है तो इसके तरीके और हमले के स्तर ने सुरक्षा तंत्र को सकते में जरुर डाल दिया है।