{"_id":"620ce4ce3f5e4b546e1c379f","slug":"sdpi-alleges-bjp-promoted-issue-of-hijab-in-karnataka","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hijab Row: एसडीपीआई का आरोप, कर्नाटक में हिजाब के मुद्दे को भाजपा ने दिया बढ़ावा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Hijab Row: एसडीपीआई का आरोप, कर्नाटक में हिजाब के मुद्दे को भाजपा ने दिया बढ़ावा
Wed, 16 Feb 2022 05:31 PM IST
निधि पाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंगलुरु
Published by: निधि पाल
Updated Wed, 16 Feb 2022 05:31 PM IST
सार
एसडीपीआई ने आरोप लगाया कि कर्नाटक में हिजाब के मुद्दे को भाजपा ने बढ़ावा दिया है। उनका कहना है कि ये भाजपा की साजिश है।
विज्ञापन
हिजाब विवाद
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया ने बुधवार को भाजपा पर कर्नाटक के शिक्षण संस्थानों में हिजाब और भगवा गमछे के मुद्दे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। एसडीपीआई के प्रदेश महासचिव बीआर भास्कर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि ये भाजपा की सोची समझी साजिश है। यह अपराध है।
उन्होंने कहा कि संविधान ने कभी भी मुस्लिम महिलाओं के हिजाब पहनने पर पाबंदी नहीं लगाई है। बीआर भास्कर प्रसाद ने कहा कि ये मुद्दा एक कॉलेज के प्रिंसिपल ने उठाया था, जिसे बाद में संघ ने बढ़ावा दिया। उन्होंने सवाल किया कि जब जब स्कूल कॉलेजों में हिंदू धर्म के प्रतीक जैसे कलावा आदि पहनने की अनुमति है, तो फिर हिजाब को धार्मिक प्रतीक के रुप में बैन क्यों किया जाना चाहिए। एसडीपीआई के प्रदेश महासचिव ने कांग्रेस पर इस मुद्दे को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का भी आरोप लगाया।
एसडीपीआई के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मजीद भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे। उन्होंने कहा हिजाब को लेकर कि हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश केवल उन कॉलेजों पर लागू होता है, जहां ड्रेस कोड निर्धारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग आदेश को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। अब्दुल मजीद ने कहा कि केपीसीसी अध्यक्ष डी के शिवकुमार को इस मुद्दे पर कांग्रेस का रुख स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अल्पसंख्यक वोट चाहते हैं, लेकिन मुस्लिमों की समस्या का समाधान नहीं करना चाहते।
विज्ञापन
वहीं, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की महिला विंग ने आरोप लगाया कि हिजाब को लेकप मुस्लिम लड़कियों का मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनडब्ल्यूएफ दक्षिण कन्नड़ की जिला अध्यक्ष जुलेखा बाजपे ने इस मामले पर कुछ स्कूल प्रशासन और शिक्षकों के रवैये की निंदा की है। उन्होंने कहा कि ये लोग हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने के बहाने छात्राओं को प्रताड़ित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह आदेश प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों तक सीमित है, जबकि अधिकारी छात्रों और शिक्षकों को सार्वजनिक स्थानों पर भी हिजाब न पहनने के लिए मजबूर कर रहे हैं। जुलेखा बाजपे ने कहा कि इस तरह की हरकत मुस्लिम छात्रों से उनके मौलिक अधिकार छीनने के समान है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि संविधान ने कभी भी मुस्लिम महिलाओं के हिजाब पहनने पर पाबंदी नहीं लगाई है। बीआर भास्कर प्रसाद ने कहा कि ये मुद्दा एक कॉलेज के प्रिंसिपल ने उठाया था, जिसे बाद में संघ ने बढ़ावा दिया। उन्होंने सवाल किया कि जब जब स्कूल कॉलेजों में हिंदू धर्म के प्रतीक जैसे कलावा आदि पहनने की अनुमति है, तो फिर हिजाब को धार्मिक प्रतीक के रुप में बैन क्यों किया जाना चाहिए। एसडीपीआई के प्रदेश महासचिव ने कांग्रेस पर इस मुद्दे को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का भी आरोप लगाया।
विज्ञापन
एसडीपीआई के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मजीद भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे। उन्होंने कहा हिजाब को लेकर कि हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश केवल उन कॉलेजों पर लागू होता है, जहां ड्रेस कोड निर्धारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग आदेश को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। अब्दुल मजीद ने कहा कि केपीसीसी अध्यक्ष डी के शिवकुमार को इस मुद्दे पर कांग्रेस का रुख स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अल्पसंख्यक वोट चाहते हैं, लेकिन मुस्लिमों की समस्या का समाधान नहीं करना चाहते।
विज्ञापन
वहीं, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की महिला विंग ने आरोप लगाया कि हिजाब को लेकप मुस्लिम लड़कियों का मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनडब्ल्यूएफ दक्षिण कन्नड़ की जिला अध्यक्ष जुलेखा बाजपे ने इस मामले पर कुछ स्कूल प्रशासन और शिक्षकों के रवैये की निंदा की है। उन्होंने कहा कि ये लोग हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने के बहाने छात्राओं को प्रताड़ित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह आदेश प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों तक सीमित है, जबकि अधिकारी छात्रों और शिक्षकों को सार्वजनिक स्थानों पर भी हिजाब न पहनने के लिए मजबूर कर रहे हैं। जुलेखा बाजपे ने कहा कि इस तरह की हरकत मुस्लिम छात्रों से उनके मौलिक अधिकार छीनने के समान है।