फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   SC To Start Hearing On Pleas Challenging Constitutional Validity Of CAA From Dec 5

Supreme Court: नागरिकता कानून की धारा 6A को चुनौती देने वाली याचिका पर अब पांच को सुनवाई, जानें क्या है मामला

Mon, 06 Nov 2023 11:36 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Mon, 06 Nov 2023 11:36 AM IST
सार

याचिकाकर्ताओं की ओर से सॉलिसिटर जनरल और अन्य वरिष्ठ वकीलों द्वारा मामले की सुनवाई टालने की मांग किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी, जिसकी सुनवाई सात नवंबर को होनी थी।

विज्ञापन
SC To Start Hearing On Pleas Challenging Constitutional Validity Of CAA From Dec 5
supreme court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट असम के अवैध प्रवासियों से संबंधित नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अब पांच दिसंबर को सुनवाई करेगी। 

विज्ञापन

क्या है असम समझौता

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट नागरिकता अधिनियम की धारा 6A को चुनौती देने वाले मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसे 1985 में असम समझौते को आगे बढ़ाने में एक संशोधन द्वारा जोड़ा गया था। असम समझौता भारत सरकार के प्रतिनिधियों और असम आंदोलन के नेताओं के बीच हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन था। 15 अगस्त 1985 को नई दिल्ली में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की उपस्थिति में इस पर हस्ताक्षर किए गए थे।

विज्ञापन

वकीलों ने की थी मामले को टालने की मांग

बता दें, इस मामले में कल यानी सात नवंबर को सुनवाई होनी थी, लेकिन याचिकाकर्ताओं की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की सुनवाई टालने की मांग की। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। मेहता ने अदालत से कहा, 'कल जो मामला सुनवाई के लिए आने वाला है वह नागरिकता संशोधन कानून से जुड़ा हुआ है। दिवाली से पहले यह अंतिम कार्य सप्ताह है और हमें कुछ समय चाहिए। इसलिए अगर मामले को थोड़े समय के लिए टाला जा सकता है तो सही रहेगा।'

विज्ञापन
विज्ञापन

आल असम स्टूडेंट्स यूनियन कर रहा है विरोध

समझौते के मुख्य बिंदु असम से अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन था, जिसके लिए आल असम स्टूडेंट्स यूनियन 1979 से विरोध कर रहा है। नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6A को 1985 में असम समझौते के एक संशोधन द्वारा सम्मिलित किया गया था, जिसने भारतीय मूल के अवैध प्रवासियों को वर्गीकृत किया था, जिनमें बांग्लादेश से प्रवासी असम में तीन समूहों में आए थे।

शुरू में 10 साल के लिए किया गया था विचार

बता दें कि भारत के संविधान, 1950 के अनुच्छेद 330-334 एंग्लो इंडियन और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए संसद के साथ-साथ राज्य विधानमंडलों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा उपाय हैं। यह अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों के आरक्षण और एंग्लो इंडियन के लिए नामांकन का प्रावधान करता है। आरक्षण और नामांकन, दोनों पर शुरू में 10 साल के लिए विचार किया गया था।

एससी/एसटी समुदायों को मिलता है इसका लाभ

हालांकि, यह देखते हुए कि उन समुदायों की सामाजिक स्थिति में सुधार नहीं हुआ था, इसलिए प्रत्येक 10 साल की समाप्ति के बाद विस्तार दिया गया था। पिछला विस्तार संविधान (104वां संशोधन अधिनियम) 2020 के माध्यम से दिया गया था। 2020 में दिए गए विस्तार का लाभ केवल एससी/एसटी समुदायों को मिलता है, न कि एंग्लो इंडियन को। एससी/एसटी समुदायों के लिए 2020 में बढ़ाया गया आरक्षण 2030 तक जारी रहेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed