फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   SC to hear plea of lawyers body for action against Jagdeep Dhankha, Kiren Rijiju over remarks on judiciary

SC: न्यायपालिका पर टिप्पणी का मामला, धनखड़ और रिजिजू के खिलाफ वकीलों की संस्था की याचिका पर सुनवाई आज

Mon, 15 May 2023 04:55 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 15 May 2023 04:55 AM IST
सार

वकीलों के संगठन ने बंबई हाईकोर्ट के नौ फरवरी के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया है। बंबई हाईकोर्ट में वकीलों के संगठन की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि यह संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र को लागू करने के लिए उपयुक्त मामला नहीं था।

विज्ञापन
SC to hear plea of lawyers body for action against Jagdeep Dhankha, Kiren Rijiju over remarks on judiciary
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम प्रणाली और न्यायपालिका के बारे में टिप्पणी को लेकर केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन (बीएलए) की याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा।

विज्ञापन


वकीलों के संगठन ने बंबई हाईकोर्ट के नौ फरवरी के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया है। बंबई हाईकोर्ट में वकीलों के संगठन की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि यह संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र को लागू करने के लिए उपयुक्त मामला नहीं था।
विज्ञापन

शीर्ष अदालत की वेबसाइट के अनुसार, बीएलए की अपील न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

विज्ञापन
विज्ञापन


बीएलए ने दावा किया था कि रिजिजू और धनखड़ ने अपनी टिप्पणियों और आचरण से संविधान में विश्वास की कमी दिखाई है। बीएलए ने धनखड़ को उपराष्ट्रपति के रूप में और रिजिजू को केंद्र सरकार के कैबिनेट मंत्री के रूप में कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने के लिए आदेश देने का अनुरोध किया था।

एक अपील में वकीलों के संगठन ने कहा कि उपराष्ट्रपति और केंद्रीय मंत्री द्वारा न केवल न्यायपालिका बल्कि संविधान पर ‘हमले’ ने सार्वजनिक रूप से शीर्ष अदालत की प्रतिष्ठा को घटाया है।

रिजिजू ने कहा था कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली ‘‘अस्पष्ट और अपारदर्शी’’ है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 1973 के केशवानंद भारती केस के ऐतिहासिक फैसले पर सवाल उठाया था, जिसने बुनियादी ढांचे का सिद्धांत दिया था। धनखड़ ने कहा था कि इस फैसले ने एक गलत मिसाल कायम की है और अगर कोई प्राधिकार संविधान में संशोधन करने की संसद की शक्ति पर सवाल उठाता है, तो यह कहना मुश्किल होगा कि ‘हम एक लोकतांत्रिक राष्ट्र हैं'।

याचिका में कहा गया है, याचिकाकर्ता ने बंबई हाईकोर्ट के समक्ष जनहित याचिका दायर की थी जिसमें प्रतिवादी नंबर एक और दो को सार्वजनिक रूप से उनके कथन और आचरण के लिए क्रमशः उपराष्ट्रपति और केंद्रीय मंत्रिमंडल के मंत्री पद के लिए अयोग्य ठहराने का अनुरोध किया गया था।

याचिका में कहा गया, प्रतिवादी संख्या एक और दो के आचरण ने सुप्रीम कोर्ट और संविधान में जनता के विश्वास को हिला दिया है। याचिका में कहा गया है कि उपराष्ट्रपति और केंद्रीय मंत्री ने शपथ ली है कि वे संविधान के प्रति सच्ची आस्था और निष्ठा रखेंगे। साथ ही कहा गया, उनके आचरण ने भारत के संविधान में विश्वास की कमी को दिखाया है।

याचिका में कहा गया कि दोनों ने न्यायपालिका, विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी की। बीएलए ने कुछ कार्यक्रमों में उपराष्ट्रपति और केंद्रीय मंत्री के दिए गए बयानों का हवाला दिया। हाईकोर्ट ने नौ फरवरी को जनहित याचिका को खारिज कर दिया था।

गौतम नवलखा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट कल करेगा सुनवाई

एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले में नजरबंद कार्यकर्ता गौतम नवलखा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई कर सकता है। याचिका में उन्हें मुंबई के एक सार्वजनिक पुस्तकालय से किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाने की अपील की गई है। 

न्यायमूर्ति केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने 28 अप्रैल को सीबीआई को नवलखा की उस याचिका पर दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसमें सार्वजनिक पुस्तकालय से शहर के किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की गई थी, क्योंकि पुस्तकालय को खाली करने की जरूरत है।


इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने नवलखा को उनकी सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों को उपलब्ध कराने में खर्च के लिए आठ लाख रुपये जमा करने का भी निर्देश दिया था। इससे पहले शीर्ष अदालत ने 10 नवंबर, 2022 को नवलखा को उनके बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण घर में नजरबंद रखने की अनुमति दी थी। नवलखा उस समय नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद थे।

जयपुर धमाकों के दोषियों की रिहाई के खिलाफ सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट जयपुर धमाकों के चार दोषियों को रिहा करने के राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 17 मई को सुनवाई करने के लिए राजी हो गया है। धमाकों में मारे गए गए लोगों को परिजनों ने हाईकोर्ट के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है। निचली अदालत ने इन चारों दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी।

13 मई, 2008 को जयपुर एक के बाद एक हुए धमाकों से दहल गया था। शहर के मानक चाक खंडा, चांदपोल गेट, बड़ी चौपाड़, छोटी चौपाड़, त्रिपोलिया गेट, जौहरी बाजार और संगनेरी गेट पर धमाके हुए थे जिसमें 71 लोगों की जान चली गई थी और 185 लोग घायल हुए थे।

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ के समक्ष धमाकों के कुछ पीड़ित परिवारों की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी की दलीलों पर विचार करने के बाद सुनवाई करने का फैसला किया। वरिष्ठ वकील ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की भी मांग की है।

राजस्थान सरकार ने भी 25 अप्रैल को अपील दायर कर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने 12 मई को धमाके के पीड़ित परिवारों के सदस्यों को अपील दायर करने की अनुमति दी थी और राज्य सरकार की तरफ से दायर याचिका के साथ बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed