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पेगासस मामला: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को होगी अहम सुनवाई, पैनल पेश करेगा अपनी रिपोर्ट
Mon, 21 Feb 2022 11:17 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 21 Feb 2022 11:17 PM IST
सार
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और अनुभवी पत्रकार एन राम और शशि कुमार द्वारा दायर की गई जनहित याचिकाएं 23 फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं।
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पेगासस जासूसी कांड
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट बुधवार को पेगासस मुद्दे पर पिछले साल 27 अक्टूबर के बाद पहली बार याचिकाओं के एक बैच पर सुनवाई करेगा। तब अदालत ने भारत में कुछ लोगों की निगरानी के लिए इस्राइली स्पाइवेयर के इस्तेमाल के आरोपों की जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों के तीन सदस्यीय पैनल के गठन का आदेश दिया था।
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पैनल द्वारा रिपोर्ट दायर करने की संभावना
प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना और न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने 12 जनहित याचिकाओं को सूचीबद्ध किया है, जिनमें एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और अनुभवी पत्रकार एन राम और शशि कुमार द्वारा दायर की गई जनहित याचिकाएं 23 फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं और इस पर विचार किए जाने की संभावना है। इसमें उस रिपोर्ट का विश्लेषण करने की संभावना है जिसे शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त पैनल द्वारा दायर किया जाना है।
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पैनल में साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक, नेटवर्क और हार्डवेयर पर तीन विशेषज्ञ शामिल थे। इन्हें पूछताछ करने, जांच करने और यह निर्धारित करने के लिए कहा गया था कि क्या पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल नागरिकों पर जासूसी करने के लिए किया गया था और इसकी जांच की निगरानी का जिम्मा शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश आर वी रवींद्रन को दिया गया था। पैनल के सदस्य नवीन कुमार चौधरी, प्रभरण पी और अश्विन अनिल गुमस्ते थे।
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न्यायमूर्ति रवींद्रन कर रहे अध्यक्षता
निगरानी पैनल की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति रवींद्रन को तकनीकी पैनल की जांच की निगरानी में पूर्व आईपीएस अधिकारी आलोक जोशी और अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन/अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रो-तकनीकी आयोग/संयुक्त तकनीकी समिति में उप समिति के अध्यक्ष संदीप ओबेरॉय द्वारा सहायता प्रदान की गई है। पीठ ने समिति से पूरी जांच के बाद रिपोर्ट तैयार करने और इसे जल्द से जल्द अदालत के समक्ष पेश करने को कहा था।
हाल के दिनों में रिपोर्ट सामने आईं कि जांच पैनल को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि बहुत कम लोग इसके सामने पेश होने या तकनीकी जांच के लिए अपने उपकरणों को जमा करने के लिए आगे आ रहे थे।