{"_id":"62d6dd5cac956e1cbf141f48","slug":"sc-stays-delhi-hc-order-asking-aap-govt-to-try-to-clear-backlog-of-unfilled-ews-seats-in-pvt-schools","type":"story","status":"publish","title_hn":"EWS Seats: निजी स्कूलों में ईडब्ल्यूएस सीटों को भरने के हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
EWS Seats: निजी स्कूलों में ईडब्ल्यूएस सीटों को भरने के हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई
Tue, 19 Jul 2022 10:05 PM IST
Amit Mandal
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 19 Jul 2022 10:05 PM IST
सार
जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले में नोटिस जारी करते हाईकोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social media
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली हॉकोर्ट के उस आदेश को लागू करने पर रोक लगा दी जिसमें दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि निजी स्कूल अगले पांच वर्ष में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) श्रेणी के छात्रों के लिए खाली पड़ी सीटों को भर लें। यह देखते हुए कि हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से एक अनुपालन हलफनामा मांगा है और सुनवाई की अगली तिथि चार अगस्त तय की है, सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने की गुहार लगाई गई थी।
विज्ञापन
जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले में नोटिस जारी करते हाईकोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। इसके अलावा पीठ ने हाईकोर्ट के समक्ष आगे की कार्यवाही पर भी रोक लगा दी। 26 मई को हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने निजी स्कूलों में ईडब्ल्यूएस सीटों को चरणबद्ध तरीके से अगले पांच वर्षों में भरने का निर्देश दिया था। हर वर्ष 20 फीसदी सीटों (अनिवार्य वार्षिक 25 फीसदी के अलावा) को भरने का आदेश दिया गया था।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने यह आदेश तब पारित किया जब दिल्ली सरकार के वकील की तरफ से कहा गया कि 132 निजी स्कूल प्रथम दृष्टया ईडब्ल्यूएस श्रेणी में छात्रों के प्रवेश के संबंध में सरकारी आदेशों का उल्लंघन करते हुए पाए गए थे। मंगलवार को याचिकाकर्ता स्कूल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया कि एक लेटर पेटेंट अपील (एलपीए) में यह आदेश पारित किया गया था। वह भी एक ऐसे व्यक्ति के कहने पर जो कि एकलपीठ के समक्ष पक्षकार भी नहीं था। जस्टिस कौल ने चिंता जताई कि हाईकोर्ट ने लेटर पेटेंट अपील (एलपीए) की कार्यवाही को जनहित याचिका (पीआईएल) की तरह माना और आदेश पारित किया।
विज्ञापन