{"_id":"6127ca1ed3b10229b33558b4","slug":"sc-seeks-centres-response-on-pil-seeking-probe-into-alleged-duty-evasion-in-iron-exports-to-china","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट: चीन को लौह अयस्क निर्यात में कथित शुल्क चोरी के मामले में केंद्र से मांगा जवाब, दो हफ्ते का समय दिया","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट: चीन को लौह अयस्क निर्यात में कथित शुल्क चोरी के मामले में केंद्र से मांगा जवाब, दो हफ्ते का समय दिया
Thu, 26 Aug 2021 10:36 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 26 Aug 2021 10:36 PM IST
सार
याचिका में कोर्ट से सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश देने की मांग की गई है। इसके साथ मांग की गई है कि 61 लौह निर्यातक कंपनियों द्वारा कथित शुल्क चोरी की जांच की जाए, जो 2015 से चीन को लौह अयस्क का निर्यात कर रही हैं।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र से लौह अयस्क के निर्यात में कथित शुल्क चोरी से जुड़ी जनहित याचिका पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने केंद्र को दो सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिका में कोर्ट से सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश देने की मांग की गई है। इसके साथ मांग की गई है कि एस्सार स्टील, जिंदल स्टील एंड पावर सहित 61 लौह निर्यातक कंपनियों द्वारा कथित शुल्क चोरी की जांच की जाए, जो 2015 से चीन को लौह अयस्क का निर्यात कर रही हैं।
मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ का शुरू में यह मानना था कि मौजूदा याचिका को वापस लेने के बाद एक नई याचिका दायर करने की जाए। हालांकि, बाद में कोर्ट ने केंद्र से एडवोकेट एमएल शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा कि अगर मामले में जरा सी भी सच्चाई है, तो यह एक गंभीर मामला है।
कांग्रेस ने लगाए थे गंभीर आरोप
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ का शुरू में यह मानना था कि मौजूदा याचिका को वापस लेने के बाद एक नई याचिका दायर करने की जाए। हालांकि, बाद में कोर्ट ने केंद्र से एडवोकेट एमएल शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा कि अगर मामले में जरा सी भी सच्चाई है, तो यह एक गंभीर मामला है।
विज्ञापन
कांग्रेस ने लगाए थे गंभीर आरोप
- मामले में कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार पर नियमों में बदलाव कर कुछ उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया था। पार्टी ने कहा था कि मोदी सरकार ने सत्ता सम्भालते ही नियमों में बदलाव कर कुछ चुनिंदा कंपनियों को लौह अयस्क के निर्यात की इजाजत दी। पार्टी ने सरकार से इन कंपनियों के नाम सार्वजनिक करने और उन पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की थी।
- कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार अपने चंद करीबियों को लाभ पहुंचाने के लिए देश के प्रमुख संस्थानों को नष्ट करने की कोशिश कर रही है। लौह अयस्क का निर्यात अब तक केवल मेटल्स एंड मिनिरल ट्रेंड्स कॉर्पोरेशन (एमएमटीसी) के जरिये किया जाता था, लेकिन वर्तमान सरकार ने सत्ता संभालते ही नियमों में बदलाव कर दिया और कुद्रेमुख आयरन ओर कंपनी लिमिटेड (KIOCL) को कई देशों को लौह अयस्क के निर्यात की अनुमति दे दी। इन देशों में चीन भी शामिल है।
- कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि गलत तरीके से लौह अयस्क पर 30 फीसदी ड्यूटी को छर्रे के माध्यम से बेचने पर ड्यूटी को पूरी तरह माफ कर दिया गया। लौह अयस्क के संकेन्द्रण के मामलों में भी छूट दे दी गई। आरोप है कि इस तरह से लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का लौह अयस्क कई देशों को निर्यात किया गया। कई ऐसी कंपनियों ने भी महत्वपूर्ण लौह अयस्क बिना अनुमति के विदेश भेज दिए और इनमें 12 हजार करोड़ रुपये की ड्यूटी भी चुराई गई।
विज्ञापन