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पश्चिम बंगाल में भाजपा की रथयात्रा पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये निर्देश
Tue, 15 Jan 2019 03:53 PM IST
अमित मंडल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Tue, 15 Jan 2019 03:53 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में भाजपा की रथयात्रा को लेकर नया कार्यक्रम बनाने का निर्देश दिया है। हालांकि कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि भाजपा को उसके गणतंत्र बचाओ यात्रा कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित जनसभाएं और रैलियां आयोजित करने की अनुमति दी जाए। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई से कहा कि वह अपनी प्रस्तावित ‘रथ यात्रा’ का परिवर्तित कार्यक्रम अधिकारियों को दे और उनसे आवश्यक मंजूरी प्राप्त करे।
पीठ ने राज्य सरकार से कहा कि वह संविधान में प्रदत्त बोलने और अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार को ध्यान में रखते हुये रथ यात्रा के लिए भाजपा के परिवर्तित कार्यक्रम पर विचार करे। पीठ ने कहा कि जहां तक संभावित कानून व्यवस्था की स्थिति के प्रति राज्य सरकार की आशंका का संबंध है तो उसे ‘निराधार’ नहीं कहा जा सकता और भाजपा को तर्कसंगत तरीके से इन आशंकाओं को दूर करने के लिये सभी संभव कदम उठाने होंगे।
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शीर्ष अदालत ने इससे पहले पश्चिम बंगाल में रथ यात्रा आयोजित करने के लिये भाजपा की याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा था। भाजपा की राज्य इकाई ने कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 21 दिसंबर, 2018 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसने उसकी रथ यात्रा को अनुमति देने के एकल न्यायाधीश के आदेश को निरस्त कर दिया था।
इस मामले से जुड़े एक वकील ने बताया कि भाजपा ने अब अपना ‘‘गणतंत्र बचाओ यात्रा’’ कार्यक्रम 40 दिन से घटाकर 20 दिन कर दिया है और अब उसकी ‘‘यात्रायें’’ मुर्शीदाबाद में बहरामपुर, दक्षिण 24 परगना जिले में डायमंड हार्बर, मेदिनीपुर और कोलकाता उत्तर संसदीय क्षेत्र से शुरू होंगी। इस वकील ने बताया कि स्कूलों की आगामी परीक्षाओं और आम चुनावों को ध्यान में रखते हुये यह निर्णय लिया गया है।
इससे पहले, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने राज्य में रैली निकालने की अनुमति के लिये शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। इस आयोजन के माध्यम से राज्य के 42 संसदीय क्षेत्रों में सभायें आयोजित की जानी थीं। भाजपा का कहना था कि शांतिपूर्ण तरीके से यात्रायें आयोजित करना उसका मौलिक अधिकार है जिससे उसे वंचित नहीं किया जा सकता।
भाजपा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि राज्य सरकार बार बार नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर हमला कर रही है जिसकी वजह से राज्य सरकार की गतिविधियों को चुनौती देते हुये अलग अलग याचिकायें दायर की गयी हैं।
भाजपा ने दावा किया था कि पहले भी कई बार अंतिम क्षणों में उसे अनुमति देने से इंकार किया जा चुका है । भाजपा का आरोप है कि 2014 से ही राज्य में पार्टी राजनीतिक प्रतिशोध का सामना कर रही है।
बता दें कि इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने रथ यात्रा की अनुमति को रद्द कर दिया था। एकल बेंच ने भाजपा को तीन रथ यात्रा की इजाजत दी थी। ममता सरकार ने एकल बेंच के फैसले के खिलाफ बड़ी बेंच में याचिका लगाई थी।
मुख्य न्यायाधीश देबाशीष कारगुप्ता और न्यायमूर्ति शम्पा सरकार की खंडपीठ ने मामला वापस एकल पीठ के पास भेजते हुए कहा था कि वह इस पर विचार करते वक्त राज्य सरकार की ओर से दी गई खुफिया जानकारी को ध्यान में रखे। दो जजों की पीठ ने यह आदेश राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई के बाद दिया था जिसमें उसने एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी थी।
बड़ी बेंच में की थी ममता सरकार ने अपील
ममता सरकार के फैसले के खिलाफ भाजपा ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसके बाद फैसला भाजपा के पक्ष में आया था, लेकिन बाद में बाजी पलट गई। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने फैसला पलटते हुए रथ यात्रा की इजाजत को रद्द कर दिया था।
एकल बेंच के फैसले को ममता सरकार के लिए झटका बताया जा रहा था क्योंकि उसने भाजपा की रथ यात्राओं की इजाजत नहीं दी थी। इसके बाद भाजपा के लिए झटके वाला साबित हुआ। बड़ी बेंच ने फैसला पलटते हुए रथ यात्रा पर रोक बरकरार रखने का फैसला सुनाया।
राज्य सरकार के तीन सबसे वरिष्ठ अधिकारियों के पैनल ने यात्रा को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। उस आदेश को रद्द करते हुए न्यायमूर्ति तापब्रत चक्रवर्ती की एकल पीठ ने भाजपा के रथ यात्रा कार्यक्रम को मंजूरी दे दी थी।
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SC refused to give a go ahead for the BJP's Yatra in West Bengal. The Apex Court, however, said that the BJP state unit can conduct meetings and rallies. SC said, if BJP comes out with a revised plan of fresh Yatra, that may be considered afresh later. pic.twitter.com/TbvYiRQply
— ANI (@ANI) January 15, 2019विज्ञापन
पीठ ने राज्य सरकार से कहा कि वह संविधान में प्रदत्त बोलने और अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार को ध्यान में रखते हुये रथ यात्रा के लिए भाजपा के परिवर्तित कार्यक्रम पर विचार करे। पीठ ने कहा कि जहां तक संभावित कानून व्यवस्था की स्थिति के प्रति राज्य सरकार की आशंका का संबंध है तो उसे ‘निराधार’ नहीं कहा जा सकता और भाजपा को तर्कसंगत तरीके से इन आशंकाओं को दूर करने के लिये सभी संभव कदम उठाने होंगे।
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शीर्ष अदालत ने इससे पहले पश्चिम बंगाल में रथ यात्रा आयोजित करने के लिये भाजपा की याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा था। भाजपा की राज्य इकाई ने कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 21 दिसंबर, 2018 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसने उसकी रथ यात्रा को अनुमति देने के एकल न्यायाधीश के आदेश को निरस्त कर दिया था।
इस मामले से जुड़े एक वकील ने बताया कि भाजपा ने अब अपना ‘‘गणतंत्र बचाओ यात्रा’’ कार्यक्रम 40 दिन से घटाकर 20 दिन कर दिया है और अब उसकी ‘‘यात्रायें’’ मुर्शीदाबाद में बहरामपुर, दक्षिण 24 परगना जिले में डायमंड हार्बर, मेदिनीपुर और कोलकाता उत्तर संसदीय क्षेत्र से शुरू होंगी। इस वकील ने बताया कि स्कूलों की आगामी परीक्षाओं और आम चुनावों को ध्यान में रखते हुये यह निर्णय लिया गया है।
इससे पहले, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने राज्य में रैली निकालने की अनुमति के लिये शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। इस आयोजन के माध्यम से राज्य के 42 संसदीय क्षेत्रों में सभायें आयोजित की जानी थीं। भाजपा का कहना था कि शांतिपूर्ण तरीके से यात्रायें आयोजित करना उसका मौलिक अधिकार है जिससे उसे वंचित नहीं किया जा सकता।
भाजपा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि राज्य सरकार बार बार नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर हमला कर रही है जिसकी वजह से राज्य सरकार की गतिविधियों को चुनौती देते हुये अलग अलग याचिकायें दायर की गयी हैं।
भाजपा ने दावा किया था कि पहले भी कई बार अंतिम क्षणों में उसे अनुमति देने से इंकार किया जा चुका है । भाजपा का आरोप है कि 2014 से ही राज्य में पार्टी राजनीतिक प्रतिशोध का सामना कर रही है।
बता दें कि इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने रथ यात्रा की अनुमति को रद्द कर दिया था। एकल बेंच ने भाजपा को तीन रथ यात्रा की इजाजत दी थी। ममता सरकार ने एकल बेंच के फैसले के खिलाफ बड़ी बेंच में याचिका लगाई थी।
मुख्य न्यायाधीश देबाशीष कारगुप्ता और न्यायमूर्ति शम्पा सरकार की खंडपीठ ने मामला वापस एकल पीठ के पास भेजते हुए कहा था कि वह इस पर विचार करते वक्त राज्य सरकार की ओर से दी गई खुफिया जानकारी को ध्यान में रखे। दो जजों की पीठ ने यह आदेश राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई के बाद दिया था जिसमें उसने एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी थी।
बड़ी बेंच में की थी ममता सरकार ने अपील
ममता सरकार के फैसले के खिलाफ भाजपा ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसके बाद फैसला भाजपा के पक्ष में आया था, लेकिन बाद में बाजी पलट गई। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने फैसला पलटते हुए रथ यात्रा की इजाजत को रद्द कर दिया था।
एकल बेंच के फैसले को ममता सरकार के लिए झटका बताया जा रहा था क्योंकि उसने भाजपा की रथ यात्राओं की इजाजत नहीं दी थी। इसके बाद भाजपा के लिए झटके वाला साबित हुआ। बड़ी बेंच ने फैसला पलटते हुए रथ यात्रा पर रोक बरकरार रखने का फैसला सुनाया।
राज्य सरकार के तीन सबसे वरिष्ठ अधिकारियों के पैनल ने यात्रा को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। उस आदेश को रद्द करते हुए न्यायमूर्ति तापब्रत चक्रवर्ती की एकल पीठ ने भाजपा के रथ यात्रा कार्यक्रम को मंजूरी दे दी थी।