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Hindi News ›   India News ›   SC permits Bihar ex-MP Prabhunath Singh to appear virtually on 1 September for hearing on quantum of sentence

Supreme Court: बिहार के पूर्व सांसद की वर्चुअल पेशी को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी; सजा की अवधि पर सुनवाई एक को

Mon, 28 Aug 2023 04:21 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 28 Aug 2023 04:21 PM IST
सार

यह मामला 1995 का है। आरोप लगा था कि पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह ने अपने कहे अनुसार वोट नहीं देने पर छपरा के मसरख इलाके के रहने वाले राजेंद्र राय (47) और दारोगा राय (18) की हत्या करवा दी थी। आरोप था कि इन लोगों ने प्रभुनाथ सिंह समर्थित प्रत्याशी को अपना वोट नहीं दिया था। 

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SC permits Bihar ex-MP Prabhunath Singh to appear virtually on 1 September for hearing on quantum of sentence
पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह। - फोटो : पीटीआई (फाइल फोटो)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के पूर्व लोकसभा सांसद प्रभुनाथ सिंह को एक सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के सामने पेश होने की अनुमति दे दी है। शीर्ष अदालत एक सिंतबर को 1995 के दोहरे हत्याकांड मामले में प्रभुनाथ सिंह को दी जाने वाली सजा की अवधी पर सुनवाई करेगी। इससे पहले शीर्ष अदालत ने 18 अगस्त को बिहार के सिवान जिले के महाराजगंज से कई बार के पूर्व सांसद सिंह को हत्या के मामले में बरी करने के निचली अदालत और पटना उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द कर दिया था। सिंह ने जद (यू) और राजद सांसद दोनों के रूप में महाराजगंज का प्रतिनिधित्व किया है।

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न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने पूर्व सांसद को दोषी ठहराते हुए उन्हें एक सितंबर को शारीरिक रूप से पेश होने का आदेश दिया था। उस दिन अदालत सजा को लेकर दलीलें सुनेंगी, जो आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक हो सकती है। इसके बाद सिंह ने एक आवेदन दायर कर सुनवाई के दौरान वर्चुअली उपस्थित होने की अनुमति मांगी थी।
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जस्टिस कौल की अध्यक्षता वाली बेंच ने शुक्रवार को आदेश दिया, "इस पर ध्यान दिया जाए। आवेदक/प्रतिवादी नंबर दो (सिंह) को एक सितंबर, 2023 को सजा के सवाल पर सुनवाई के लिए फिजिकल उपस्थिति के बजाय, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वर्चुअली उपस्थित होने की अनुमति दी गई है, जैसा कि 18 अगस्त, 2023 के फैसले में निर्देशित किया गया था। तदनुसार आवेदन की अनुमति है।
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शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा था, वह एक ऐसे मामले से निपट रही है जो हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली का एक असाधारण दर्दनाक प्रकरण था और निचली अदालत और पटना उच्च न्यायालय के उन्हें बरी करने के आदेश को पलटते हुए सिंह को मामले में दोषी ठहराया। इसमें यह भी पाया गया कि इसमें रत्ती भर भी संदेह नहीं है कि सिंह ने अपने खिलाफ सबूतों को "मिटाने" के लिए हर संभव प्रयास करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। फैसले में कहा गया है कि अभियोजन मशीनरी और ट्रायल कोर्ट के पीठासीन अधिकारी को भी उनकी "अहंकारिता" के एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया गया था।

यह है मामला
दरअसल, यह मामला 1995 का है। आरोप लगा था कि पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह ने अपने कहे अनुसार वोट नहीं देने पर छपरा के मसरख इलाके के रहने वाले राजेंद्र राय (47) और दारोगा राय (18) की हत्या करवा दी थी। आरोप था कि इन लोगों ने प्रभुनाथ सिंह समर्थित प्रत्याशी को अपना वोट नहीं दिया था। 
 

निचली अदालत ने दे दी थी रिहाई
पहले यह मामला निचली अदालत में पहुंचा था। 2008 में सबूतों अभाव में यहां से पूर्व सांसद को रिहाई मिल गई थी। इसके बाद यह मामला पटना हाईकोर्ट में पहुंचा। 2012 में पटना हाईकोर्ट में जब मामला गया तो यहां पर निचली अदालत के फैसले को सही माना। इस फैसले के विरोध में राजेंद्र राय के भाई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 



एमएलए अशोक सिंह हत्याकांड में सजा काट रहे
बता दें कि पूर्व सांसद मसरख के तत्कालीन एमएलए अशोक सिंह की हत्या में जेल में सजा काट रहे हैं। 2017 में कोर्ट ने इस मामले में प्रभुनाथ सिंह को दोषी करार दिया था। पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह 2010 से राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के साथ हैं। वह लालू प्रसाद के करीबी भी माने जाते हैं।

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