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सबरीमाला मंदिर मामले से उठे सवालों पर अब तीन हफ्ते बाद सुनवाई करेगी 9 सदस्यीय संविधान पीठ

Mon, 13 Jan 2020 10:01 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 13 Jan 2020 10:01 PM IST
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SC on Sabarimala Temple says will only hear questions referred in review order passed on 14 November
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केरल के सबरीमाला मंदिर समेत देशभर के धर्म स्थलों में अलग-अलग धर्मों की महिलाओं से होने वाले भेदभाव से संबंधित मामलों पर गंभीरता से विचार करने के लिए पक्षकारों के वकीलों को 17 जनवरी को बैठक करने का आदेश दिया है, ताकि प्रमाणिक आदेश पारित किया जा सके। यह बैठक धार्मिक मामलों मे कोर्ट किस हद तक दखल दे सकता है इस पर विचार के लिए होगी, जिसमें कोर्ट को विचार के लिए भेजे गए सवालों को नए सिरे से और स्पष्ट किया जाएगा। मामले में तीन सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।

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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे की अगुवाई वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल को वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी, राजीव धवन, इंदिरा जयसिंह, वी गिरी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ बैठक कर सुनवाई की रूपरेखा तैयार करने का आदेश दिया है। पीठ ने कहा, वह सबरीमाला मंदिर जैसे हर मामलों की तह तक नहीं जाएगी। हम 14 नवंबर के समीक्षा आदेश के संदभ में ही विचार करेंगे, जिसमें धार्मिक मामलों में न्यायिक दखल की संभावना भी तलाशना है।
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दरअसल, संविधान पीठ ने सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत देने के मसले पर दायर तकरीबन 60 याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। पीठ ने साफ कर दिया कि वह 14 नवंबर को दिए गए समीक्षा आदेश के सवालों पर ही सुनवाई करेगी। पीठ ने साफ तौर पर कहा कि हम सबरीमाला मामले की पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई नहीं कर रहे हैं। हम पांच जजों की पीठ द्वारा भेजे गए मसलों पर ही विचार करेंगे।
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सुनवाई के दौरान जयसिंह ने कहा कि सबरीमाला मामले के दिए गए फैसले को लेकर दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला नवंबर, 2019 में तय किए गए सवालों में अंतर्निहित है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि हमें नहीं लगता कि धर्म की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

 

पांच जजों की पीठ जहां सर्वसम्मति से धार्मिक ममालों को बड़ी पीठ के पास भजने के लिए तैयार हो गई थी। वहीं अदालत के सितंबर 2018 में दिए फैसले को चुनौती देने वाली पुनर्विचार याचिकाओं पर पहले पांच सदस्यीय पीठ सुनवाई कर रही थी। इसे बड़ी पीठ के पास भेजने के लिए 3-2 का फैसला हुआ था। अदालत ने 2018 में सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमाला में प्रवेश करने की अनुमति दे दी थी।

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