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Supreme Court: 40 साल की महिला से दुष्कर्म मामले में 23 साल के इन्फ्लुएंसर को जमानत, कोर्ट ने दिया यह तर्क

Wed, 28 May 2025 02:03 PM IST
कुमार विवेक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 28 May 2025 02:03 PM IST
सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 40 वर्षीय महिला से बलात्कार के आरोपी 23 वर्षीय व्यक्ति को अंतरिम जमानत दे दी। अदालत ने यह देखते हुए जमानत देने का फैसला किया कि नौ महीने से जेल में रहने के बावजूद अब तक आरोप तय नहीं किए गए हैं। कोर्ट ने इस मामले में कुछ सख्त टिप्पणियां भी की हैं। क्या है पूरा मामला, आइए विस्तार से जानते हैं। 

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SC gives interim bail to 23-year-old influencer in harassment case, says 'single hand can't clap'
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 40 वर्षीय महिला से बलात्कार के आरोपी 23 वर्षीय व्यक्ति को अंतरिम जमानत दे दी। अदालत ने यह देखते हुए जमानत देने का फैसला किया कि नौ महीने से जेल में रहने के बावजूद अब तक आरोप तय नहीं किए गए हैं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की है कि महिला "बच्ची नहीं थी" और "एक हाथ से ताली नहीं बज सकती"।

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मामले में पीठ ने दिल्ली पुलिस से किए तीखे सवाल

न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए यह भी पूछा कि दिल्ली पुलिस इस मामले में आरोपी के खिलाफ बलात्कार का मामला कैसे दर्ज कर सकती है, जब महिला स्वेच्छा से उसके साथ गई थी। पीठ ने कहा, "एक हाथ से ताली नहीं बज सकती। आपने किस आधार पर आईपीसी की धारा 376 के तहत मामला दर्ज किया है। वह बच्ची नहीं है। महिला 40 साल की है। वे दोनों एक साथ जम्मू गए थे। आपने धारा 376 क्यों लगाई है? यह महिला सात बार जम्मू जाती है और पति को इसकी कोई परवाह नहीं है।" शीर्ष अदालत ने कहा कि यह अंतरिम जमानत देने का उपयुक्त मामला है, क्योंकि आरोपी नौ महीने से जेल में है और मामले में आरोप तय नहीं हुए हैं।

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आरोपी को ट्रायल कोर्ट में पेश करने के निर्देश

सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि आरोपी को ट्रायल कोर्ट में पेश किया जाए और उसे शर्तों के साथ अंतरिम जमानत दी जाए। पीठ ने कहा कि आरोपी अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा और महिला से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी उस व्यक्ति पर टिप्पणी करते हुए पूछा, "ऐसे लोगों से कौन प्रभावित होता है?" शीर्ष अदालत दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ आरोपित की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उसे जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। पुलिस शिकायत के अनुसार, महिला पहली बार 2021 में सोशल मीडिया के जरिए उसके संपर्क में आई थी, जब वह अपने कपड़ों के ब्रांड को बढ़ावा देने के लिए एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की तलाश कर रही थी।

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क्या है पूरा मामला यहां समझिए?

शुरुआती बातचीत के दौरान, आरोपी ने कथित तौर पर कंटेंट निर्माण के लिए एक आईफोन मांगा था। इसकी व्यवस्था महिला ने जम्मू में एक अधिकृत एपल स्टोर से कराई। हालांकि, आरोपी की ओर से डिवाइस को फिर से बेचने की कोशिश के बाद उनके पेशेवर रिश्ते खराब हो गए। अधिकृत विक्रेता ने महिला के खाते में पैसे वापस कर दिए, लेकिन 20,000 रुपये काटने के बाद। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी ने ये पैसे वापस करने का वादा किया था, लेकिन महिला ने कुछ समय बाद उसके साथ सभी संबंध खत्म करने का फैसला किया। दिसंबर 2021 में, वह व्यक्ति 20,000 रुपये लौटाने और माफी मांगने के लिए नोएडा में महिला के घर गया। इसके बाद उसने उसे कनॉट प्लेस में एक ब्रांड शूट के लिए यात्रा करने के लिए राजी किया। यात्रा के दौरान, आरोपी ने कथित तौर पर उसे नशीला पदार्थ मिलाकर मिठाई दी और वह बेहोश हो गई।

पुलिस ने इन धाराओं के तहत युवक के खिलाफ दर्ज किया था केस

इसके बाद उसे हिंदू राव अस्पताल ले जाया जाएगा, आरोपी कथित तौर पर उसे अस्पताल के पीछे एक सुनसान इलाके में ले गया, उसका यौन उत्पीड़न किया, उसके पर्स से पैसे चुरा लिए और उसकी नग्न तस्वीरें खींच लीं। शिकायत के अनुसार, इसके बाद महिला को कथित तौर पर जम्मू जाने के लिए मजबूर किया गया, जहां उससे ढाई साल तक लगातार यौन शोषण किया गया, जबरन वसूली की गई और धमकियां दी गईं। इस मामले में, भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार), 354 (महिला पर हमला), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 506 (आपराधिक धमकी), 509 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना) और 34 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

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