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Narmada project: सुप्रीम कोर्ट का 2017 के आदेश में संशोधन से इनकार, हर प्रभावित परिवार को मिलेंगे 60 लाख रुपये
Thu, 22 Sep 2022 03:40 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 22 Sep 2022 03:40 PM IST
सार
शीर्ष अदालत ने 8 फरवरी, 2017 को मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर परियोजना (एसएसपी) के प्रत्येक विस्थापित परिवार के लिए 60 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social media
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित परिवारों में से प्रत्येक के लिए 60 लाख रुपये के अंतिम मुआवजे के भुगतान का निर्देश देने वाले अपने 2017 के आदेश में संशोधन की मांग वाली एक याचिका को गुरुवार को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि एक बार अंतिम निपटान पैकेज 60 लाख रुपये प्रति परिवार के रूप में निर्धारित किया गया है, इसमें संशोधन नहीं होगा क्योंकि यह इस अदालत के आदेश की एक वास्तविक समीक्षा होगी।
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वकील ने कहा, वास्तविक मुआवजा 1.28 करोड़ रुपये
अधिवक्ता संजय पारिख ने एक विस्थापित की ओर से दलीलें आगे बढ़ाते हुए कहा कि नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण की मदों में आवेदक का हक 4.293 हेक्टेयर भूमि का होना चाहिए था। पारिख ने बताया कि शीर्ष अदालत के आदेश को ठीक से पढ़ने से पता चलता है कि मुआवजा 30 लाख प्रति हेक्टेयर आंका जाएगा और वास्तविक मुआवजा 1.28 करोड़ रुपये होगा।
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केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि 2017 का आदेश अनुच्छेद 142 के तहत पारित किया गया था और एक संशोधन या स्पष्टीकरण आदेश पारित नहीं किया जा सकता क्योंकि यह अदालत के फैसले की एक वास्तविक समीक्षा होगी। शीर्ष अदालत ने 8 फरवरी, 2017 को मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर परियोजना (एसएसपी) के प्रत्येक विस्थापित परिवार के लिए 60 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था।
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ऐसे 681 परिवारों की शिकायतों को दूर करने के लिए कई दिशा-निर्देश पारित करते हुए, शीर्ष अदालत ने दो हेक्टेयर भूमि के लिए प्रति परिवार 60 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था, और वचन लिया गया था कि वे एक महीने के भीतर जमीन खाली कर देंगे। ऐसा नहीं करने पर अधिकारियों को उन्हें जबरन बेदखल करने का अधिकार होगा। इससे पहले नर्मदा बचाओ आंदोलन ने शीर्ष अदालत को बताया था कि अकेले मध्य प्रदेश में 192 गांव और एक बस्ती प्रभावित होगी और लगभग 45,000 प्रभावित लोगों का पुनर्वास किया जाना बाकी है। एनबीए ने कहा था कि हजारों आदिवासियों और किसानों सहित सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापित कई वर्षों से भूमि आधारित पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं।