फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   SC dismissed plea seeking to examine validity of law allowing hanging by neck

गर्दन से लटकाकर फांसी देने की वैधता की जांच की मांग वाली याचिका खारिज

Tue, 03 Mar 2020 03:20 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 03 Mar 2020 03:20 AM IST
विज्ञापन
SC dismissed plea seeking to examine validity of law allowing hanging by neck
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गर्दन से लटकाकर फांसी देने की वैधता की जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिका में अपराध प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 354 (5) को चुनौती दी गई थी, जिसके मुताबिक जब किसी भी व्यक्ति को मौत की सजा दी जाती है, तो उसे तब तक गर्दन से लटकाए रखा जाए जब तक कि वह मर नहीं जाता।

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की पीठ ने सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट पहले ही तय कर चुका है और मौत की सजा को बरकरार रख चुका है। याचिका में कहा गया है कि यह प्रावधान भारत के संविधान की मूलभूत संरचना और इसकी मौलिक विशेषताओं के खिलाफ है।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट में केरल निवासी 88 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एस परमेश्वरम नमपोथरी द्वारा दायर याचिका में अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 354 (5) को खत्म करने की मांग की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

याचिका में कहा, शरीर का होता है अनादर

याचिका में कहा गया था कि क्या अपराध प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 354 (5) के तहत अनुपालन संभव है, जबकि एक दोषी को सजा से पहले किसी विशेष अवधि के लिए कारावास की सजा से गुजरना पड़ता है और दोषी मानते हुए उसे फांसी देते हुए तब तक गर्दन से लटकाया जाता है, जब तक कि वह मर न जाए। इसके बाद भी उसका शरीर लटकता रहता है जिससे शरीर का अनादर होता है और इस प्रकार यह सजा धारा 354 (5) के दायरे बाहर हो जाती है।
 

फांसी देने वाला किसी की हत्या तो नहीं कर रहा

याचिका में कहा गया था कि क्या दोषी को फांसी देने वाला व्यक्ति सरकारी कर्तव्य कर रहा है या किसी व्यक्ति की हत्या कर रहा है? क्या राज्य किसी व्यक्ति को कर्तव्य निर्वहन में किसी अन्य व्यक्ति को मृत्यु देने का अधिकार दे सकता है? क्या राज्य के पास किसी को ऐसा अधिकार देने की शक्ति है? यदि हां तो वह विशेष प्रावधान क्या है जो किसी व्यक्ति को मृत्यु को प्रशासित करने का अधिकार देता है, विशेष रूप से जब जीवन का अधिकार संविधान में सबसे अहम है।
 

सुप्रीम कोर्ट बरकरार रख चुका है वैधता

याचिका में यह भी कहा गया है कि फांसी की सजा 22 जनवरी, 1947 को अपनाए गए संविधान की प्रस्तावना की भावना के भी खिलाफ है, जिसमें जीवन और स्वतंत्रता के बारे में बात की गई है। जगमोहन सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एआईआर 1973, एससी 947 मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने मृत्युदंड की सांविधानिक वैधता को बरकरार रखा गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed