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इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश हों आजम खान : सुप्रीम कोर्ट
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 08 Mar 2017 06:15 AM IST
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आजम खान
- फोटो : file photo
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सुप्रीम कोर्ट ने सपा नेता व उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री आजम खान के खिलाफ जारी वारंट पर रोक लगाने से इनकार करते हुए उन्हें बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के समक्ष पेश होने को कहा है। उत्तर प्रदेश जल निगम से संबंधित एक मामले में समन के बावजूद पेश न होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजम खान के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर छह मार्च को पेश होने के लिए कहा था। आजम खान यूपी जल निगम के चेयरमैन भी हैं।
चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को आजम खान के खिलाफ जारी वारंट के मामले में दखल देने से इनकार करते हुए आजम खान को बुधवार को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के समक्ष दोपहर दो बजे हाजिर होने के लिए कहा है। पीठ ने आजम खान से कहा कि वह अपनी बातें हाईकोर्ट के समक्ष रखें। इससे पहले आजम खान की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वी गिरी ने पीठ से कहा कि वह हाईकोर्ट में पेश होने और वहां अपनी बातें रखने को तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के कारण वह व्यस्त थे, जिस कारण अदालत में पेश नहीं हो सके। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले से आजम खान का कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आजम खान ने हाईकोर्ट से 11 मार्च के बाद की तारीख लगाने के लिए कहा था, लेकिन हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया।
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मालूम हो कि इस मामले में हाईकोर्ट ने जल निगम के चेयरमैन आजम खान के साथ ही एमडी और चीफ इंजीनियर को एक मार्च को पेश होने के लिए कहा था। एमडी और चीफ इंजीनियर तो पेश हुए, लेकिन आजम खान पेश नहीं हुए। इसके बाद हाईकोर्ट ने आजम खान के खिलाफ जमानती वारंट जारी करते हुए उन्हें छह मार्च को पेश होने के लिए कहा था।
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चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को आजम खान के खिलाफ जारी वारंट के मामले में दखल देने से इनकार करते हुए आजम खान को बुधवार को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के समक्ष दोपहर दो बजे हाजिर होने के लिए कहा है। पीठ ने आजम खान से कहा कि वह अपनी बातें हाईकोर्ट के समक्ष रखें। इससे पहले आजम खान की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वी गिरी ने पीठ से कहा कि वह हाईकोर्ट में पेश होने और वहां अपनी बातें रखने को तैयार हैं।
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उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के कारण वह व्यस्त थे, जिस कारण अदालत में पेश नहीं हो सके। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले से आजम खान का कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आजम खान ने हाईकोर्ट से 11 मार्च के बाद की तारीख लगाने के लिए कहा था, लेकिन हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया।
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मालूम हो कि इस मामले में हाईकोर्ट ने जल निगम के चेयरमैन आजम खान के साथ ही एमडी और चीफ इंजीनियर को एक मार्च को पेश होने के लिए कहा था। एमडी और चीफ इंजीनियर तो पेश हुए, लेकिन आजम खान पेश नहीं हुए। इसके बाद हाईकोर्ट ने आजम खान के खिलाफ जमानती वारंट जारी करते हुए उन्हें छह मार्च को पेश होने के लिए कहा था।
मंत्री होने के बावजूद समन तामील नहीं किया जा सका
सांकेतिक चित्र
पीठ ने चुटकी लेते हुए कहा कि जल निगम के चेयरमैन ही नहीं, बल्कि यूपी के मंत्री होने के बावजूद आजम खान को समन तामील नहीं किया जा सका। सुनवाई के दौरान आजम खान की ओर से बताया कि जिस दिन उन्हें पेश होना था उस दिन उनकी बैठक पहले से प्रस्तावित थी। इस पर पीठ ने कहा कि आपके दस्तावेजों से तो यह कहीं भी इंगित नहीं हो रहा है कि उस दिन आजम खान को किसी बैठक में जाना था।
पीठ ने सवाल किया कि आखिर जब बैठक नहीं थी तो आप अदालत में क्यों नहीं पेश हुए। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी जानना चाहा कि क्या आजम खान के पास निजी हेलीकॉप्टर हैं। जवाब ना में मिलने पर चीफ जस्टिस ने चुटकी लेते हुए कहा कि हमारे पार आंतरिक जानकारी है। वास्तव में चीफ जस्टिस पीठ के दूसरे सदस्य न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की ओर इशारा कह रहे थे, क्योंकि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं।
क्या है मामला
यूपी सर्विस ट्रिब्यूनल ने सहायक अभियंता के खिलाफ की गई विभागीय कार्यवाही को खारिज कर दिया था। ट्रिब्यूनल ने इस आधार पर जल निगम द्वारा शुरू की गई विभागीय कार्यवाही को खारिज किया था कि इसके लिए सक्षम अधिकारी से जरूरी अनुमोदन नहीं लिया गया। इस फैसले को जल निगम ने वर्ष 2013 में हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दिलचस्प है कि याचिका दायर करते वक्त चार्जशीट पर जरूरी हस्ताक्षर न होने के ट्रिब्यूनल की फाइंडिंग को चुनौती नहीं दी गई।
तीन वर्ष बाद जल निगम ने दस्तावेज जारी कर यह दर्शाने की कोशिश की कि चार्जशीट में सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर थे। जिस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया था कि आखिर ये दस्तावेज पहले क्यों नहीं सामने लाया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि यह दस्तावेज बाद में तैयार किया गया। जिसके बाद हाईकोर्ट ने आजम खान व अन्य के खिलाफ समन जारी किया था।
पीठ ने सवाल किया कि आखिर जब बैठक नहीं थी तो आप अदालत में क्यों नहीं पेश हुए। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी जानना चाहा कि क्या आजम खान के पास निजी हेलीकॉप्टर हैं। जवाब ना में मिलने पर चीफ जस्टिस ने चुटकी लेते हुए कहा कि हमारे पार आंतरिक जानकारी है। वास्तव में चीफ जस्टिस पीठ के दूसरे सदस्य न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की ओर इशारा कह रहे थे, क्योंकि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं।
क्या है मामला
यूपी सर्विस ट्रिब्यूनल ने सहायक अभियंता के खिलाफ की गई विभागीय कार्यवाही को खारिज कर दिया था। ट्रिब्यूनल ने इस आधार पर जल निगम द्वारा शुरू की गई विभागीय कार्यवाही को खारिज किया था कि इसके लिए सक्षम अधिकारी से जरूरी अनुमोदन नहीं लिया गया। इस फैसले को जल निगम ने वर्ष 2013 में हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दिलचस्प है कि याचिका दायर करते वक्त चार्जशीट पर जरूरी हस्ताक्षर न होने के ट्रिब्यूनल की फाइंडिंग को चुनौती नहीं दी गई।
तीन वर्ष बाद जल निगम ने दस्तावेज जारी कर यह दर्शाने की कोशिश की कि चार्जशीट में सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर थे। जिस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया था कि आखिर ये दस्तावेज पहले क्यों नहीं सामने लाया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि यह दस्तावेज बाद में तैयार किया गया। जिसके बाद हाईकोर्ट ने आजम खान व अन्य के खिलाफ समन जारी किया था।