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SC: 'NGT बार एसोसिएशन के चुनाव में महिला वकीलों के लिए 33% सीटें करें आरक्षित', सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
Mon, 20 Jan 2025 07:48 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Mon, 20 Jan 2025 07:48 PM IST
सार
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को एनजीटी बार एसोसिएशन चुनाव में वोट देने के लिए दिल्ली बार काउंसिल को उपक्रम देने की जरूरत से छूट दी। पीठ ने कहा, 'दिल्ली बार काउंसिल में नामांकन की आवश्यकता की शर्त एनजीटी बार एसोसिएशन के मामले में लागू नहीं होगी, क्योंकि उक्त बार एसोसिएशन में देश भर के कई बार काउंसिल में पंजीकृत अधिवक्ता शामिल हैं।'
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Supreme Court
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निर्देश दिया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के चुनाव में महिला वकीलों के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएंगी। जस्टिस सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने का उसका आदेश एनजीटी बार एसोसिएशन पर भी लागू होगा। पीठ ने आदेश दिया कि, 'यह निर्देश दिया जाता है कि दिल्ली के उच्च न्यायालय/जिला बार एसोसिएशन में कोषाध्यक्ष और कार्यकारी समिति के कुछ सदस्यों के पद को महिला उम्मीदवारों के लिए निर्धारित करने के संबंध में अंतरिम निर्देश, यथावश्यक परिवर्तनों के साथ एनजीटी बार एसोसिएशन पर भी लागू होंगे। अपेक्षित प्रक्रिया का पालन किया जाए और एनजीटी बार एसोसिएशन के चुनाव में भी महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षण प्रदान किया जाए'।
दिल्ली बार काउंसिल को उपक्रम देने की जरूरत से छूट
हालांकि, पीठ ने वकीलों को एनजीटी बार एसोसिएशन चुनाव में वोट देने के लिए दिल्ली बार काउंसिल को उपक्रम देने की जरूरत से छूट दी। पीठ ने कहा, 'दिल्ली बार काउंसिल में नामांकन की आवश्यकता की शर्त एनजीटी बार एसोसिएशन के मामले में लागू नहीं होगी, क्योंकि उक्त बार एसोसिएशन में देश भर के कई बार काउंसिल में पंजीकृत अधिवक्ता शामिल हैं।'
याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील ने कहा कि दिल्ली में एनजीटी की मुख्य पीठ दिल्ली के अलावा पांच राज्यों - हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश - के लिए है और इन सभी राज्यों के वकील न्यायाधिकरण के समक्ष पेश होते हैं। उन्होंने कहा कि यह कहा जा रहा है कि एनजीटी बार एसोसिएशन चुनाव में मतदान करने के इच्छुक वकीलों को अनिवार्य रूप से उपक्रम देनी होगी कि वे दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकृत हैं।
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दिल्ली उच्च न्यायालय कर रहा चुनाव की निगरानी
वरिष्ठ अधिवक्ता एडीएन राव ने कहा कि याचिका दायर करने वाले वकील ने अन्य लोगों की तरह उपक्रम नहीं दी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय चुनाव की निगरानी कर रहा है और घोषणा की अवधारणा 'एक बार, एक वोट' सुनिश्चित करना है। राव ने कहा, 'हमें इस बात से कोई सरोकार नहीं है कि वह कहां नामांकित है, क्योंकि एनजीटी में हर कोई प्रैक्टिस करता है। जिन लोगों ने कहीं और नामांकन कराया है और एनजीटी में प्रैक्टिस कर रहे हैं, उन्होंने अपना घोषणा पत्र दिया है और उन्हें मंजूरी मिल गई है। उन्होंने दिल्ली बार काउंसिल में घोषणा पत्र जमा नहीं कराया है।'
वहीं याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल ने घोषणा पत्र नहीं भरा है, क्योंकि इसमें दिल्ली बार काउंसिल की नामांकन संख्या का उल्लेख करना जरूरी है। पीठ ने कहा कि कोई भी एनजीटी बार एसोसिएशन चुनाव के लिए दिल्ली बार काउंसिल की नामांकन संख्या पर जोर नहीं दे सकता।
पिछले साल शीर्ष अदालत ने दिया था ये निर्देश
पिछले साल 18 दिसंबर को शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) चुनाव में महिला वकीलों के लिए तीन पद आरक्षित करने का निर्देश दिया था। पीठ ने यह भी निर्देश दिया था कि जिला बार एसोसिएशन के चुनावों में कोषाध्यक्ष का पद और अन्य कार्यकारी समिति के 30 प्रतिशत पद महिला वकीलों के लिए आरक्षित रहेंगे (जिनमें पहले से ही महिलाओं के लिए आरक्षित पद भी शामिल हैं)। पिछले साल 26 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने डीएचसीबीए को निर्देश दिया था कि वह एसोसिएशन के पांच सदस्यीय पदाधिकारी निकाय में एक अन्य पद के अलावा कोषाध्यक्ष का पद भी महिलाओं के लिए आरक्षित रखे।
पीठ ने निर्देश दिया था, 'बार एसोसिएशन की आम सभा कोषाध्यक्ष का पद विशेष रूप से बार एसोसिएशन की महिला सदस्यों के लिए आरक्षित करने पर विचार करेगी।' पीठ ने कहा था, महिला सदस्यों के लिए कोषाध्यक्ष का पद आरक्षित करने के अलावा, आम सभा को बार एसोसिएशन की महिला सदस्यों के लिए पदाधिकारी का एक और पद आरक्षित करने की वांछनीयता पर विचार करने की भी स्वतंत्रता होनी चाहिए।
'10 कार्यकारी सदस्यों में से कम से कम तीन महिला सदस्य'
शीर्ष अदालत ने पहले निर्देश दिया था, 'इसी तरह, 10 कार्यकारी सदस्यों में से कम से कम तीन महिला सदस्य होंगी। आम सभा यह भी तय कर सकती है कि कार्यकारी समिति की तीन महिला सदस्यों में से कम से कम एक वरिष्ठ नामित अधिवक्ता होगी।' पिछले साल 2 मई को बार में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के उद्देश्य से जारी आदेश में न्यायालय ने निर्देश दिया था कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की कार्यकारी समिति में 33 प्रतिशत पद महिला सदस्यों के लिए आरक्षित किए जाएं।
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दिल्ली बार काउंसिल को उपक्रम देने की जरूरत से छूट
हालांकि, पीठ ने वकीलों को एनजीटी बार एसोसिएशन चुनाव में वोट देने के लिए दिल्ली बार काउंसिल को उपक्रम देने की जरूरत से छूट दी। पीठ ने कहा, 'दिल्ली बार काउंसिल में नामांकन की आवश्यकता की शर्त एनजीटी बार एसोसिएशन के मामले में लागू नहीं होगी, क्योंकि उक्त बार एसोसिएशन में देश भर के कई बार काउंसिल में पंजीकृत अधिवक्ता शामिल हैं।'
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याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील ने कहा कि दिल्ली में एनजीटी की मुख्य पीठ दिल्ली के अलावा पांच राज्यों - हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश - के लिए है और इन सभी राज्यों के वकील न्यायाधिकरण के समक्ष पेश होते हैं। उन्होंने कहा कि यह कहा जा रहा है कि एनजीटी बार एसोसिएशन चुनाव में मतदान करने के इच्छुक वकीलों को अनिवार्य रूप से उपक्रम देनी होगी कि वे दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकृत हैं।
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दिल्ली उच्च न्यायालय कर रहा चुनाव की निगरानी
वरिष्ठ अधिवक्ता एडीएन राव ने कहा कि याचिका दायर करने वाले वकील ने अन्य लोगों की तरह उपक्रम नहीं दी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय चुनाव की निगरानी कर रहा है और घोषणा की अवधारणा 'एक बार, एक वोट' सुनिश्चित करना है। राव ने कहा, 'हमें इस बात से कोई सरोकार नहीं है कि वह कहां नामांकित है, क्योंकि एनजीटी में हर कोई प्रैक्टिस करता है। जिन लोगों ने कहीं और नामांकन कराया है और एनजीटी में प्रैक्टिस कर रहे हैं, उन्होंने अपना घोषणा पत्र दिया है और उन्हें मंजूरी मिल गई है। उन्होंने दिल्ली बार काउंसिल में घोषणा पत्र जमा नहीं कराया है।'
वहीं याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल ने घोषणा पत्र नहीं भरा है, क्योंकि इसमें दिल्ली बार काउंसिल की नामांकन संख्या का उल्लेख करना जरूरी है। पीठ ने कहा कि कोई भी एनजीटी बार एसोसिएशन चुनाव के लिए दिल्ली बार काउंसिल की नामांकन संख्या पर जोर नहीं दे सकता।
पिछले साल शीर्ष अदालत ने दिया था ये निर्देश
पिछले साल 18 दिसंबर को शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) चुनाव में महिला वकीलों के लिए तीन पद आरक्षित करने का निर्देश दिया था। पीठ ने यह भी निर्देश दिया था कि जिला बार एसोसिएशन के चुनावों में कोषाध्यक्ष का पद और अन्य कार्यकारी समिति के 30 प्रतिशत पद महिला वकीलों के लिए आरक्षित रहेंगे (जिनमें पहले से ही महिलाओं के लिए आरक्षित पद भी शामिल हैं)। पिछले साल 26 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने डीएचसीबीए को निर्देश दिया था कि वह एसोसिएशन के पांच सदस्यीय पदाधिकारी निकाय में एक अन्य पद के अलावा कोषाध्यक्ष का पद भी महिलाओं के लिए आरक्षित रखे।
पीठ ने निर्देश दिया था, 'बार एसोसिएशन की आम सभा कोषाध्यक्ष का पद विशेष रूप से बार एसोसिएशन की महिला सदस्यों के लिए आरक्षित करने पर विचार करेगी।' पीठ ने कहा था, महिला सदस्यों के लिए कोषाध्यक्ष का पद आरक्षित करने के अलावा, आम सभा को बार एसोसिएशन की महिला सदस्यों के लिए पदाधिकारी का एक और पद आरक्षित करने की वांछनीयता पर विचार करने की भी स्वतंत्रता होनी चाहिए।
'10 कार्यकारी सदस्यों में से कम से कम तीन महिला सदस्य'
शीर्ष अदालत ने पहले निर्देश दिया था, 'इसी तरह, 10 कार्यकारी सदस्यों में से कम से कम तीन महिला सदस्य होंगी। आम सभा यह भी तय कर सकती है कि कार्यकारी समिति की तीन महिला सदस्यों में से कम से कम एक वरिष्ठ नामित अधिवक्ता होगी।' पिछले साल 2 मई को बार में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के उद्देश्य से जारी आदेश में न्यायालय ने निर्देश दिया था कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की कार्यकारी समिति में 33 प्रतिशत पद महिला सदस्यों के लिए आरक्षित किए जाएं।