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ट्रिपल तलाक पर बच्चों की कस्टडी, आदेश पारित करने से SC का इनकार
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
Updated Fri, 26 Aug 2016 11:42 PM IST
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इंडिया कहो या भारत, नाम में क्या रखा है: सुप्रीम कोर्ट्र
- फोटो : Reuters
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ट्रिपल तलाक को लेकर दाखिल एक और मुस्लिम महिला की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। इस महिला के पति ने दुबई से ही फोन पर उसे तलाक दे दिया है। पश्चिम बंगाल में रहने वाली इशरत जहां ने याचिका दाखिल कर ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक और मुस्लिम महिलाओं के गौरवपूर्ण जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन बताया है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इशरत जहां की याचिका पर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय महिला आयोग को नोटिस जारी करते हुए इस मामले को पूर्व में इस संबंध में दाखिल अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है।
इशरत ने अपनी याचिका में कहा है कि उसके पति ने दुबई से फोन पर उसे तलाक दे दिया है और बच्चे उसके पति के पास हैं। महिला ने बच्चों को वापस दिलाने की गुहार की है। साथ ही महिला ने सुरक्षा प्रदान करने की भी गुहार की है। महिला ने निकाह वर्ष 2001 में हुआ था।
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हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की कस्टडी को लेकर किसी तरह का आदेश पारित करने इनकार कर दिया है। पीठ ने महिला को इसके लिए पुलिस से संपर्क करने के लिए कहा है या कलकत्ता हाईकोर्ट केपास जाने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि आप हाईकोर्ट में हैबियस कॉरपस(बंदी प्रत्यक्षीकरण) की याचिका दाखिल कर सकती हैं।
मालूम हो कि इससे पहले नैनीताल की शायरा बानो, जयपुर की आफरीन समेत कई अन्य ने भी ट्रिपल तलाक के खिलाफ याचिका दाखिल की है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए।
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चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इशरत जहां की याचिका पर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय महिला आयोग को नोटिस जारी करते हुए इस मामले को पूर्व में इस संबंध में दाखिल अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है।
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इशरत ने अपनी याचिका में कहा है कि उसके पति ने दुबई से फोन पर उसे तलाक दे दिया है और बच्चे उसके पति के पास हैं। महिला ने बच्चों को वापस दिलाने की गुहार की है। साथ ही महिला ने सुरक्षा प्रदान करने की भी गुहार की है। महिला ने निकाह वर्ष 2001 में हुआ था।
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हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की कस्टडी को लेकर किसी तरह का आदेश पारित करने इनकार कर दिया है। पीठ ने महिला को इसके लिए पुलिस से संपर्क करने के लिए कहा है या कलकत्ता हाईकोर्ट केपास जाने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि आप हाईकोर्ट में हैबियस कॉरपस(बंदी प्रत्यक्षीकरण) की याचिका दाखिल कर सकती हैं।
मालूम हो कि इससे पहले नैनीताल की शायरा बानो, जयपुर की आफरीन समेत कई अन्य ने भी ट्रिपल तलाक के खिलाफ याचिका दाखिल की है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए।