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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट का 'सिख फॉर जस्टिस' के समर्थक को जमानत देने से इनकार; जानें क्या है मामला

Thu, 08 Feb 2024 11:17 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आदर्श शर्मा Updated Thu, 08 Feb 2024 11:17 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने सिख फॉर जस्टिस के कथित सदस्य को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

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SC denies bail to alleged member of Sikhs for Justice in UAPA case
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के पीछे विधायिका का इरादा जेल को नियम और जमानत को अपवाद बनाना था। ऐसे गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में सिर्फ मुकदमे के देरी के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। सर्वोच्च न्यायालय ने इस टिप्पणी के साथ प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस के एक कथित सदस्य की जमानत याचिका खारिज कर दी।

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जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने बुधवार को कहा कि जमानत को लेकर न्यायशास्त्र की पारंपरिक धारणा के लिहाज से अदालतों का विवेक जमानत नियम है और जेल अपवाद, की तरफ झुका होता है। लेकिन यूएपीए से जुड़े मामलों में यह रुख नहीं अपनाया जा सकता। पीठ ने कहा, यह ध्यान रखना दिलचस्प होगा है कि यूएपीए की धारा 43डी(5) में जो प्रावधान है वह किसी भी अन्य कानून में नहीं है। दूसरे अर्थों में यूएपीए में अपनाई गई जमानत सीमा की भाषा अद्वितीय है।
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कोर्ट ने कहा कि यूएपीए के तहत मामलों में जमानत की अस्वीकृति का परीक्षण काफी सरल है। एक नियम के तौर पर जमानत खारिज कर दी जानी चाहिए अगर सरकारी वकील को सुनने अथवा अंतिम रिपोर्ट या केस डायरी देखने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि आरोप प्रथम दृष्टया सच हैं। अदालत ने आगे कहा कि यूएपीए के तहत जमानत देने की सामान्य शक्ति का प्रयोग गंभीर रूप से प्रतिबंधात्मक है।
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गवाहों को कर सकता है प्रभावित
अमेरिकी निवासी गुरपतवंत सिंह पन्नू की तरफ से संचालित किए जा रहे संगठन सिख फॉर जस्टिस से जुड़े होने के संदेह में गिरफ्तार गुरविंदर सिंह को जमानत देने से इन्कार करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि अपीलकर्ता को जमानत पर छोड़ा जाता है तो पूरी आशंका है कि मामले के प्रमुख गवाहों को प्रभावित करेगा, जिससे न्याय की प्रक्रिया बाधित हो सकती है। पीठ ने याचिकाकर्ता की इस दलील को खारिज कर दिया कि मुकदमे में देरी को देखते हुए उसे जमानत दी जानी चाहिए।

आतंकी मॉड्यूल के साथ था संबंध
गुरविंदर सिंह ने जमानत याचिका खारिज करने के पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ शीर्ष कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। गुरविंदर को 2018 में आतंकवादी संगठन के एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने के बाद गिरफ्तार किया गया था। एनआईए ने पंजाब पुलिस से मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया था। कोर्ट ने 9 दिसंबर 2021 को आरोप तय किए थे।


धन के लेन-देन से संलिप्तता के संकेत
पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री प्रतिबंधित आतंकी संगठन के सदस्यों की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में अपीलकर्ता की संलिप्तता का संकेत देती है, जिसमें विभिन्न चैनलों के माध्यम से बड़ी मात्रा में धन का आदान-प्रदान शामिल है। इन प्रथम दृष्टया साक्ष्यों से पता चलता है कि वह यूएपीए की धारा 18 के तहत आतंकवादी कृत्यों में शामिल होने का आरोपी है।

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