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SC का फैसला, गंगा सफाई की कमान अब एनजीटी के पास

Wed, 25 Jan 2017 04:33 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 25 Jan 2017 04:33 AM IST
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sc assigned clean ganga case to national green tribunal
- फोटो : SELF

समय की कमी का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गंगा नदी की सफाई को लेकर वर्ष 1985 में दायर जनहित याचिका को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के पास भेज दिया है। मालूम हो कि गंगा की सफाई के कुछ पहलुओं पर एनजीटी वर्ष 2014 से सुनवाई कर रहा है। 

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चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि ठोस कचरा और औद्योगिक प्रदूषण के मसले पर एनजीटी रोजाना सुनवाई कर रहा है लिहाजा गंगा के प्रदूषण के अन्य कारकों के मसले को भी एनजीटी द्वारा सुना जाना चाहिए। 
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पीठ ने एनजीटी को हर छह महीने में प्रगति रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत पर्यावरणविद् एमसी मेहता द्वारा वर्ष 1985 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि अगर उन्हें किसी तरह की परेशानी हुई तो वह शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। 

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पीठ ने 32 वर्ष पूर्व दायर इस जनहित याचिका का निपटारा कर दिया

sc assigned clean ganga case to national green tribunal

याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि एनजीटी इस मामले की सुनवाई कर रहा है लेकिन उसके पास अनुपालन तंत्र नहीं है। जवाब में पीठ ने कहा कि एनजीटी अधिनियम के तहत आदेश का पालन न करने पर जुर्माने के साथ-साथ दंड का भी प्रावधान है। यह कहते हुए पीठ ने 32 वर्ष पूर्व दायर इस जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। 

पीठ ने कहा कि लंबे समय से यह मामला चल रहा है। हमारे लिए इस मसले पर साल-दर-साल निगरानी रखना संभव नहीं है, ऐसे में तब जबकि एनजीटी इन मामलों को देख रहा है। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत इस मसले पर पहले ही काफी वक्त और ऊर्जा खर्च कर चुकी है।

एमसी मेहता ने वर्ष 1985 में जनहित याचिका दायर कर अदालत को हरिद्वार के निकट भद्राबाद स्थित बीएचईएल की इकाई द्वारा बड़े पैमाने पर औद्योगिक कचरा गंगा में डाले जाने की जानकारी दी थी। याचिका में मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया गया था।

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