कावेरी जल विवाद: SC ने राज्य सरकारों से पूछा क्यों उड़ी कानून की धज्जियां?
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कावेरी जल विवाद पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि कानून के होने पर हिंसा का कोई मतलब नहीं बनता है? साथ ही कोर्ट ने कर्नाटक और तमिलनाडु की सरकारों से पूछा कि लोगों को कानून अपने हाथ में लेने की जरूरत ही क्यों पड़ी?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कर्नाटक सरकार ने तो तमिलनाडु के लिए जल छोड़ दिया लेकिन आम जनता के गले यह फैसला नहीं उतरा। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध ही विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।
शीर्ष अदालत के आदेशों के विरोध में कर्नाटक में बंद का ऐलान किया गया जिसके कारण राज्य में जनजीवन अस्त व्यस्त रहा। हालांकि, इसका असर मिला जुला ही देखने को मिला, जहां बंगलुरू और मैसूर जैसे बड़े शहरों में तो सबकुछ ठप रहा, वहीं छोटे जिलों में बंद का आंशिक असर रहा।
विरोध प्रदर्शन से व्यवस्था पटरी से उतरी
इससे पूर्व राजधानी बंगलुरू में बंद के दौरान व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरी नजर आई। सरकारी ऑफिस खुले जरूर, लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पूरी तरह ठप होने के कारण कर्मचारी अपने ऑफिसों तक नहीं पहुंच पाए।
बता दें कि कुछ दिन पहले कोर्ट ने लंबे समय से चले आ रहे कावेरी जल विवाद में कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए नदी का जल छोड़ने का आदेश दिया था। जिसके बाद से ही राज्य में विरोध प्रदर्शन का सिलसिला तेज हो गया है।
शहर में विप्रो, इन्फोसिस सहित 400 से ज्यादा नेशनल और मल्टीनेशनल कंपनियों में छुट्टी रही। अगर कहीं कोई ऑफिस खुला भी तो विरोध प्रदर्शन करने वालों ने उसे जबरन बंद करा दिया।